वाराणसी (रणभेरी): अमेरिका के शिकागो में पले-बढ़े और इलिनोइस विश्वविद्यालय से न्यूरो सर्जरी की पढ़ाई करने के बाद संन्यास लेने वाले अखंड स्वामी इन दिनों काशी पहुंचे हुए हैं। उन्होंने IIT-BHU में छात्रों के साथ संवाद किया और ‘इनसाइड द ब्रेन बियॉन्ड द माइंड’ विषय पर व्याख्यान दिया।अपने संबोधन में स्वामी अखंड ने कहा कि जब परमात्मा की कृपा होती है और जीवन में कोई बड़ा उद्देश्य दिखाई देता है, तब भौतिक चीजों को छोड़ना कठिन नहीं लगता। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि कोई व्यक्ति एक लाख रुपये की नौकरी कर रहा हो और उसी काम के लिए उसे एक करोड़ रुपये का अवसर मिल जाए तो पुरानी नौकरी अपने आप छूट जाती है, क्योंकि सामने बड़ा लक्ष्य दिखाई देने लगता है।
उन्होंने कहा कि इसी तरह जब जीवन में आध्यात्मिक दृष्टि और बड़ा उद्देश्य मिलता है तो समृद्धि, सुख-सुविधाएं और विलासिता भी धीरे-धीरे स्वयं ही पीछे छूट जाती हैं। उनके अनुसार, उनके जीवन में भी ऐसा ही हुआ जब ईश्वर की कृपा से उन्हें अपने जीवन का बड़ा उद्देश्य समझ में आया।
स्वामी अखंड ने कहा कि आध्यात्मिकता अपने आप में सबसे बड़ा विज्ञान है और विज्ञान तथा अध्यात्म को अलग-अलग नहीं माना जा सकता। उनका कहना था कि जो व्यक्ति सच्चे अर्थों में आध्यात्मिक होता है, वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी रखता है। अध्यात्म की गहराई में जाने पर मनुष्य ज्ञान के व्यापक आयामों से जुड़ जाता है।छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में कठिनाइयां सभी के सामने आती हैं, लेकिन जो व्यक्ति उनसे घबराता नहीं और उनका सामना करता है, वही आगे बढ़ता है। उन्होंने बताया कि अपने जीवन में उन्हें अनेक संतों का सान्निध्य मिला और गुरु से दीक्षा प्राप्त हुई, जिसने उनके मार्ग को स्पष्ट किया।
अंत में उन्होंने छात्रों से कहा कि अपने-अपने कार्य को पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ करना ही सच्ची भक्ति है। चाहे कोई डॉक्टर हो, इंजीनियर हो या किसी अन्य क्षेत्र में कार्यरत हो, अपने कर्म को पूरी निष्ठा से निभाना ही सबसे बड़ी साधना है।
