वाराणसी (रणभेरी): ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अब धर्मयुद्ध का शंखनाद किया जाएगा। शुक्रवार शाम 5 बजे वाराणसी के शंकराचार्य घाट पर छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाते हुए इस अभियान का संकल्प लिया जाएगा।
शंकराचार्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए केवल पांच दिन का समय शेष है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी के कई नेता इस मांग का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई खुलकर सामने नहीं आया है।
उन्होंने आगे बताया कि 7 मार्च को वाराणसी में हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा, जिसके बाद वे लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे। वहां साधु-संतों की उपस्थिति में आगे की रणनीति और निर्णय सार्वजनिक किए जाएंगे। साथ ही उन लोगों के नाम भी सामने लाए जाएंगे, जो इस अभियान का समर्थन कर रहे हैं।
प्रयागराज में विवाद के बाद बढ़ा मामला
शंकराचार्य से जुड़ा विवाद माघ मेले के दौरान सामने आया था। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में प्रशासन और शंकराचार्य के बीच तनातनी की स्थिति बनी थी। इसके कुछ दिन बाद 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत करते हुए माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों के यौन शोषण के आरोप लगाए।
पुलिस द्वारा कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। इसके बाद 13 फरवरी को दो बच्चों को अदालत में पेश किया गया और 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए। कोर्ट के निर्देश पर उसी दिन झूंसी थाने में मामला दर्ज किया गया, जिसमें शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और कुछ अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया।
इस मामले में 24 फरवरी को शंकराचार्य ने प्रयागराज के एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर साजिश रचने का आरोप लगाया। वहीं गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की। 27 फरवरी को हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च तय करते हुए तब तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
