(रणभेरी): राजधानी स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक लाल बारादरी भवन को लेकर मंगलवार को एक बार फिर हलचल तेज हो गई। परिसर में एहतियातन भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रॉक्टोरियल टीम और पुलिस अधिकारियों ने छात्र संगठनों से वार्ता कर स्थिति सामान्य करने की कोशिश की।
बताया जा रहा है कि जर्जर घोषित लाल बारादरी भवन को लेकर विभिन्न छात्र संगठनों के बीच मतभेद उभर आए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े छात्रों ने भवन में कथित तोड़फोड़, परिसर में सड़क पर नमाज और इफ्तार आयोजन के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया। साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद अवैध मजारों की जांच कर कार्रवाई की मांग उठाई।
इधर, एनएसयूआई, समाजवादी छात्र सभा और आईसा से जुड़े छात्र लाल बारादरी का ताला खुलवाने की मांग पर अड़े रहे। संयुक्त छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने सुबह से ही भवन के आसपास एकत्र होकर नारेबाजी की और प्रशासनिक भवन तक मार्च निकाला। दोपहर बाद मुख्य द्वार पर धरना भी दिया गया, जिससे परिसर का माहौल तनावपूर्ण बना रहा।इस बीच सड़क पर नमाज पढ़े जाने के विरोध में राष्ट्रीय शिक्षार्थी दल के छात्रों ने टैगोर पार्क में हनुमान चालीसा का पाठ कर अपना विरोध जताया।स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रशासनिक भवन से लेकर लाल बारादरी तक सुरक्षा कड़ी कर दी। मुख्य कुलानुशासक प्रो. राकेश द्विवेदी के नेतृत्व में प्रॉक्टर बोर्ड ने छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत की, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर कायम रहे।एबीवीपी के छात्र नेताओं ने प्रॉक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। वहीं अन्य छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय परिसर को शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित रखने की बात कही।विश्वविद्यालय प्रवक्ता प्रो. मुकुल श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि लाल बारादरी भवन अत्यंत जर्जर स्थिति में है। सुरक्षा के मद्देनजर उसमें प्रवेश पर रोक लगाई गई है और बाहर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि भवन के जीर्णोद्धार को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से पत्राचार किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह सुरक्षा के आधार पर लिया गया है और इसका किसी भी समुदाय से कोई संबंध नहीं है।
