वाराणसी (रणभेरी): बहुचर्चित अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के प्रयास से जुड़े एक पुराने मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी। अदालत ने युवती को नौकरी दिलाने के बहाने महानगर ले जाकर शारीरिक शोषण करने और बाद में उसके भाई को पेट्रोल डालकर जला देने के अपराध को बेहद गंभीर मानते हुए कठोर टिप्पणी भी की।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुलदीप सिंह द्वितीय की अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद देवरिया जनपद के रहने वाले महेश्वर पांडेय और उसके भांजे कुंजेश पांडेय को दोषी करार दिया। दोनों अभियुक्तों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
नौकरी दिलाने के नाम पर ले गया मुंबई
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सारनाथ क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता को वर्ष 2012 में आरोपी महेश्वर पांडेय ने बेहतर नौकरी दिलाने का भरोसा देकर मुंबई बुलाया। वहां कुछ समय रखने के बाद वह उसे गोवा ले गया। आरोप है कि इस दौरान आरोपी ने युवती को डराकर और जान से मारने की धमकी देकर कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया।
पीड़िता ने अदालत में बयान देते हुए कहा कि आरोपी लगातार उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था और धमकी देता था कि यदि उसने विरोध किया या घर लौटने की कोशिश की तो उसके माता-पिता और भाई की हत्या कर दी जाएगी। इसी डर के कारण वह लंबे समय तक आरोपी के कब्जे में रहने को मजबूर रही।
2013 में बच्ची का हुआ जन्म
सुनवाई के दौरान पीड़िता ने बताया कि आरोपी के साथ रहने के दौरान वर्ष 2013 में उसने एक बच्ची को जन्म दिया। वह लगातार प्रताड़ना और धमकियों का सामना करती रही। कई बार घर लौटने की कोशिश की, लेकिन आरोपी उसे डराता-धमकाता रहा।
काफी समय बाद अप्रैल 2016 में वह किसी तरह आरोपी के चंगुल से निकलकर वाराणसी पहुंचने में सफल हुई। हालांकि घर लौटने के बाद भी आरोपी फोन पर धमकियां देता रहा और वापस मुंबई चलने का दबाव बनाता रहा।
घर पहुंचकर किया हमला
अदालत में पेश साक्ष्यों के मुताबिक, 18 अप्रैल 2016 की सुबह आरोपी महेश्वर अपने भांजे कुंजेश के साथ पीड़िता के घर पहुंचा। दोनों कथित तौर पर पीछे के रास्ते से मकान में घुसे और बाहर आने के लिए आवाज लगाने लगे।
जैसे ही पीड़िता का भाई बाहर निकला, दोनों आरोपियों ने उस पर पेट्रोल उड़ेल दिया। इसके बाद घर के अंदर भी ज्वलनशील पदार्थ फेंककर आग लगा दी। आग लगते ही घर में अफरा-तफरी मच गई और सामान, कपड़े, पर्दे समेत कई वस्तुएं जलकर राख हो गईं। घटना में गंभीर रूप से झुलसे युवक को तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
“मुंबई नहीं चली तो जला देंगे”
पीड़िता के मुताबिक, घटना के समय आरोपियों ने उसे भी धमकी दी थी कि यदि वह उनके साथ वापस नहीं गई तो उसे भी जिंदा जला दिया जाएगा। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
अदालत ने माना अपराध गंभीर
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों और अन्य साक्ष्यों को अदालत में प्रस्तुत किया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त हैं। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि महिलाओं के खिलाफ इस तरह के अपराध समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक हैं और ऐसे मामलों में कठोर दंड जरूरी है, ताकि समाज में कानून का भय बना रहे।
