8 नवंबर को दोपहर 1:22 बजे से रात 2:40 बजे तक तीन मुहूर्तों में कर सकेंगे पूजा, कमल का फूल और श्रीसूक्त पाठ का विशेष महत्व
वाराणसी (रणभेरी): दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए इस बार तीन स्थिर लग्न में शुभ मुहूर्त रहेगा। 8 नवंबर को दोपहर 1:22 बजे से रात 2:40 बजे तक तीन अलग-अलग समय पर श्रद्धालु मां लक्ष्मी का पूजन कर सकेंगे। ज्योतिषाचार्य श्रीराम शर्मा के अनुसार, गृहस्थों के लिए शाम का वृष लग्न विशेष फलदायी माना गया है। वहीं, बड़े व्यापारी रात के सिंह लग्न में पूजा कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि लक्ष्मी पूजन के लिए पहला मुहूर्त कुंभ लग्न में दोपहर 1:22 से 2:53 बजे तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त शाम 6 से 7:54 बजे तक वृष लग्न में है। तीसरा मुहूर्त रात 12:26 से 2:40 बजे तक सिंह लग्न में रहेगा।
स्थिर लग्न में पूजन का विशेष महत्व
ज्योतिष के अनुसार, 12 राशियों को चर, स्थिर और द्विस्वभाव तीन श्रेणियों में बांटा गया है। वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ स्थिर राशियां हैं। इन राशियों के उदय होने के समय को स्थिर लग्न कहा जाता है। स्थिर का अर्थ है अपनी जगह पर बने रहना और जल्दी परिवर्तन न होना। धार्मिक मान्यता है कि स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर और कारोबार में धन-संपत्ति, सुख-समृद्धि और वैभव बना रहता है। इसी कारण दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के लिए स्थिर लग्न को विशेष महत्व दिया जाता है।
लाल वस्त्र पहनाएं, कमल का फूल करें अर्पित
ज्योतिषाचार्य श्रीराम शर्मा के मुताबिक, लक्ष्मी पूजन से पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। मां लक्ष्मी का लाल वस्त्रों से श्रृंगार कर उन्हें कमल का फूल अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा फल, नैवेद्य और साबुत धनिया चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर विधि-विधान से पूजा करें। पूजन के दौरान श्रीसूक्त का पाठ करना भी विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में मनाते हैं दीपावली
दीपावली मनाने की परंपरा भगवान श्रीराम के 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटने की खुशी से जुड़ी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दशहरे के दिन रावण वध के बाद भगवान श्रीराम ने लंका में विभीषण को राजगद्दी सौंपी और माता सीता व लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे। उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था। तभी से दीप जलाने और दीपोत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है।
