वाराणसी (रणभेरी): काशी में भारतीय वायुसेना के एयर शो के तीसरे दिन रविवार को गंगा घाटों पर देशभक्ति और रोमांच का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह नौ बजे से ही नमो घाट और आसपास के गंगा घाटों पर दर्शकों की भीड़ जुटने लगी। घाटों की सीढ़ियों पर जगह-जगह लोग अपने स्थान पर बैठ गए और आसमान में होने वाले विमानों के रोमांचक करतबों का इंतजार करने लगे। ‘विंग्स ओवर गंगा’ थीम पर आयोजित इस एयर शो में लड़ाकू विमानों की गर्जना, हेलीकॉप्टरों की उड़ान और तिरंगे की छटा ने माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
नमो घाट पहुंचे पीएम मोदी, पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार सुबह 10:10 बजे वाराणसी एयरपोर्ट पहुंचे। यहां से वह मिर्जामुराद के खोचवां पहुंचे, जहां उन्होंने अरविंद मिल की नई यूनिट का उद्घाटन किया और 40 महिला कर्मियों से संवाद किया। इसके बाद प्रधानमंत्री हेलीकॉप्टर से पुलिस लाइन ग्राउंड पहुंचे और वहां से अपने काफिले के साथ नमो घाट पहुंचे।
दोपहर करीब 12:50 बजे नमो घाट पर प्रधानमंत्री का स्वागत भारतीय वायुसेना के अधिकारियों और पार्टी नेताओं ने किया। इस दौरान देशभक्ति गीतों की गूंज के बीच पुष्पवर्षा की गई। प्रधानमंत्री ने हाथ हिलाकर वहां मौजूद लोगों का अभिवादन किया। घाट पर मौजूद लोगों ने ‘नमो-नमो’ के जयघोष के साथ उनका स्वागत किया।
प्रधानमंत्री के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद रहे। सभी ने गंगा के ऊपर आयोजित एयर शो में भारतीय वायुसेना के विमानों का प्रदर्शन देखा।
आसमान में दिखी भारतीय वायुसेना की ताकत
एयर शो के दौरान भारतीय वायुसेना के विभिन्न लड़ाकू विमानों और सहायक विमानों ने अलग-अलग फॉर्मेशन में उड़ान भरकर अपनी क्षमता, गति और आपसी तालमेल का प्रदर्शन किया। सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, जगुआर, मिराज-2000, एलसीए तेजस और मिग-29 जैसे लड़ाकू विमानों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया।
विमानों की गर्जना से गंगा का आसमान गूंज उठा। दर्शक लगातार आसमान की ओर नजरें टिकाए रहे। प्रधानमंत्री मोदी भी विमानों के प्रदर्शन के दौरान तालियां बजाकर वायुसेना के कौशल की सराहना करते नजर आए।
‘प्रचंड’ फॉर्मेशन में दिखी लड़ाकू विमानों की ताकत
‘प्रचंड’ फॉर्मेशन में सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, जगुआर, मिराज-2000, एलसीए तेजस और मिग-29 सहित छह प्रकार के लड़ाकू विमानों को एरोहेड यानी तीर की नोक जैसी आकृति में उड़ान के लिए रखा गया। अलग-अलग आकार और बनावट वाले विमानों का एक साथ इस तरह उड़ना दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहा।
इस फॉर्मेशन ने भारतीय वायुसेना के विभिन्न लड़ाकू विमानों की विविधता और समूह में उड़ान के दौरान पायलटों के समन्वय को प्रदर्शित किया। वायुसेना की ब्रीफिंग में इस फॉर्मेशन को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रदर्शित युद्ध क्षमता से भी जोड़ा गया था। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि फॉर्मेशन में शामिल हर विमान ने ऑपरेशन सिंदूर में भाग लिया था।
‘नीलकंठ’ फॉर्मेशन में तीन राफेल ने भरी उड़ान
‘नीलकंठ’ फॉर्मेशन में तीन राफेल लड़ाकू विमानों के समूह ने गंगा के ऊपर उड़ान भरकर दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। फ्रांस में निर्मित राफेल भारतीय वायुसेना का बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है, जिसका इस्तेमाल हवाई सुरक्षा और जमीन पर स्थित लक्ष्यों के विरुद्ध कार्रवाई सहित विभिन्न सैन्य अभियानों में किया जा सकता है।

तीनों विमानों का एक साथ उड़ना और निर्धारित दूरी बनाए रखना पायलटों के कौशल और तालमेल का प्रदर्शन रहा। राफेल की तेज गर्जना सुनते ही घाटों पर मौजूद लोगों की निगाहें आसमान पर टिक गईं।
‘पशुपति’ फॉर्मेशन में जगुआर विमानों का डायमंड प्रदर्शन
‘पशुपति’ फॉर्मेशन में चार जगुआर विमानों की हीरे जैसी आकृति में उड़ान को प्रदर्शित किया गया। भारतीय वायुसेना में जगुआर को ‘शमशेर’ नाम से भी जाना जाता है। यह विमान मुख्य रूप से जमीन पर स्थित लक्ष्यों के विरुद्ध हमले के लिए विकसित किया गया था और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता के लिए जाना जाता है।

चार विमानों की डायमंड आकृति ने दर्शकों को आकर्षित किया। एक साथ उड़ान भरते समय विमानों के बीच उचित दूरी और तालमेल बनाए रखना इस तरह की प्रस्तुति का अहम हिस्सा रहा। फॉर्मेशन का नाम काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा है।
स्वदेशी तेजस ने ‘अस्सी’ फॉर्मेशन में दिखाया दम
‘अस्सी’ फॉर्मेशन में स्वदेशी एलसीए तेजस लड़ाकू विमान के कम ऊंचाई पर एरोबेटिक प्रदर्शन को प्रमुखता दी गई। भारत में विकसित तेजस हल्का लड़ाकू विमान है, जिसकी पहचान उसके एक इंजन और त्रिकोणाकार पंखों से होती है। तेजस की उड़ान ने भारतीय विमानन तकनीक और स्वदेशी लड़ाकू विमान निर्माण की क्षमता को प्रदर्शित किया। गंगा के ऊपर विमान की उड़ान के दौरान दर्शक उसकी गति और दिशा पर नजर बनाए रहे।

‘नटराज’ फॉर्मेशन में नौसेना के पी-8आई के साथ मिराज-2000
‘नटराज’ फॉर्मेशन में भारतीय नौसेना के पी-8आई समुद्री निगरानी विमान के साथ दो मिराज-2000 लड़ाकू विमानों की उड़ान निर्धारित थी। पी-8आई का उपयोग समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों में किया जाता है, जबकि मिराज-2000 भारतीय वायुसेना का बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है।

आकार में बड़े पी-8आई और अपेक्षाकृत छोटे लड़ाकू विमानों की संयुक्त उड़ान ने दर्शकों को अलग-अलग सैन्य क्षमताओं की झलक दिखाई। यह प्रस्तुति समुद्री निगरानी और हवाई सुरक्षा के महत्व को सामने लाने वाली रही।
‘भैरव’ फॉर्मेशन में सी-295 और डोर्नियर विमानों का प्रदर्शन
‘भैरव’ फॉर्मेशन में एक सी-295 और दो डोर्नियर विमानों के विक्ट्री फॉर्मेशन में मुख्य मंच के सामने से गुजरने का कार्यक्रम था। सी-295 आधुनिक परिवहन विमान है, जबकि डोर्नियर विमानों का उपयोग निगरानी, संपर्क और अन्य सहायक कार्यों में किया जाता है।
इस प्रस्तुति ने दिखाया कि वायुसेना की संचालन क्षमता केवल लड़ाकू विमानों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि परिवहन और सहायक विमानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। समूह में उड़ान के दौरान विमानों के बीच तालमेल ने दर्शकों का ध्यान खींचा।
‘भागीरथी’ फॉर्मेशन में लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की झलक
‘भागीरथी’ फॉर्मेशन में स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर यानी एलसीएच और अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों की डायमंड आकृति में उड़ान निर्धारित थी। भारत में विकसित एलसीएच हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जबकि अपाचे अमेरिकी मूल का हमला करने वाला हेलीकॉप्टर है।
दोनों प्रकार के हेलीकॉप्टरों की संयुक्त प्रस्तुति ने सैन्य अभियानों में लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की भूमिका और समूह में उड़ान के दौरान आवश्यक समन्वय को दर्शाया। डायमंड फॉर्मेशन में उड़ान भरने के लिए पायलटों को सटीक दूरी और स्थिति बनाए रखनी होती है।
तीन चेतक हेलीकॉप्टरों ने तिरंगे के साथ भरी उड़ान
एयर शो के दौरान ग्रुप कैप्टन दीपांकर के नेतृत्व में तीन चेतक हेलीकॉप्टरों से तिरंगा लहराया गया। आसमान में लहराते तिरंगे और विमानों की गर्जना ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। इसी दौरान सुखोई-30 एमकेआई की उड़ान ने भी लोगों का ध्यान खींचा।
गंगा के ऊपर भारतीय वायुसेना के विमानों और हेलीकॉप्टरों की प्रस्तुतियों ने काशी के आसमान को रोमांचक बना दिया। घाटों पर मौजूद लोगों के लिए यह आयोजन केवल एक एयर शो नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के साहस, तकनीकी क्षमता और अनुशासन को करीब से देखने का अवसर भी रहा।
पीएम मोदी ने तालियां बजाकर बढ़ाया वायुसेना का उत्साह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नमो घाट पर बैठकर विमानों के प्रदर्शन का अवलोकन किया। जैसे-जैसे अलग-अलग फॉर्मेशन में विमान उनके सामने से गुजरते गए, कार्यक्रम का रोमांच बढ़ता गया।
वायुसेना के अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम में विमानों की गर्जना, सटीक फॉर्मेशन और तिरंगे के साथ हेलीकॉप्टरों की उड़ान प्रमुख आकर्षण रहे। काशी के गंगा घाटों पर उमड़ी भीड़ ने भी पूरे उत्साह के साथ एयर शो का आनंद लिया। ‘विंग्स ओवर गंगा’ के जरिए भारतीय वायुसेना की हवाई क्षमता और पायलटों के कौशल की शानदार झलक देखने को मिली।
