- एयर शो से प्रेरित होकर शिल्पकार कुंज बिहारी सिंह ने एक महीने में बनाई प्रतिकृति,
- कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया से भी मिले करीब 100 पीस के ऑर्डर
वाराणसी (रणभेरी) : काशी के भव्य एयर शो से प्रेरित होकर गुलाबी मीनाकारी के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिल्पकार कुंज बिहारी सिंह ने चांदी से राफेल लड़ाकू विमान का आकर्षक मॉडल तैयार किया है। करीब 400 ग्राम चांदी और बनारस की पारंपरिक गुलाबी मीनाकारी से सजी इस कलाकृति की कीमत लगभग एक लाख रुपये बताई जा रही है। एयर शो के समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को यह मॉडल भेंट किए जाने की बात कही गई है।
कुंज बिहारी सिंह ने बताया कि एयर शो की तैयारियां शुरू होने के साथ ही उन्होंने इस आयोजन को यादगार बनाने के लिए कुछ खास बनाने की योजना बनाई। इसके बाद राफेल लड़ाकू विमान की प्रतिकृति तैयार करने का विचार आया। करीब एक महीने की मेहनत के बाद चांदी और गुलाबी मीनाकारी से सजा यह मॉडल तैयार हुआ। शिल्पकार के मुताबिक, यह कलाकृति काशी की पारंपरिक कला और आधुनिक भारत की सैन्य उपलब्धियों को एक साथ प्रस्तुत करती है।
तस्वीर भेजते ही मिले 100 ऑर्डर
राफेल मॉडल की तस्वीर ग्राहकों के साथ साझा करने के बाद इसे लेकर अच्छी प्रतिक्रिया मिली। कुंज बिहारी सिंह के अनुसार, अब तक करीब 100 पीस के ऑर्डर मिल चुके हैं। इनमें कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया से आई मांग भी शामिल है। इससे गुलाबी मीनाकारी के इस विशेष उत्पाद के कारोबार में विस्तार की उम्मीद है। मॉडल की कीमत लगभग एक लाख रुपये रखी गई है।

ब्रह्मोस के बाद राफेल से बढ़ाया कला का दायरा
कुंज बिहारी सिंह इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल का मॉडल भी तैयार कर चुके हैं। उनकी उस कलाकृति को भी देश-विदेश में सराहना मिली थी। अब राफेल विमान की प्रतिकृति के जरिए वह पारंपरिक हस्तशिल्प को समकालीन विषयों से जोड़ रहे हैं। उनका प्रयास है कि गुलाबी मीनाकारी केवल आभूषण और सजावटी वस्तुओं तक सीमित न रहे, बल्कि देश की उपलब्धियों, सैन्य पराक्रम और राष्ट्रीय गौरव को भी कलात्मक रूप में प्रदर्शित करे।
17वीं शताब्दी से जुड़ी है मीनाकारी की परंपरा
गुलाबी मीनाकारी काशी की विशिष्ट हस्तशिल्प कलाओं में शामिल है। कुंज बिहारी सिंह के अनुसार, इस कला की परंपरा 17वीं शताब्दी में मुगलकाल के दौरान काशी पहुंची। इसमें चांदी की सतह पर गुलाबी रंग के विशेष स्ट्रोक और इनेमल का काम किया जाता है। इस बारीक कला को करने वाले कारीगर मीनाकार कहलाते हैं। इसके जरिए देवी-देवताओं की प्रतिमाएं, पारंपरिक आभूषण, सजावटी वस्तुएं और फूल-पक्षियों सहित विभिन्न आकृतियां बनाई जाती हैं।
तीन तरह की होती है मीनाकारी
शिल्पकार के मुताबिक, मीनाकारी की प्रमुख शैलियों में एक रंग खुला मीना, पंचरंगी मीना और गुलाबी मीनाकारी शामिल हैं। एक रंग खुला मीना में सोने की रेखाओं को उभारा जाता है, जबकि पंचरंगी मीना में हरे, हल्के नीले, सफेद, गहरे नीले और लाल रंगों का प्रयोग होता है। वहीं, बनारस की गुलाबी मीनाकारी में चांदी पर गुलाबी रंगों के जरिए बारीक नक्काशी और रंगकारी की जाती है।
बाजार की बेरुखी से संकट में थी कला
कुंज बिहारी सिंह ने बताया कि एक समय गुलाबी मीनाकारी का कारोबार संकट के दौर से गुजर रहा था। बाजार में उचित कीमत और पर्याप्त ऑर्डर नहीं मिलने के कारण पारंपरिक कारीगर इस काम से दूर होने लगे थे। नई पीढ़ी भी मेहनत और बारीकी वाले इस शिल्प को अपनाने में रुचि नहीं दिखा रही थी। इससे इस कला के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा था।
अब नए डिजाइन और समकालीन विषयों पर आधारित कलाकृतियों के जरिए इस पारंपरिक शिल्प को नया बाजार मिलने की उम्मीद जगी है। राफेल मॉडल को मिले ऑर्डर इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत हैं। यह पहल काशी की गुलाबी मीनाकारी को देश-विदेश के ग्राहकों तक पहुंचाने के साथ स्थानीय हस्तशिल्प को नई पहचान दिलाने का माध्यम बन सकती है।
