वाराणसी (रणभेरी): शारदीय नवरात्र की महाष्टमी पर धर्मनगरी काशी में भक्ति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। मां महागौरी की आराधना के विशेष अवसर पर मां अन्नपूर्णा मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही मंदिर में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की। मंदिर परिसर में जयकारों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
मां अन्नपूर्णा की आराधना से सुख-समृद्धि की कामना
धार्मिक आस्था के अनुसार, मां अन्नपूर्णा को अन्न और पोषण की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि माता की कृपा से घर-परिवार में अन्न-धन की बरकत बनी रहती है। नवरात्र के दौरान मंदिर में दर्शन करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है। इसी मान्यता के चलते श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन किया और माता से जीवन में सुख, संपन्नता तथा परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगा।
महाष्टमी पर मां महागौरी की पूजा का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि उनकी आराधना से जीवन में शांति, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अविवाहित युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की कामना से पूजा करती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं अपने परिवार की मंगलकामना और अखंड सौभाग्य के लिए माता के समक्ष प्रार्थना करती हैं।

महाष्टमी पर मां महागौरी की पूजा का विधान
नवरात्र की आठवीं तिथि को महाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की उपासना की जाती है। धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में माता को श्वेत वर्ण, शांति, निर्मलता और करुणा का प्रतीक बताया गया है। उनका वाहन वृषभ है और उनकी चार भुजाएं हैं। भक्त मां महागौरी की पूजा कर जीवन के कष्टों से मुक्ति और सुखमय भविष्य की प्रार्थना करते हैं।
सफेद फूल और मिठाई अर्पित करने की मान्यता
महाष्टमी के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल को तैयार किया जाता है। इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान कर पूजा का संकल्प लिया जाता है। मां महागौरी को सफेद फूल, अक्षत, चंदन, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता को सफेद रंग प्रिय है, इसलिए सफेद मिठाई और नारियल का भोग लगाने की परंपरा भी प्रचलित है। पूजा के बाद दुर्गा चालीसा, मंत्रों का पाठ और आरती कर परिवार के कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

कन्या पूजन से जुड़ी है विशेष परंपरा
महाष्टमी के अवसर पर कन्या पूजन का भी विशेष महत्व रहता है। इस परंपरा में छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है। श्रद्धालु कन्याओं के चरण धोते हैं, तिलक लगाते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं। इसके बाद अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा तथा उपहार भेंट किए जाते हैं। कुछ परिवारों में यह धार्मिक अनुष्ठान नवरात्र की नवमी तिथि को भी संपन्न किया जाता है।
काशी में महाष्टमी के अवसर पर मंदिरों में दर्शन-पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धालुओं ने नवरात्र की आस्था को अभिव्यक्त किया। मां महागौरी और मां अन्नपूर्णा के प्रति श्रद्धा के साथ भक्तों ने परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना की।
