वाराणसी (रणभेरी): काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल के छोटे गेट के पास देर रात विवाद के बाद जमकर हंगामा हुआ। किसी बात को लेकर छात्रों के एक समूह और मरीज के तीमारदारों के बीच शुरू हुई बहस ने देखते ही देखते मारपीट का रूप ले लिया। करीब आधे घंटे तक चले घटनाक्रम के दौरान दोनों पक्षों में गाली-गलौज और हाथापाई हुई। बीच-बचाव करने पहुंचे अस्पताल के एक सुरक्षाकर्मी को भी धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा। घटना में उसका मोबाइल टूट गया और हाथ में चोट आई।
विवाद के बीच अस्पताल के गेट तक पहुंचे युवक
जानकारी के मुताबिक, अस्पताल के छोटे गेट के पास किसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई थी। कुछ ही देर में विवाद बढ़ गया और युवक आपस में भिड़ गए। मारपीट के दौरान कुछ युवक अस्पताल के गेट के भीतर तक पहुंच गए। आरोप है कि इस दौरान वहां तैनात सुरक्षाकर्मी का डंडा भी छीन लिया गया।
स्थिति संभालने के लिए सुरक्षाकर्मी ने हस्तक्षेप किया तो उसके साथ धक्का-मुक्की की गई। इस दौरान उसका मोबाइल क्षतिग्रस्त हो गया और हाथ में चोट लग गई। घटना के बाद उसने अपने अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी।

हंगामे से दुकानदारों में मची अफरातफरी
अस्पताल के छोटे गेट के आसपास रात के समय भी चाय और दवा की दुकानें खुली रहती हैं। ऐसे में अचानक हुई मारपीट से वहां मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद बढ़ता देख कुछ दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं और मौके से हट गए।
स्थानीय लोगों ने पुलिस को घटना की सूचना दी। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही मारपीट में शामिल युवक वहां से निकल गए। घटना के दौरान एक युवक के घायल होने की बात भी सामने आई है, लेकिन फिलहाल उसके पक्ष से शिकायत मिलने की जानकारी नहीं है।
CCTV फुटेज से पहचान की कोशिश
मामले को लेकर पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि मारपीट में शामिल युवकों की पहचान की जा सके। साथ ही विश्वविद्यालय स्तर पर भी यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना में शामिल युवक BHU के विद्यार्थी हैं या बाहरी लोग।
अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद अस्पताल परिसर और आसपास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि देर रात तक मरीजों और उनके परिजनों की आवाजाही बनी रहती है, लेकिन नियमित पुलिस गश्त नहीं होने से असामाजिक गतिविधियों की आशंका बनी रहती है। फिलहाल, CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान और मामले की जांच आगे बढ़ने का इंतजार है।
