सुनील गुजराती की मौत के बाद एक्शन में पुलिस, वाराणसी में 56 किलो चीनी मांझा बरामद; दुकानदार गिरफ्तार

सुनील गुजराती की मौत के बाद एक्शन में पुलिस, वाराणसी में 56 किलो चीनी मांझा बरामद; दुकानदार गिरफ्तार

वाराणसी में चीनी मांझे के खिलाफ अभियान तेज, बिक्री करते पकड़े जाने पर हत्या के प्रयास की धाराओं में होगी कार्रवाई

वाराणसी (रणभेरी): साड़ी कारोबारी सुनील कुमार गुजराती की चीनी मांझे की चपेट में आने से हुई मौत के बाद कमिश्नरेट पुलिस ने प्रतिबंधित मांझे की बिक्री रोकने के लिए कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में काशी जोन में पुलिस ने चेकिंग अभियान चलाकर दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के देवनाथपुरा स्थित एक मकान से 56 किलोग्राम सिंथेटिक नायलॉन मांझा बरामद किया। पुलिस ने इस मामले में कथित विक्रेता वीरेंद्र कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

दुकानों की जांच, मकान से मिला प्रतिबंधित मांझा

एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने क्षेत्र की दुकानों और अन्य संभावित ठिकानों की जांच की। इसी दौरान देवनाथपुरा में प्रतिबंधित मांझे का भंडारण मिलने पर पुलिस ने उसे जब्त कर लिया। मामले में दशाश्वमेध थाने में मुकदमा दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

डीसीपी काशी गौरव बंशवाल ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित चीनी मांझे की बिक्री करते हुए पकड़े जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में हत्या के प्रयास से संबंधित धाराओं में भी प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है।

प्रतिबंध के बावजूद जानलेवा मांझे का इस्तेमाल

चीनी मांझे की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध के बावजूद इसके इस्तेमाल से हादसे सामने आते रहे हैं। जिला एवं सत्र न्यायालय के अधिवक्ता विकास सिंह के मुताबिक, प्रतिबंधित मांझे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भी सख्त रुख अपनाया है। पतंग उड़ाने के लिए सुरक्षित और पारंपरिक सूती धागे का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

सुनील गुजराती की मौत के बाद एक्शन में पुलिस, वाराणसी में 56 किलो चीनी मांझा बरामद; दुकानदार गिरफ्तार

प्रतिबंधित मांझे की बिक्री या उपयोग पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत दोष सिद्ध होने पर पांच वर्ष तक की कैद, एक लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान बताया गया है। वहीं, किसी की मौत होने पर परिस्थितियों और जांच के आधार पर गंभीर आपराधिक धाराएं भी लगाई जा सकती हैं।

शहर के कई इलाकों में हो चुके हैं हादसे

वाराणसी में इससे पहले भी चीनी मांझे की वजह से कई लोग घायल हो चुके हैं। पिछले साल मकर संक्रांति के दौरान सामनेघाट पुल पर बाइक से जा रहे जितेंद्र मौर्य इसकी चपेट में आ गए थे। उन्हें गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद रामनगर चिकित्सालय पहुंचाया गया।

दुर्गाकुंड क्षेत्र में स्कूटी सवार युवती का चेहरा भी मांझे से कट गया था। रामनगर पुल के पास एक युवक घायल हुआ था। इसके अलावा फुलवरिया फोरलेन और शिवपुर के तरना पुल पर भी दोपहिया वाहन चालकों की गर्दन में मांझा फंसने से चोट लगने की घटनाएं सामने आई थीं।

पहले भी जब्त हो चुका है भारी मात्रा में मांझा

पुलिस की कार्रवाई के बावजूद प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग सका है। उपलब्ध मामलों के मुताबिक, जनवरी 2026 में 88 किलोग्राम चीनी मांझा जब्त कर विनोद कुमार पटेल को गिरफ्तार किया गया था। जनवरी 2025 में मकर संक्रांति से पहले पुलिस ने करीब 15 हजार किलोग्राम मांझा बरामद किया था, जिसकी अनुमानित कीमत 1.5 करोड़ रुपये बताई गई थी। इस कार्रवाई में चार लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। वहीं, दिसंबर 2025 में पांच दुकानों से 202 किलोग्राम प्रतिबंधित मांझा मिलने पर पांच दुकानदारों को गिरफ्तार किया गया था और चार प्राथमिकी दर्ज की गई थीं।

जमानत मिलने से कार्रवाई पर उठते सवाल

प्रतिबंधित मांझे की बिक्री के मामलों में गिरफ्तारी के बाद कानूनी पैरवी की प्रभावशीलता भी चर्चा का विषय रही है। आरोपियों को जमानत मिलने के बाद कारोबार दोबारा शुरू होने की आशंका जताई जाती है। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ प्रतिबंधित मांझे की आपूर्ति, भंडारण और बिक्री पर लगातार निगरानी रखना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह के जानलेवा हादसों को रोका जा सके।

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