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बुधवार 17-अगस्त-18
गौ तस्करी के साथ जमीनों की हेराफेरी भी करता है सूर्यकांत जालान!



समरथ को नही दोष गोसाईं, चाहे कूदा दे अपनो को भरसाईं, यही हाल है वाराणसी में संघ के एक बदरंग छवि के व्यक्ति का जो आरएसएस के खोल में छुपा रहता जिसके कारनामों की फेरहिस्त लंबी ही नही बल्कि गन्द से भरी हुई है, यूँ कहें इसके अंदर ढोल से ज्यादा पोल है। रणभेरी ने इसके जैसे लोगों को बेनकाब करने का अब उठा लिया है बीड़ा।

गो-तस्करी का सिद्धहस्त खिलाड़ी माने जाने वाले सूर्यकांत जालान का मकसद जो भी उसे पूरा करने में पूरे भ्रष्ट तन्त्र और शैतान खोपड़ी का पूरा प्रयोग करता है,यही कारण है कि यह जमीनों की भी हेरा-फेरी करता रहा है । सुनियोजित तरीके से अपने गुर्गों के द्वारा किसी भूभाग को येनकेन प्रकारेण हासिल कर उसपर गौशाला या ट्रस्ट बना लेता है। तत्पश्चात धीरे-धीरे आसपास की जमीनों को भी अपने जद में लेना शुरु कर देता है।

ऐसा ही एक मामला रामेश्वर गौशाला का संज्ञान में आया है सूर्यकांत जालान ने गोशाला के नाम पर नंद लाल जालान ट्रस्ट बनाकर १६ एकड़ जमीन की रजिस्ट्री फर्जी तरीके से करा ली, इतना ही नही कुछ राजस्व कर्मियों को अपने खेल में शामिल करते हुए जमीन के दर्ज अभिलेखों से खाता संख्या कटवाकर नया खाता संख्या और नई खतौनी भी जारी करवा दिया।

बताते चलें कि रामेश्वर स्तिथ काशी जीवदया विस्तारिणी गौशाला ट्रस्ट की जमीन है इसमें खाता संख्या ६३ को लेकर उपजिलाधिकारी सदर के कोर्ट में मुकदमा भी चला था । तत्कालीन एसडीएम सदर के अभिलेखों के अनुसार फसली संख्या १३७३ व १३७५ के अनुसार ट्रस्ट के रूप में दर्ज की गई जमीन का नामांतरण भी रद्द किया जा चुका है।

बाद में तत्कालीन उपजिलाधिकारी सदर के जांचोपरांत पाया गया कि जिस जमीन को ट्रस्ट के नाम से रजिस्ट्री कराई गई थी वह जमीन ग्राम समाज की थी, यही कारण रहा कि स्थानीय प्रशासन ने उक्त जमीन का नामान्तरण रद्द करते हुए उसे ग्राम समाज की जमीन घोषित कर दिया था, इसके साथ ही जमीन से जुड़े ट्रस्टियों खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया गया था। जो जमीन ग्राम समाज की निकली उनकी संख्या २३१,२३० क, और २३४ ख थी। इस जमीन को नंदलाल जालान ट्रस्ट के नाम रजिस्ट्री करा उसकी खतौनी भी तैयार हो गयी थी जो जांचोपरांत फर्जी निकली ।

इस मामले में उपजिलाधिकारी सदर ने जो निर्णय दिया था वह इस प्रकार है...ग्राम हीरमपुर की खतौनी फसली सन १३७३ लगायत १३७५ के नकल अवलोकन से ज्ञात होता है कि खाता संख्या ६३ पर भूमि संख्या २१ क्षेत्रफल १६-३५ एकड़ २२१ क्षेत्रफल ०-२२ एकड़ तथा १५२ क्षत्रफल १-३० एकड़ बंजर खाते में दर्ज है जो ग्राम समाज की भूमि है । इस खाते उपरोक्त पर बाद में एच पी चौबे जे०ओ० के आदेश २६.८.१९६५ का उल्लेख करते हुए उपरोक्त भूखण्डों से ग्राम सभा हिरमपुर नाम का खारिज करके काशी जीव दया विस्तारिणी गौशाला पशुशाला रामेश्वर बजरिये अध्यक्ष नंद कुमार जालान ट्रस्टी का नाम बहैसियत भूमिधर दर्ज किए जाने की प्रविष्टि अंकित है, परन्तु जैसा कि पूर्व में उल्लेखित है की इस तरह का कोई आदेश हुआ ही नही है। अत: खतौनी फ़० सन१३७३ -१३७५ फ० के खाता स० ६३ पर अंकित उपरोक्त प्रविष्टि फर्जी है। इस फर्जी प्रविष्टि के आधार पर वर्तमान खतौनी फ० सन १४७६-१४२१फ० के खाता सं० ४८ पर उपरोक्त भूखण्डों के चकबन्दी बने नए नम्बरों भूमि संख्या २३१ रकबा ६.६१७हेक्टेयर,२३४ ख रकबा ०.०१२ हेक्टेयर तथा २०३ क रकबा ०.४२६ हेक्टेयर पर दर्ज नाम नंदलाल जालान ट्रस्ट श्री काशी जीवदया विस्तारिणी गौशाला नाम दर्ज हुआ है। यह फर्जी प्रविष्टि तत्काल निरस्त किये जाने योग्य है।

उपरोक्त विवेचना के आधार पर ग्राम हिरमपुर की खतौनी फ० १३७३ लगायत १३७५ के खाता सं-६३ पर दर्ज मु० न० ८५६ धारा २२९ बी काशी बनाम ग्राम सभा आदेश २६.८.१९६५ की प्रविष्टि निरस्त की जाती है। वर्तमान खतौनी फ० सन १४१६-१४२१फ० के खाता संख्या ४८ भूमि सं० २३१ रकबा ६.६१६ हेक्टेयर २३४ ख रकबा ०.०१२ हेक्टेयर तथा २०३ क रकबा ०.४२६ हेक्टेयर पर फर्जी तरीके से दर्ज नाम नंद लाल जालान ट्रस्ट श्री काशी जीवदया विस्तारिणी का नाम निरस्त किया जाता है।

छुट्टा पशुओं को आश्रय देने का है प्राविधान

काशी जीवदया विस्तारिणी गोशाला में नियमत: छुट्टा पशुओं या पकड़े गए पशुओं को रखने और उसके देखरेख की जिम्मेदारी है। मगर सूत्रों की माने तो यहां अशक्त बीमार पशुओं को आउटसाइडर कर्मी द्वारा दलदली गड्ढे में ढकेल कर ऊपर से खौलता पानी फेंककर उसकी खाल खींच ली जाती है कारण यह है कि लम्बे समय से बीमार पशुओं की खाल खराब होने लगती है इसलिए जीते जी खाल उतार ली जाती है।

संस्था के बाइलाज में दर्ज है कि जो भी पशु यहां दाखिल होंगे उनकी समुचित देखभाल होगी लेकिन वास्तविकता तो यह है कि यहां पशुओं को कसाईयों के हाथों बेचने का गोरखधंधा जोरों पर है इसलिए पशुओं को भर पेट चारा भी मुहैया नही कराया जाता इससे धीरे-धीरे पशु अस्वस्थ होने लगते हैं फिर जालान के गुर्गे इन् पशुओं को इलाज के नाम पर लेकर बाहर निकलते हैं फिर इन पशुओं को मौत के सौदागरों को बेच दिया जाता है।

सूर्यकांत के बड़े पैरोकार

इतना सब कुछ गोलमाल करना आसान नही इसके लिए किसी का वरदहस्त प्राप्त होना बेहद जरूरी है। इसलिए सूर्यकांत ने कभी भाजपा के कद्दावर नेता रहे गोविंद आचार्य से नजदीकियां बढ़ाई। जब वो मुख्यधारा की राजनीति से अलग हुए तो भाजपा की फायर ब्रांड नेत्री वर्तमान केंद्रीय मंत्री की शरण चरण में रहकर काले कारनामों को अंजाम देता आ रहा है।

प्रख्यात कथावाचक का चेला बनकर करता है खेला

सूर्यकांत जालान के कर्म कितने भी खराब क्यूं न हो वह उसे धर्म की उजली चादर से ढके रखता है, यही कारण है कि बापू के नाम से विख्यात कथा वाचक को यह कुख्यात गो तस्कर घेरे रहता है जब भी जहां भी कुछ बापू का कोई कार्यक्रम होता है यह तन-धन से लग जाता है। सूत्र तो यहाँ तक कहते हैं कि इसने कथावाचक का पचास करोड़ रुपया ब्याज पर देने के साथ ही अन्य धंधो में लगाया है। ऐसा नही है कि इसके करतूतों का पता भाजपा या संघ के नेताओं को नही है मगर 'सुख सुविधा' के लालच में सब 'मुदत आंख कतहु कछु नाही' के हिसाब से खुद को ढाल लिए हैं। इसलिए निर्बाध गति से जालान की गौतस्करी चरम पर है। पूर्व में बनारस के एक चर्चित जिलाधिकारी ने उसे एक प्रकरण में बुलाया तो यह शातिराना तरीके से प्रभावित करने के लिए गाय लेकर पहुँच गया था मगर तीखे तेवर के लिए जाने जानेवाले डीएम ने इसकी एक न सुनी और जेल का रास्ता दिखा दिया। बहरहाल जो भी हो यह संघ को ढंग से इस्तेमाल कर अपना बचाव करता आ रहा है।


...अमित मौर्या की रिपोर्ट