वाराणसी (रणभेरी): समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी एक बार फिर राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गए हैं। दिल्ली में आयोजित एक बौद्ध कार्यक्रम का वीडियो सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने सपा और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। भाजपा का आरोप है कि सपा के नेता बार-बार हिंदू धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले बयान और गतिविधियों से विवाद खड़ा करते हैं। वहीं, राजकुमार भाटी ने अपने ऊपर लगाए जा रहे धर्म परिवर्तन के आरोपों को खारिज किया है।
बौद्ध महासभा के कार्यक्रम से जुड़ा है मामला
जानकारी के मुताबिक, 20 अक्टूबर को दिल्ली के रानी झांसी मार्ग स्थित आंबेडकर भवन में भारतीय बौद्ध महासभा का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों को ऐसी प्रतिज्ञाएं दिलाई गईं, जिनमें हिंदू देवी-देवताओं को नहीं मानने और उनकी पूजा नहीं करने की बात शामिल थी।
संकल्प में ब्रह्मा, विष्णु, महेश, भगवान राम और श्रीकृष्ण को ईश्वर के रूप में स्वीकार नहीं करने की बातें भी कही गईं। इसके अलावा, भगवान बुद्ध को विष्णु का अवतार मानने की मान्यता को भी नकारा गया। इसी कार्यक्रम से जुड़े वीडियो में राजकुमार भाटी के नजर आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई।
भाजपा ने सपा की विचारधारा पर उठाए सवाल
वीडियो सामने आने के बाद भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने समाजवादी पार्टी पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के नेता धार्मिक मुद्दों पर विवादित रुख अपनाकर हिंदू समाज की भावनाओं को आहत कर रहे हैं।
त्रिपाठी ने सपा नेतृत्व से सवाल किया कि क्या पार्टी को हिंदू मतदाताओं के समर्थन की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले आजम खान के बयानों को लेकर विवाद होते रहे और अब पार्टी के दूसरे नेताओं पर भी ऐसे मामलों में सवाल उठ रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि सपा के नेता धार्मिक मुद्दों को लेकर लगातार विवाद पैदा कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस तरह की घटनाओं से पार्टी की राजनीतिक छवि पर असर पड़ सकता है।

राजकुमार भाटी ने आरोपों पर दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद राजकुमार भाटी ने सोशल मीडिया के जरिए अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वह सभी धर्मों, जातियों और समुदायों का सम्मान करते हैं। बौद्ध धर्म तथा भगवान बुद्ध की शिक्षाओं में उनकी विशेष रुचि है। साथ ही, डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का भी उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है।
भाटी ने स्पष्ट किया कि वह विभिन्न समुदायों के कार्यक्रमों में आमंत्रण मिलने पर शामिल होते हैं। उनके अनुसार, वह सिख समुदाय के कार्यक्रमों में गुरुद्वारे जाते हैं, मुस्लिम समुदाय के आयोजनों में हिस्सा लेते हैं और हिंदू त्योहारों में भी भागीदारी करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी कार्यक्रम में शामिल होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति अपना धर्म बदल रहा है।
धर्म परिवर्तन की चर्चा को बताया भ्रामक
राजकुमार भाटी ने दावा किया कि कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर उनके धर्म परिवर्तन को लेकर गलत प्रचार किया गया। उन्होंने कहा कि न तो उन्हें धर्म बदलने की आवश्यकता है और न ही ऐसा करने की उनकी कोई योजना है।

सपा प्रवक्ता के मुताबिक, किसी भी धर्म को मानते हुए मानवता की सेवा की जा सकती है। उन्होंने भेदभाव, छुआछूत, नफरत, अंधविश्वास और पाखंड के खिलाफ आवाज उठाने की बात भी कही। अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही खबरों को लेकर सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने अपनी पोस्ट का समापन ‘जय भीम’ और ‘नमो बुद्धाय’ के नारों के साथ किया।
पहले भी विवादों में आ चुके हैं सपा प्रवक्ता
राजकुमार भाटी इससे पहले भी अपनी टिप्पणियों को लेकर आलोचनाओं का सामना कर चुके हैं। हाल ही में ब्राह्मण समुदाय को लेकर की गई एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद भी विवाद खड़ा हुआ था। उस मामले में भी समाजवादी पार्टी को राजनीतिक आलोचना झेलनी पड़ी थी।
धार्मिक मुद्दे पर फिर आमने-सामने भाजपा और सपा
राजकुमार भाटी से जुड़ा ताजा मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। भाजपा इसे समाजवादी पार्टी की धार्मिक सोच से जोड़कर सवाल उठा रही है, जबकि भाटी ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए बौद्ध विचारधारा और आंबेडकर के सिद्धांतों के प्रति अपने जुड़ाव का हवाला दिया है।
