वाराणसी (रणभेरी): धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में कार्तिक मास के साथ ही गंगा घाटों पर आकाशदीप जलाने की प्राचीन परंपरा निभाई जाएगी। 25 अक्टूबर की शाम दशाश्वमेध घाट पर गंगोत्री सेवा समिति और गंगा सेवा निधि की ओर से शहीदों की स्मृति में आकाशदीप जलाए जाएंगे। इस दौरान बैंड-बाजे की धुन पर अमर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। गंगा किनारे लंबे बांसों पर टंगी बांस की टोकरियों में जलते दीपक घाटों की सुंदरता को अलौकिक आभा से भर देंगे।
गंगा घाटों पर आकाशदीप से जगमगाएगी काशी
काशी में आकाशदीप जलाने की परंपरा बरसों पुरानी है। कार्तिक मास में गंगा तट के प्रमुख घाटों पर लंबे बांसों के सहारे दीपक जलाए जाते हैं। दशाश्वमेध घाट, प्राचीन दशाश्वमेध घाट, प्रयाग घाट, डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट, अस्सी घाट, तुलसी घाट, भदैनी, पंचगंगा घाट, राम घाट, केदार घाट और गाय घाट पर आकाशदीप की छटा देखने को मिलती है।
यह परंपरा पूरे कार्तिक मास तक चलती है। इस दौरान लोग अपने घरों की छतों पर लाल बल्ब जलाकर भी अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उन्हें नमन करते हैं। इस परंपरा का समापन कार्तिक पूर्णिमा की रात देवदीपावली पर होता है।
कार्तिक मास में दीपदान का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हिंदू धर्म में कार्तिक मास को अत्यंत पवित्र माना गया है। इस महीने में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा, दीपदान तथा धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है। शरद पूर्णिमा से ही दीपदान और आराधना के साथ कार्तिक मास के धार्मिक नियमों का पालन शुरू हो जाता है।
इस महीने में तुलसी और पीपल के पूजन के साथ आंवले के वृक्ष की पूजा और सिंचन को भी फलदायी माना गया है। मान्यता है कि भगवान विष्णु को आंवला अर्पित करने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। कार्तिक मास में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान, ध्यान, गंगा स्नान, व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है।
देवदीपावली पर होगा आकाशदीप परंपरा का समापन
कार्तिक मास के दौरान गंगा घाटों पर जलने वाले आकाशदीप धार्मिक आस्था और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा के प्रतीक माने जाते हैं। पूरे महीने घाटों पर दीपों की रोशनी काशी की आध्यात्मिक पहचान को और खास बनाती है। कार्तिक पूर्णिमा की रात देवदीपावली के अवसर पर इस परंपरा का समापन होगा। वहीं, 25 अक्टूबर को दशाश्वमेध घाट पर शहीदों की स्मृति में आकाशदीप प्रज्ज्वलित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी।
