वाराणसी (रणभेरी): सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर खबर सच नहीं होती। इन दिनों वाराणसी में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लंका थाने की पुलिस को कठघरे में खड़ा करने और एक पुलिस अधिकारी को खलनायक के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है। शहर के कई यूट्यूब चैनलों ने भी बिना तथ्यात्मक पड़ताल के इस वीडियो को प्रसारित किया। लेकिन रणभेरी की जांच में इस पूरे घटनाक्रम की एक अलग तस्वीर सामने आई।
जांच के अनुसार, एक छात्रा ने कैंट क्षेत्र से बीएचयू जाने के लिए एक बाइक राइड बुक की थी। आरोप है कि राइडर निर्धारित मार्ग छोड़कर दूसरे रास्ते से जाने लगा। इससे छात्रा असहज और असुरक्षित महसूस करने लगी। स्थिति को भांपते हुए उसने तत्काल अपने पिता को सूचना दी, जो लंका थाने में तैनात हैं।

सूचना मिलने के बाद छात्रा के पिता ने लोकेशन के आधार पर राइडर को रोक लिया। पूछताछ के दौरान राइडर ने स्पष्ट जवाब देने के बजाय बहस शुरू कर दी। इसी बीच उसके एक साथी ने घटनास्थल का वीडियो बनाना शुरू किया और बाद में उसी वीडियो को इस तरह सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, मानो पुलिस बिना कारण कार्रवाई कर रही हो।
पूरे घटनाक्रम का दूसरा पक्ष यह बताता है कि मामला किसी पुलिसिया दबंगई का नहीं, बल्कि एक छात्रा की सुरक्षा से जुड़ा था। यदि किसी युवती को रास्ता बदलने के कारण भय या असुरक्षा महसूस होती है, तो उसका अपने परिजन से सहायता मांगना स्वाभाविक है। ऐसे में पिता ने, चाहे वह पुलिसकर्मी हों या किसी अन्य पेशे से जुड़े हों, सबसे पहले एक जिम्मेदार अभिभावक की भूमिका निभाई।
