(रणभेरी): संसद के बजट सत्र के दौरान एक मानवीय क्षण देखने को मिला। कांग्रेस सांसद शशि थरूर संसद भवन की सीढ़ियों से उतरते समय अचानक संतुलन खो बैठे और गिर पड़े। उसी वक्त पास खड़े समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तुरंत आगे बढ़कर उन्हें संभाल लिया। अखिलेश यादव ने अपने सहयोगी आशीष यादव को निर्देश दिया कि वे थरूर को सुरक्षित गाड़ी तक छोड़कर आएं। बताया जा रहा है कि घटना के समय शशि थरूर फोन पर बातचीत कर रहे थे, तभी उनका पैर फिसल गया। राहत की बात यह रही कि उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है।
उधर, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर चुनाव आयोग पर एक बार फिर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को अपनी इमारत पर भाजपा का झंडा लगा लेना चाहिए। उनका आरोप था कि मौजूदा प्रक्रिया में भाजपा समर्थित लोग तय कर रहे हैं कि किसका वोट कटे और किसका जुड़े। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी ज्यादा से ज्यादा मतदाता जोड़ने की है।
अमेरिका के साथ हुई हालिया डील पर भी अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि यह “डील नहीं, ढील” है और इससे देश का बाजार दूसरे देश के हाथों में सौंप दिया गया है। उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया, जॉर्ज फर्नांडिस और नेताजी का हवाला देते हुए कहा कि समाजवादी विचारधारा ने हमेशा चीन को सबसे बड़ा खतरा माना है।
सत्र के ठप होने पर सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि उन्होंने 1952 से कई प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल देखे हैं, लेकिन इस तरह से सदन का निलंबन पहले कभी नहीं हुआ। वहीं, मेरठ से भाजपा सांसद अरुण गोविल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के व्यवहार की कड़ी आलोचना करते हुए इसे शर्मनाक बताया।
सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि सदन चले और सभी सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिले, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां-जहां सपा के बूथ मजबूत हैं, वहां योजनाबद्ध तरीके से वोट काटे जा रहे हैं। जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट जाने की बात भी उन्होंने कही और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के रुख का समर्थन जताया।
इसी क्रम में सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि यह केवल पश्चिम बंगाल या उत्तर प्रदेश का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे देश का सवाल है। उनके मुताबिक दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और PDA वर्ग के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।
