सांसद संजय सिंह पर चौक थाने में दर्ज हुआ है मुक़दमा
वाराणसी (रणभेरी): उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी टकराव की स्थिति बन गई है। काशी की विश्वप्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट एवं अहिल्याबाई से जुड़े मामले में सार्वजनिक रूप से जन भावनाओं का पक्ष रखने और सवाल उठाने के बाद आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के ख़िलाफ़ वाराणसी के चौक थाने में मुक़दमा दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई के बाद न सिर्फ़ राजनीतिक हलकों में हलचल तेज़ हो गई है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी बहस छिड़ गई है।
पुलिस के मुताबिक, यह मुक़दमा मणिकर्णिका घाट से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर संजय सिंह की एक्स होल्डर पर टिप्पणियों और बयानों के संदर्भ में दर्ज किया गया है। आरोप है कि सांसद ने प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर ऐसे बयान दिए, जिन्हें कानून व्यवस्था के लिहाज़ से आपत्तिजनक माना गया। मामले की जांच चौक थाने की पुलिस कर रही है। इधर, मुक़दमा दर्ज होने के बाद संजय सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार देते हुए कहा कि सरकार सवालों से डर रही है।
संजय सिंह का कहना है,
“मणिकर्णिका घाट केवल एक स्थान नहीं, बल्कि काशी की आत्मा है। वहां से जुड़े मामलों में अगर कोई जनप्रतिनिधि सवाल पूछता है, जन भावनाओं की बात रखता है या सरकार से जवाब मांगता है, तो क्या उसे अपराध माना जाएगा? अगर सच बोलना और जनता का पक्ष रखना जुर्म है, तो मैं यह जुर्म बार-बार करूंगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार असहमति की आवाज़ों को दबाने के लिए पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल कर रही है। “सरकार अपनी नाकामियों और ज़मीनी हकीकत से ध्यान भटकाने के लिए मुक़दमे दर्ज करवा रही है। बेरोज़गारी, महंगाई और सामाजिक अन्याय पर सवाल उठाने वालों को डराया जा रहा है।”
आप सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि मणिकर्णिका मामले में उन्होंने कोई अफ़वाह नहीं फैलाई, बल्कि जो तथ्य सामने आए, उन्हीं के आधार पर सरकार से जवाब तलब किया। “अगर सरकार का पक्ष मज़बूत है, तो वह सवालों का जवाब दे, मुक़दमे दर्ज कराकर आवाज़ दबाने की कोशिश न करे।”

आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेताओं ने भी इस कार्रवाई का विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि यह मुक़दमा लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है और इससे सरकार की असहजता साफ़ झलकती है। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को सड़कों से लेकर संसद तक उठाएगी।
फिलहाल, चौक थाने में दर्ज मुक़दमे को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है। वहीं, मणिकर्णिका घाट से जुड़ा मामला एक बार फिर सियासी केंद्र में आ गया है। सवाल अब यही है कि क्या जनप्रतिनिधियों द्वारा सरकार से सवाल पूछना अपराध की श्रेणी में आएगा, या यह लोकतंत्र की बुनियादी ज़रूरत माना जाएगा? इस सवाल का जवाब आने वाले दिनों में सियासत और अदालत दोनों के मंच पर तय होगा।
