15 फरवरी को देवालयों में शाम से शुरू होगा पूजन
वाराणसी (रणभेरी): महाशिवरात्रि इस बार 15 फरवरी को मनायी जायेगी। पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की शाम 4.23 को महाशिवरात्रि का मुहुर्त शुरू हो जायेगा। महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक एवं रात्रिकालीन पूजा का विशेष महत्व होता है।
पंचांगों के मुताबिक इस फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की शाम 4.23 बजे पर शुरू होकर समापन 16 फरवरी की सायंकाल 5.10 बजे होगा। हालांकि महाशिवरात्रि पर शिव का पूजन व जलाभिषेक रात्रि के चारों प्रहर में करने का विधान है। इसलिए 15 फरवरी को ही महाशिवरात्रि काशी में मनाया जायेगा। ज्योतिषविद् पं. विमल जैन के मुताबिक 15 फरवरी की शाम से ही विशेष पूजन देवालयों में शुरू हो जायेगा।
शिवरात्रि के दिन भगवान शिव व माता पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार प्रदोष काल में शिव आराधना से शीघ्र फल की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि पर शिव भोग में भांग, धतूरा, विल्वपत्र, दूध, गंगाजल अर्पित करने से शिव प्रसन्न होते हैं। साथ ही हर किसी की मनोकामना पूरी होती है।
चारों प्रहर की जायेगी शिव की पूजा
शास्त्रों में महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि पर रात्रि के चारों प्रहर में भगवान शिव की पूजा-आराधना करने से विशेष फल मिलता है। ऐसी मान्यता है कि चार प्रहर में पूजा करने से व्यक्ति को धर्म, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन रात भर काशी के शिवालयों में शिव भक्त विशेष पूजा करते हैं। रात्रि में विशेष चार प्रहर की पूजा की जाती है। चार प्रहर में प्रथम प्रहर का समय शाम 6 बजे से शुरू होता है। इसके बाद तीन तीन घंटे के अंतराल पर चारों प्रहर भोर में तीन बजे तक पूजा होती है।
