‘रोज़गार दो, नहीं तो 10,000 दो’, संजय सिंह की पदयात्रा ने सरकार को घेरा

‘रोज़गार दो, नहीं तो 10,000 दो’, संजय सिंह की पदयात्रा ने सरकार को घेरा

• सड़कों पर उतरा युवाओं का गुस्सा, मिर्ज़ापुर से सारनाथ तक ‘आप’ की पदयात्रा
• भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ बेरोज़गारी और सामाजिक न्याय का सीधा सवाल
• वाराणसी प्रवेश पर उमड़ा जनसमर्थन, 22 जनवरी को शास्त्री घाट पर शक्ति प्रदर्शन

मिर्ज़ापुर/वाराणसी (रणभेरी): उत्तर प्रदेश की सियासत इन दिनों सड़कों पर गर्म है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की पदयात्रा राज्य में बेरोज़गारी और सामाजिक न्याय के सवाल को लेकर एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है। मिर्ज़ापुर से शुरू हुई यह पदयात्रा अब वाराणसी की धरती पर है और 22 जनवरी को सारनाथ में अपने निर्णायक पड़ाव पर पहुंचेगी। हर क़दम के साथ नारे और तीखे हो रहे हैं, सवाल और बेबाक, और सरकार के लिए संदेश बिल्कुल साफ़ “रोज़गार दो, नहीं तो 10,000 दो ।”

16 जनवरी को मिर्ज़ापुर के शहीद शाहिद उद्यान से शुरू हुई इस पदयात्रा ने शनिवार की शाम वाराणसी में प्रवेश किया। जैसे ही काफ़िला शहर की सीमा में पहुंचा, आम आदमी पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों, नारों और झंडों के साथ संजय सिंह का जोरदार स्वागत किया। बड़ी संख्या में युवा, छात्र और आम नागरिक पदयात्रा में शामिल हुए और काफ़िला आगे बढ़ता चला गया, मानो बेरोज़गारी की पीड़ा सड़कों पर उतर आई हो। पूरी पदयात्रा के दौरान एक ही नारा सबसे ज़्यादा गूंजता रहा “रोज़गार दो, नहीं तो 10,000 दो।”

‘रोज़गार दो, नहीं तो 10,000 दो’, संजय सिंह की पदयात्रा ने सरकार को घेरा

यह सिर्फ़ राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि लाखों बेरोज़गार युवाओं का सीधा अल्टीमेटम है। हाथों में तख्तियां और झंडे लिए युवा सवाल पूछ रहे हैं कि डिग्री होने के बाद भी नौकरी क्यों नहीं?सरकारी भर्तियां वर्षों से अटकी क्यों हैं?पेपर लीक करने वाले खुलेआम क्यों घूम रहे हैं? हर पड़ाव पर संजय सिंह सरकार को कटघरे में खड़ा करते नज़र आए। उनका कहना है कि रोज़गार देना सरकार की संवैधानिक और नैतिक ज़िम्मेदारी है। अगर सरकार इसमें असफल है, तो बेरोज़गार युवाओं को कम से कम ₹10,000 प्रतिमाह की सम्मानजनक आर्थिक सहायता देना उसका दायित्व है। पदयात्रा में शामिल युवाओं की आंखों में आक्रोश है, आवाज़ में हताशा, और सवालों में भविष्य की चिंता।

पदयात्रा का दूसरा केन्द्रीय स्वर है “सामाजिक न्याय दो।” दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों से संवाद करते हुए संजय सिंह का आरोप है कि मौजूदा शासन में बराबरी के अवसर सिमटते जा रहे हैं और संवैधानिक सुरक्षा कमजोर हो रही है। उनके मुताबिक, “रोज़गार दो, नहीं तो 10,000 दो” का नारा सामाजिक न्याय को आर्थिक आधार देने की मांग भी है ताकि हाशिए पर खड़ा समाज आत्मसम्मान के साथ जी सके।

यह पदयात्रा मिर्ज़ापुर से निकलकर विसुंदरपुर, सबेसर, बजहा, पाहो बाज़ार, रविवार की शाम जख्खिनी पहुची। आज पुन: जख्खिनी – जमुनी से चलकर सांसद संजय सिंह राजा तालाब , बीरभानपुर होते हुए जंसा पहुचकर रात्रि विश्राम करेंगे। अपने अगले पड़ाव में यह पद यात्रा गोपालपुरा, कोरौता, लहरतारा और हवेलिया चौराहा जैसे इलाकों से होती हुई सारनाथ तक पहुंचेगी। हर गांव, हर चौराहे पर भीड़ जुट रही है, सवाल उठ रहे हैं और सत्ता के प्रति असंतोष खुलकर सामने आ रहा है।

‘रोज़गार दो, नहीं तो 10,000 दो’, संजय सिंह की पदयात्रा ने सरकार को घेरा

22 जनवरी को वाराणसी के कचहरी स्थित शास्त्री घाट पर विशाल जनसभा के साथ इस पदयात्रा का समापन होगा। आम आदमी पार्टी इसे पूर्वांचल में बेरोज़गारी और सामाजिक न्याय के सवाल पर अब तक का सबसे बड़ा जनदबाव अभियान बता रही है।

‘रोज़गार दो, नहीं तो 10,000 दो’, संजय सिंह की पदयात्रा ने सरकार को घेरा

सार यह कि, “रोज़गार दो, नहीं तो 10,000 दो” अब सिर्फ़ एक नारा नहीं रहा। यह उत्तर प्रदेश के लाखों बेरोज़गार युवाओं की पीड़ा, ग़ुस्से और उम्मीद की सामूहिक आवाज़ बन चुका है, एक ऐसी आवाज़, जो सड़कों पर चल रही है और जिसे सत्ता अब अनसुना नहीं कर सकती।

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