- ‘आप’ सांसद संजय सिंह का ‘रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो’ पदयात्रा ने सरकार को दिखाया आईना
- मिर्जापुर से उठी आवाज़ को सारनाथ में मिला जनसमर्थन का शिखर
- सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय जुमलों और खोखले आश्वासनों में उलझा रही : संजय सिंह
- विकास के नाम पर बिना संवेदनशीलता के की जा रही कार्रवाइयां आम लोगों की भावनाओं को कर रही आहत
“मिर्जापुर से उठी आवाज़ जब सारनाथ पहुंची, तो वह सिर्फ एक पदयात्रा नहीं रही…वह बेरोजगारी, सामाजिक अन्याय और सत्ता की संवेदनहीन नीतियों के खिलाफ जनआक्रोश का प्रतीक बन चुकी थी। ‘रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो’ के नारे के साथ आप सांसद संजय सिंह की सात दिवसीय पदयात्रा ने पूर्वांचल में सरकार की नीतियों पर सीधा सवाल खड़ा करते हुए जनता के दर्द, गुस्से और बदलाव की उम्मीद को एक साझा आंदोलन में बदल दिया।”
वाराणसी (रणभेरी): “कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों…”
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की सात दिवसीय पदयात्रा ‘रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो’ जब मिर्जापुर से चली तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह पदयात्रा एक जनसैलाब का रूप ले लेगी। 16 जनवरी को मिर्जापुर से शुरू हुई यह पदयात्रा आज काशी की ऐतिहासिक धरती सारनाथ में संपन्न हुई, जहां उमड़ा जनसैलाब इस बात का गवाह बना कि यह यात्रा अब सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। मिर्जापुर के गांवों, कस्बों और बाजारों से गुजरते हुए जब पदयात्रा वाराणसी की सीमा में जब दाखिल हुई, तो हर जगह युवाओं, महिलाओं, किसानों, बुनकरों, रेहड़ी-पटरी वालों और आम नागरिकों का जबरदस्त समर्थन यह बताने के काफी था की वक्त अब बदलाव चाहती है।

यात्रा के दौरान लोगों ने खुलकर बेरोजगारी, महंगाई, पेपर लीक और सरकारी उपेक्षा के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। सारनाथ में अंतिम दिन जोश और आक्रोश का ऐसा संगम दिखा, जिसने साफ कर दिया कि जनता अब केवल सुनना नहीं, बदलाव चाहती है।

पूरी पदयात्रा के दौरान संजय सिंह ने केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखे और सीधे हमले किए। उन्होंने कहा कि देश और उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुकी है, लेकिन सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय जुमलों और खोखले आश्वासनों में उलझा रही है। बार-बार होने वाले पेपर लीक, सरकारी नौकरियों में कटौती और निजीकरण की नीतियों ने युवाओं का भविष्य अंधकार में धकेल दिया है। संजय सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार हर युवा को रोजगार देने में विफल है, तो कम से कम बेरोजगार युवाओं को 10 हजार सम्मानजनक मासिक आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि वे आत्मसम्मान के साथ अपना जीवन यापन कर सकें।

सांसद संजय सिंह ने सामाजिक न्याय के मुद्दे पर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के राज में गरीब, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज सबसे अधिक उपेक्षित हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में इन वर्गों के लिए कोई ठोस और ईमानदार नीति दिखाई नहीं देती। सारनाथ में पदयात्रा के समापन पर संजय सिंह ने कहा कि यह यात्रा सत्ता परिवर्तन की नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की शुरुआत है। मिर्जापुर से बनारस तक उठी यह आवाज आने वाले समय में पूरे प्रदेश में गूंजेगी और रोजगार व सामाजिक न्याय की लड़ाई को नई दिशा देगी।

मणिकर्णिका घाट और दालमंडी मुद्दे पर सरकार के नीयत पर उठाए सवाल
पदयात्रा के दौरान बनारस पहुंचने पर संजय सिंह ने मणिकर्णिका घाट पर मूर्तियों को तोड़े जाने और दालमंडी इलाके में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर भी तीखे बयान दिए। उन्होंने कहा कि काशी की पहचान उसकी परंपरा, आस्था और संस्कृति से है, लेकिन विकास के नाम पर बिना संवेदनशीलता के की जा रही कार्रवाइयां आम लोगों की भावनाओं को आहत कर रही हैं। मणिकर्णिका घाट पर मूर्तियों को तोड़े जाने का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार विकास और आस्था के बीच संतुलन नहीं बना सकती। वहीं दालमंडी में ध्वस्तीकरण पर उन्होंने कहा कि गरीब और छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई तो तुरंत होती है, लेकिन बड़े और ताकतवर लोगों के अवैध निर्माण पर प्रशासन आंखें मूंद लेता है।

यह चयनात्मक कार्रवाई सामाजिक न्याय के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि वाराणसी केवल एक शहर नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी है, लेकिन यहां विकास के नाम पर परंपरा, इतिहास और विरासत को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि आम लोगों की आवाज़ दबाई जा रही है और जो भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है, उसके खिलाफ मुकदमे लिखी जाती है। संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी जनहित के सवालों पर चुप बैठने वाली नहीं है और सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष जारी रहेगा
सामूहिक भागीदारी से पूर्वांचल में नई राजनीतिक हलचल
इस पदयात्रा की सबसे बड़ी ताकत रही आम जनता की सक्रिय भागीदारी। महिलाओं ने महंगाई, सुरक्षा और सम्मान के सवाल उठाए, बच्चों और युवाओं ने बेहतर शिक्षा और रोजगार की मांग रखी, वहीं बुजुर्गों ने अपने अनुभव साझा करते हुए आशीर्वाद दिया। बुनकरों, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे व्यापारियों ने संजय सिंह के सामने अपनी रोज़मर्रा की समस्याएं रखीं। जगह-जगह फूलों से स्वागत, नारों की गूंज और लोगों की भीड़ ने यह साफ कर दिया कि पूर्वांचल में एक नई राजनीतिक हलचल जन्म ले रही है। करीब सात दिनों तक चली ‘रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो’ पदयात्रा ने यह संदेश दिया कि यह सिर्फ आम आदमी पार्टी का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आम जनता की आवाज़ है। मिर्जापुर से सारनाथ तक की यह यात्रा भाजपा सरकार के लिए एक राजनीतिक चेतावनी भी मानी जा रही है। संजय सिंह ने समापन के मौके पर कहा कि यह समर्थन उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि जनता की जीत है और आने वाले समय में यह संघर्ष और तेज होगा।
वाराणसी (रणभेरी सं.)। “कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों…”
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की सात दिवसीय पदयात्रा ‘रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो’ जब मिर्जापुर से चली तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह पदयात्रा एक जनसैलाब का रूप ले लेगी। 16 जनवरी को मिर्जापुर से शुरू हुई यह पदयात्रा आज काशी की ऐतिहासिक धरती सारनाथ में संपन्न हुई, जहां उमड़ा जनसैलाब इस बात का गवाह बना कि यह यात्रा अब सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। मिर्जापुर के गांवों, कस्बों और बाजारों से गुजरते हुए जब पदयात्रा वाराणसी की सीमा में जब दाखिल हुई, तो हर जगह युवाओं, महिलाओं, किसानों, बुनकरों, रेहड़ी-पटरी वालों और आम नागरिकों का जबरदस्त समर्थन यह बताने के काफी था की वक्त अब बदलाव चाहती है।
यात्रा के दौरान लोगों ने खुलकर बेरोजगारी, महंगाई, पेपर लीक और सरकारी उपेक्षा के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। सारनाथ में अंतिम दिन जोश और आक्रोश का ऐसा संगम दिखा, जिसने साफ कर दिया कि जनता अब केवल सुनना नहीं, बदलाव चाहती है।
पूरी पदयात्रा के दौरान संजय सिंह ने केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखे और सीधे हमले किए। उन्होंने कहा कि देश और उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुकी है, लेकिन सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय जुमलों और खोखले आश्वासनों में उलझा रही है। बार-बार होने वाले पेपर लीक, सरकारी नौकरियों में कटौती और निजीकरण की नीतियों ने युवाओं का भविष्य अंधकार में धकेल दिया है।
संजय सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार हर युवा को रोजगार देने में विफल है, तो कम से कम बेरोजगार युवाओं को 10 हजार सम्मानजनक मासिक आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि वे आत्मसम्मान के साथ अपना जीवन यापन कर सकें।
सांसद संजय सिंह ने सामाजिक न्याय के मुद्दे पर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के राज में गरीब, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज सबसे अधिक उपेक्षित हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में इन वर्गों के लिए कोई ठोस और ईमानदार नीति दिखाई नहीं देती। सारनाथ में पदयात्रा के समापन पर संजय सिंह ने कहा कि यह यात्रा सत्ता परिवर्तन की नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की शुरुआत है। मिर्जापुर से बनारस तक उठी यह आवाज आने वाले समय में पूरे प्रदेश में गूंजेगी और रोजगार व सामाजिक न्याय की लड़ाई को नई दिशा देगी।
मणिकर्णिका घाट और दालमंडी मुद्दे पर सरकार के नीयत पर उठाए सवाल
पदयात्रा के दौरान बनारस पहुंचने पर संजय सिंह ने मणिकर्णिका घाट पर मूर्तियों को तोड़े जाने और दालमंडी इलाके में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर भी तीखे बयान दिए। उन्होंने कहा कि काशी की पहचान उसकी परंपरा, आस्था और संस्कृति से है, लेकिन विकास के नाम पर बिना संवेदनशीलता के की जा रही कार्रवाइयां आम लोगों की भावनाओं को आहत कर रही हैं। मणिकर्णिका घाट पर मूर्तियों को तोड़े जाने का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार विकास और आस्था के बीच संतुलन नहीं बना सकती।
वहीं दालमंडी में ध्वस्तीकरण पर उन्होंने कहा कि गरीब और छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई तो तुरंत होती है, लेकिन बड़े और ताकतवर लोगों के अवैध निर्माण पर प्रशासन आंखें मूंद लेता है। यह चयनात्मक कार्रवाई सामाजिक न्याय के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि वाराणसी केवल एक शहर नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी है, लेकिन यहां विकास के नाम पर परंपरा, इतिहास और विरासत को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि आम लोगों की आवाज़ दबाई जा रही है और जो भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है, उसके खिलाफ मुकदमे लिखी जाती है। संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी जनहित के सवालों पर चुप बैठने वाली नहीं है और सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष जारी रहेगा
सामूहिक भागीदारी से पूर्वांचल में नई राजनीतिक हलचल
इस पदयात्रा की सबसे बड़ी ताकत रही आम जनता की सक्रिय भागीदारी। महिलाओं ने महंगाई, सुरक्षा और सम्मान के सवाल उठाए, बच्चों और युवाओं ने बेहतर शिक्षा और रोजगार की मांग रखी, वहीं बुजुर्गों ने अपने अनुभव साझा करते हुए आशीर्वाद दिया। बुनकरों, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे व्यापारियों ने संजय सिंह के सामने अपनी रोज़मर्रा की समस्याएं रखीं। जगह-जगह फूलों से स्वागत, नारों की गूंज और लोगों की भीड़ ने यह साफ कर दिया कि पूर्वांचल में एक नई राजनीतिक हलचल जन्म ले रही है। करीब सात दिनों तक चली ‘रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो’ पदयात्रा ने यह संदेश दिया कि यह सिर्फ आम आदमी पार्टी का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आम जनता की आवाज़ है। मिर्जापुर से सारनाथ तक की यह यात्रा भाजपा सरकार के लिए एक राजनीतिक चेतावनी भी मानी जा रही है। संजय सिंह ने समापन के मौके पर कहा कि यह समर्थन उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि जनता की जीत है और आने वाले समय में यह संघर्ष और तेज होगा।
