पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा संपन्न, गुंडिचा मंदिर पहुंचे तीनों रथ; सात दिन मौसी के घर रहेंगे महाप्रभु

पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा संपन्न, गुंडिचा मंदिर पहुंचे तीनों रथ; सात दिन मौसी के घर रहेंगे महाप्रभु

(रणभेरी): विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा का पहला चरण शुक्रवार को पूरा हो गया। भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के विशाल रथ दोपहर बाद गुंडिचा मंदिर पहुंच गए। धार्मिक परंपरा के अनुसार अब तीनों देवता अगले सात दिनों तक अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहेंगे।

रथों के गुंडिचा मंदिर पहुंचने के साथ ही इस वर्ष की रथयात्रा की मुख्य प्रक्रिया पूरी हो गई। हजारों वर्षों पुरानी इस परंपरा में भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भक्तों को दर्शन देने के लिए श्रीमंदिर से बाहर निकलते हैं और गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं।

दूसरे दिन भी उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

रथयात्रा के दूसरे दिन शुक्रवार सुबह एक बार फिर पुरी की ग्रैंड रोड श्रद्धालुओं से भर गई। बारिश और उमस भरे मौसम के बावजूद करीब 9 लाख श्रद्धालु रथ खींचने के लिए सड़क पर मौजूद रहे।

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सुबह पूजा-अर्चना और आवश्यक अनुष्ठानों के बाद रथों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई। भक्तों ने “जय जगन्नाथ” और “हरि बोल” के जयघोष के साथ रथों को खींचा। पूरे मार्ग पर शंख, नगाड़े और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की आवाज से माहौल भक्तिमय बना रहा।

पहले दिन देरी के कारण अधूरी रह गई थी यात्रा

गुरुवार को रथयात्रा की शुरुआत हुई थी, लेकिन पाहंडी अनुष्ठान में हुई देरी और रात होने के कारण तीनों रथ गुंडिचा मंदिर तक नहीं पहुंच पाए थे। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रातभर अपने-अपने रथों पर ही विराजमान रहे। शुक्रवार सुबह दोबारा यात्रा शुरू होने के बाद रथों को आगे बढ़ाया गया और उन्हें गुंडिचा मंदिर तक पहुंचाया गया।

जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने बताई देरी की वजह

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरविंद पाधी ने बताया कि अधिकांश धार्मिक अनुष्ठान तय समय के अनुसार पूरे हुए थे, लेकिन भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा मुख्य द्वार के पास लगभग 40 मिनट तक आगे नहीं बढ़ सकी। इसके कारण पाहंडी की प्रक्रिया में एक घंटे से अधिक की देरी हुई।

उन्होंने बताया कि भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ करीब 700 मीटर की दूरी तय करने के बाद मार्केट चौक के पास रुक गया था। देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ लगभग 400 मीटर आगे बढ़कर मरीचिकोट चौक तक पहुंचा। वहीं भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ सिंहद्वार के आसपास ही रुक गया था।

मूसलाधार बारिश भी नहीं रोक पाई आस्था का उत्साह

पुरी में लगातार बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था कमजोर नहीं हुई। भक्त घंटों तक भीगते हुए रथों को खींचते रहे। ग्रैंड रोड पर बड़ी संख्या में लोग भजन-कीर्तन करते, नाचते और भगवान के जयकारे लगाते दिखाई दिए। प्रशासन की ओर से सड़क पर जलभराव रोकने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी, ताकि रथों की आवाजाही में परेशानी न हो।

बारिश के कारण हटाया गया भगवान जगन्नाथ का ‘तहिया’ मुकुट

रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के पारंपरिक फूलों से बने मुकुट ‘तहिया’ को लेकर भी चर्चा हुई। मंदिर प्रशासन ने बताया कि लगातार बारिश के कारण तहिया भीगकर काफी भारी हो गया था। श्रद्धालुओं और सेवायतों की सुविधा को देखते हुए उसे हटा दिया गया। प्रशासन ने जानकारी दी कि तीनों देवता शुक्रवार रात तक रथों पर ही विराजमान रहे। इसके बाद शनिवार को गुंडिचा मंदिर में प्रवेश की धार्मिक रस्म पूरी की जाएगी। मान्यता है कि गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ का जन्मस्थान माना जाता है, जहां वे हर वर्ष अपनी यात्रा के दौरान कुछ दिनों के लिए निवास करते हैं।

रथयात्रा के दौरान दो श्रद्धालुओं की मौत

रथयात्रा के दौरान दो श्रद्धालुओं की मौत की घटना भी सामने आई। हालांकि राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि दोनों मौतें भगदड़ या भीड़ नियंत्रण में किसी बड़ी चूक के कारण नहीं हुईं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, यात्रा के दौरान तबीयत खराब होने पर सात श्रद्धालुओं को अस्पताल पहुंचाया गया था। इनमें एक करीब 60 वर्षीय श्रद्धालु की मौत हो गई, जिसकी वजह की जांच जारी है। वहीं एक अन्य श्रद्धालु की मौत हार्ट अटैक से हुई। राज्य सरकार के अनुसार इस बार रथयात्रा में लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

बारिश थमते ही बढ़ी भीड़, कई जगह बने दबाव के हालात

गुरुवार सुबह से ही पुरी में बारिश जारी थी। खराब मौसम के कारण प्रशासन को उम्मीद थी कि श्रद्धालुओं की संख्या कम रह सकती है, लेकिन शाम को बारिश रुकते ही बड़ी संख्या में लोग रथ मार्ग पर पहुंच गए। इसके बाद रथों के आसपास अचानक भीड़ बढ़ गई और कई स्थानों पर धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई। कई श्रद्धालुओं को एक-दूसरे से टकराते और संभलते हुए देखा गया।

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रथयात्रा व्यवस्था में सामने आईं ये बड़ी कमियां

रथयात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन को लेकर कुछ सवाल भी उठे। विशेषज्ञों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ जगहों पर व्यवस्था कमजोर नजर आई।

  • सिंहद्वार क्षेत्र के आसपास लगातार बढ़ रही भीड़ को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया।
  • भीड़ बढ़ने के बाद प्रवेश और निकासी मार्गों में पर्याप्त बदलाव नहीं किया गया।
  • अलग-अलग दिशाओं से आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्पष्ट रास्तों की कमी महसूस हुई।
  • कुछ स्थानों पर लगी बैरिकेडिंग भीड़ नियंत्रण के बजाय दबाव वाले क्षेत्र में बदल गई।

इसके बावजूद प्रशासन और सुरक्षा बलों ने स्थिति को संभालते हुए यात्रा को आगे बढ़ाया।

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आस्था, परंपरा और उत्साह के बीच पूरी हुई जगन्नाथ रथयात्रा

भारी बारिश, भीड़ और चुनौतियों के बावजूद भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा परंपरा के अनुसार पूरी हुई। लाखों श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के दर्शन किए और गुंडिचा मंदिर पहुंचने के साथ यात्रा का यह चरण समाप्त हुआ। अब अगले सात दिनों तक भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा गुंडिचा मंदिर में भक्तों को दर्शन देंगे। इसके बाद वापसी यात्रा यानी बहुदा यात्रा के साथ वे पुनः श्रीमंदिर लौटेंगे।

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