(रणभेरी): बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटा दिया है। पार्टी में यह पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और लंबे समय से आकाश को मायावती के बाद प्रमुख चेहरों में गिना जा रहा था। खास बात यह रही कि गुरुवार को लखनऊ में आयोजित बसपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी आकाश आनंद को शामिल नहीं किया गया।
आकाश के खिलाफ मायावती का यह फैसला पिछले करीब तीन वर्षों में तीसरा बड़ा कदम है। इससे पहले भी मायावती उन्हें संगठन में मिली अहम जिम्मेदारियों से हटा चुकी हैं। ऐसे में ताजा कार्रवाई को बसपा की आंतरिक राजनीति और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मायावती ने बताई कार्रवाई की वजह
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मायावती ने आकाश आनंद को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि आकाश को अभी राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व होने की आवश्यकता है। मायावती के मुताबिक, चुनाव बेहद करीब हैं और ऐसे समय में पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को देना उचित नहीं होगा, जो राजनीतिक परिस्थितियों और विरोधियों की रणनीतियों का पूरी तरह सामना करने के लिए अभी तैयार नहीं है।
मायावती ने संकेत दिया कि राजनीति में केवल संगठन चलाने की क्षमता पर्याप्त नहीं है, बल्कि विरोधियों की ओर से अपनाए जाने वाले अलग-अलग राजनीतिक हथकंडों को समझना और उनका जवाब देना भी जरूरी है। उनके मुताबिक आकाश को इस स्तर की राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए अभी अनुभव हासिल करने की जरूरत है।

परिवार को लेकर मायावती ने कांशीराम की नीति का किया जिक्र
बैठक के दौरान मायावती ने पार्टी संस्थापक कांशीराम की कार्यशैली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांशीराम परिवार और रिश्तेदारों को पार्टी की गतिविधियों में सहयोग करने से नहीं रोकते थे, लेकिन चुनावी राजनीति में परिवार के सदस्यों को आगे बढ़ाने और सत्ता मिलने पर उन्हें सरकारी पद देने के पक्ष में नहीं थे।
मायावती ने कहा कि वह भी इसी विचारधारा पर कायम हैं। उनका कहना है कि बसपा का उद्देश्य किसी परिवार विशेष को राजनीतिक लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि समाज के शोषित और वंचित वर्गों को सत्ता में भागीदारी दिलाना है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी के हित में काम करने वाले हर व्यक्ति के लिए संगठन में जगह है। उनके लिए पार्टी में कोई अपना या पराया नहीं है। जो व्यक्ति बसपा और बहुजन समाज के हितों के लिए काम करेगा, उसका स्वागत किया जाएगा।
350 से ज्यादा पदाधिकारी बैठक में पहुंचे
लखनऊ में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में देश के अलग-अलग हिस्सों से करीब 350 पदाधिकारी पहुंचे। बैठक का मुख्य फोकस आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर रहा। मायावती ने संगठन के पदाधिकारियों के साथ उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड और पंजाब समेत उन पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति पर चर्चा की, जहां अगले चरण में चुनाव होने हैं।
बसपा के लिए उत्तर प्रदेश का चुनाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। पार्टी संगठन को मजबूत करने, उम्मीदवारों के चयन, जमीनी स्तर पर जनसंपर्क बढ़ाने और चुनावी रणनीति को धार देने को लेकर बैठक में चर्चा हुई।
पहली बार नजर आए ईशान आनंद
बैठक की एक और चर्चा आकाश आनंद के छोटे भाई ईशान आनंद की मौजूदगी को लेकर रही। ईशान पहली बार बसपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में दिखाई दिए। ईशान अपने पिता आनंद कुमार के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उन्होंने बसपा का पटका पहन रखा था। मायावती के बैठक में पहुंचने तक ईशान अपने पिता के साथ खड़े रहे।
ईशान इससे पहले भी सार्वजनिक रूप से मायावती के साथ नजर आ चुके हैं। वर्ष 2024 में मायावती के जन्मदिन के अवसर पर वह अपने बड़े भाई आकाश आनंद के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे थे। हालांकि, संगठनात्मक स्तर पर उनकी सक्रिय भूमिका अब तक सीमित रही है।
ईशान की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मौजूदगी को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब मायावती ने आकाश आनंद को संगठन के शीर्ष पद से हटा दिया है।
दिवंगत विधायक के बेटे को भी मंच मिला
बैठक में बसपा के दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे युकेश सिंह की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी। युकेश को पार्टी ने हाल ही में राजनीतिक तौर पर आगे बढ़ाना शुरू किया है।

बैठक से महज तीन दिन पहले मायावती ने युकेश सिंह को सार्वजनिक रूप से लॉन्च किया था। इसके बाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उनकी मौजूदगी ने बसपा में नई पीढ़ी के नेताओं को लेकर पार्टी की रणनीति पर चर्चा तेज कर दी है।
आकाश आनंद के पुराने बयानों की भी चर्चा
आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाए जाने के बाद उनके हालिया राजनीतिक बयानों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कार्रवाई से करीब 24 दिन पहले हाथरस में आयोजित एक रैली में आकाश ने विपक्ष के प्रमुख नेताओं राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर तीखी टिप्पणी की थी।
रैली में उन्होंने राहुल गांधी की उम्र को लेकर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि करीब 50 वर्ष की उम्र वाले व्यक्ति को वह ‘अंकल’ कहेंगे, तो इसके अलावा और क्या कहेंगे। इसी रैली में उन्होंने केंद्र सरकार की एथनॉल नीति पर भी निशाना साधा था। आकाश ने पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि पेट्रोल के नाम पर करीब 110 रुपये में गन्ने का रस बेचा जा रहा है। उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा मिली थी।
क्या आकाश की बढ़ती सक्रियता बनी वजह?
आकाश आनंद को हटाए जाने के पीछे सिर्फ उनके बयान जिम्मेदार हैं या पार्टी के भीतर कोई व्यापक रणनीतिक बदलाव हो रहा है, इस पर राजनीतिक विश्लेषकों की अलग-अलग राय है। कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ समय में आकाश आनंद की पार्टी के भीतर सक्रियता तेजी से बढ़ी थी। वह लगातार चुनावी कार्यक्रमों और जनसभाओं में नजर आ रहे थे। बसपा के घोषित विधानसभा प्रत्याशियों के बीच भी आकाश के कार्यक्रम कराने की होड़ देखी जा रही थी।
ऐसे में पार्टी संगठन में आकाश का प्रभाव बढ़ना मायावती के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता था। हालांकि, मायावती ने अपने बयान में इसे व्यक्तिगत या पारिवारिक विवाद के तौर पर पेश नहीं किया। उन्होंने पूरी कार्रवाई को आकाश की राजनीतिक परिपक्वता और आगामी चुनाव की परिस्थितियों से जोड़कर बताया।
तीन साल में तीसरी बार बदली भूमिका
आकाश आनंद के राजनीतिक सफर में यह पहला मौका नहीं है जब मायावती ने उनकी जिम्मेदारी कम की हो। करीब तीन साल के भीतर वह तीसरी बार आकाश से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वापस ले चुकी हैं।
आकाश को कभी मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा गया था। उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय किया गया और युवाओं के बीच बसपा की पकड़ मजबूत करने की जिम्मेदारी भी दी गई। लेकिन समय-समय पर मायावती ने उनके राजनीतिक तौर-तरीकों और बयानों को लेकर सख्त रुख अपनाया।
अब राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाए जाने के बाद यह सवाल फिर उठने लगा है कि बसपा में आकाश आनंद की आगे की भूमिका क्या होगी और मायावती आगामी चुनावों में किस चेहरे को पार्टी के युवा नेतृत्व के तौर पर आगे बढ़ाएंगी।
चुनाव से पहले बसपा की नई रणनीति?
आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए मायावती का यह फैसला पार्टी की रणनीति में बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है। बसपा लंबे समय से अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को मजबूत करने के साथ-साथ नए मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। मायावती ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में साफ संकेत दिया कि चुनावी समय में संगठन को अनुशासन, अनुभव और स्पष्ट रणनीति के साथ आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकता है।
आकाश आनंद को फिलहाल राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाने के बाद बसपा में नेतृत्व और संगठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दूसरी तरफ ईशान आनंद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मौजूदगी और युकेश सिंह को हाल में आगे बढ़ाए जाने से पार्टी में नई पीढ़ी के चेहरों की भूमिका को लेकर भी अटकलें शुरू हो गई हैं।
हालांकि, मायावती ने अपने फैसले को किसी एक व्यक्ति के बजाय पार्टी की विचारधारा और संगठनात्मक जरूरत से जोड़कर रखा है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में आकाश आनंद की पार्टी में क्या भूमिका रहती है और 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले मायावती बसपा के संगठन को किस नए स्वरूप में तैयार करती हैं।
