वाराणसी में चीनी की कीमतों पर प्रशासन सख्त, 4000 क्विंटल से अधिक भंडारण पर रोक

वाराणसी में चीनी की कीमतों पर प्रशासन सख्त, 4000 क्विंटल से अधिक भंडारण पर रोक

30 दिन से अधिक पुराना स्टॉक रखने पर भी होगी कार्रवाई, खपत और आपूर्ति का ऑनलाइन ब्योरा देना होगा

वाराणसी (रणभेरी): चीनी के बढ़ते दामों को लेकर जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग ने निगरानी तेज कर दी है। बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर नजर रखने के साथ ही गुड़, मिठाई तथा चीनी से तैयार होने वाले अन्य उत्पादों की भी निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने व्यापारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्थिति में चीनी की जमाखोरी न की जाए और निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक रखने पर कार्रवाई की जाएगी।

जिला आपूर्ति अधिकारी अमित कुमार मालवीय के निर्देश पर आपूर्ति विभाग ने व्यापारियों के साथ बैठक कर भंडारण और स्टॉक को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बैठक में तय किया गया कि जिले में कोई भी डीलर 4000 क्विंटल से अधिक चीनी का भंडारण नहीं कर सकेगा। इसके साथ ही व्यापारी को 30 दिन से अधिक का स्टॉक जमा करके रखने की अनुमति नहीं होगी।

व्यापारियों के साथ बैठक में लिया गया फैसला

जिला खाद्य विपणन अधिकारी अविनाश झा के अनुसार चीनी की कीमतों और बाजार में इसकी उपलब्धता पर विभाग लगातार नजर रख रहा है। इसी सिलसिले में आपूर्ति सभागार में अधिकारियों और व्यापारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में चीनी के मौजूदा स्टॉक, आपूर्ति व्यवस्था और बाजार में इसकी खपत को लेकर चर्चा हुई।

अधिकारियों ने व्यापारियों से कहा कि पर्याप्त मात्रा में चीनी की आपूर्ति हो रही है। ऐसे में किसी भी व्यापारी द्वारा जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा करने या कृत्रिम रूप से बाजार में कमी पैदा करने की कोशिश को गंभीरता से लिया जाएगा।

4000 क्विंटल की सीमा तय

बैठक में प्रशासन की ओर से स्टॉक सीमा को लेकर स्थिति साफ कर दी गई है। अब कोई भी डीलर 4000 क्विंटल से ज्यादा चीनी अपने पास नहीं रख सकेगा। इसके अलावा व्यापारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि 30 दिन से अधिक की आवश्यकता के बराबर स्टॉक पहले से जमा न किया जाए।
विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य बाजार में चीनी की नियमित उपलब्धता बनाए रखना और अनावश्यक भंडारण के जरिए कीमतों को प्रभावित करने की संभावनाओं को रोकना है।

जमाखोरी करने वालों पर होगी कार्रवाई

अधिकारियों ने व्यापारियों को चेतावनी दी है कि चीनी की जमाखोरी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग की ओर से इसके लिए निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। जांच के दौरान यदि किसी व्यापारी के यहां निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक या नियमों के विपरीत भंडारण पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अविनाश झा ने बताया कि व्यापारियों को यह भी समझाया गया है कि जिले में चीनी की कोई कमी नहीं है। आपूर्ति व्यवस्था सामान्य है और पर्याप्त मात्रा में चीनी बाजार में पहुंच रही है। इसलिए किसी तरह की अफवाह या आशंका के आधार पर अतिरिक्त स्टॉक जमा करने की जरूरत नहीं है।

ऑनलाइन दर्ज करना होगा खपत और आपूर्ति का ब्योरा

निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए व्यापारियों को सरकार के ऑनलाइन पोर्टल पर अपने स्टॉक और कारोबार से जुड़ी जानकारी दर्ज करनी होगी। इसमें चीनी की खपत और आपूर्ति का विवरण शामिल रहेगा।

विभाग इस ऑनलाइन रिकॉर्ड की नियमित समीक्षा करेगा। अधिकारियों के अनुसार हर शुक्रवार को उपलब्ध आंकड़ों की समीक्षा की जाएगी, जिससे यह पता लगाया जा सके कि बाजार में चीनी की मांग और आपूर्ति के बीच कोई असामान्य स्थिति तो नहीं बन रही है।

गुड़ और मिठाई कारोबार पर भी नजर

चीनी की कीमतों की निगरानी केवल चीनी के थोक कारोबार तक सीमित नहीं रहेगी। विभाग की टीम गुड़, मिठाई और चीनी से तैयार होने वाले अन्य उत्पादों के बाजार पर भी नजर रखेगी। इसका उद्देश्य यह देखना है कि चीनी की कीमतों में बदलाव का फायदा उठाकर कहीं अन्य उत्पादों के दाम अनावश्यक रूप से तो नहीं बढ़ाए जा रहे हैं।

अधिकारियों के मुताबिक बाजार में कीमतों को लेकर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर संबंधित स्तर पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

तहसील स्तर पर बनी निगरानी समितियां

चीनी की उपलब्धता, कीमत और आपूर्ति व्यवस्था पर नजर रखने के लिए तहसील स्तर पर भी निगरानी तंत्र तैयार किया गया है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के निर्देश पर तहसीलों में निगरानी समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों की जिम्मेदारी संबंधित उपजिलाधिकारी को दी गई है।

तहसील स्तर की समितियां अपने क्षेत्र में चीनी के स्टॉक, आपूर्ति और बाजार की स्थिति पर नजर रखेंगी। किसी भी तरह की शिकायत या असामान्य स्थिति सामने आने पर इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी।

मूल्य निगरानी प्रकोष्ठ भी सक्रिय

प्रशासन ने बाजार में कीमतों की निगरानी के लिए अलग से मूल्य निगरानी प्रकोष्ठ भी बनाया है। यह प्रकोष्ठ चीनी सहित संबंधित खाद्य उत्पादों के बाजार भाव पर नजर रखेगा। अधिकारियों का कहना है कि निगरानी व्यवस्था का मकसद व्यापारियों को परेशान करना नहीं, बल्कि बाजार में सामान की नियमित उपलब्धता और उचित मूल्य व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

प्रशासन ने व्यापारियों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि वे निर्धारित नियमों के अनुसार ही स्टॉक रखें और ऑनलाइन पोर्टल पर सही जानकारी उपलब्ध कराएं। विभाग की निगरानी आने वाले दिनों में भी जारी रहेगी।

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