BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल में छात्र से कथित दुर्व्यवहार पर बवाल, चीफ प्रॉक्टर और लंका थाने पहुंचा मामला

BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल में छात्र से कथित दुर्व्यवहार पर बवाल, चीफ प्रॉक्टर और लंका थाने पहुंचा मामला

चीफ प्रॉक्टर कार्यालय और लंका थाने में दी शिकायत, निष्पक्ष जांच की मांग; सीसीटीवी और उपलब्ध वीडियो फुटेज की जांच कराने की मांग

वाराणसी (रणभेरी) : काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल के जनरल मेडिसिन विभाग में बुधवार को एक छात्र के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद छात्रों में नाराजगी है। छात्रों ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। इसके साथ ही छात्रों ने लंका थाने में भी शिकायत देकर मामले में तथ्यात्मक जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

छात्रों का कहना है कि मामले में किसी एक पक्ष के आरोप या वीडियो के चुनिंदा हिस्से के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय पूरे घटनाक्रम की जांच की जानी चाहिए। छात्रों ने अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, उपलब्ध वीडियो फुटेज और संबंधित लोगों के बयान के आधार पर जांच कराने की मांग की है।

परिजन को चिकित्सकीय परामर्श दिलाने पहुंचा था छात्र

छात्रों के मुताबिक, बुधवार दोपहर करीब एक बजे एक छात्र अपने परिजन को चिकित्सकीय परामर्श दिलाने के लिए सर सुंदरलाल अस्पताल के जनरल मेडिसिन विभाग स्थित कमरा नंबर-4 में पहुंचा था। उस समय ओपीडी में लगे टोकन डिस्प्ले पर क्रमांक 66 प्रदर्शित हो रहा था।

छात्र का कहना है कि वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपने परिजन को चिकित्सक को दिखाने के लिए संबंधित कक्ष में गया। आरोप है कि वहां मौजूद वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. धीरज किशोर ने छात्र से कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया और उसे कमरे से बाहर जाने के लिए कहा।

छात्रों के अनुसार, चिकित्सक ने उस समय अपनी तबीयत खराब होने की बात भी कही। इस पर छात्र ने चिकित्सक से उनका नाम पूछा और कथित तौर पर यह बात कही कि यदि उनकी तबीयत ठीक नहीं थी तो वह पहले ही अवकाश ले सकते थे।

छात्र से मांगी गई व्यक्तिगत जानकारी

छात्रों का आरोप है कि इसके बाद चिकित्सक ने छात्र से उसका नाम, विभाग, विभागाध्यक्ष सहित अन्य जानकारियां पूछीं। छात्रों के अनुसार, छात्र ने जानकारी देने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं जताई।

छात्रों का आरोप है कि इसी दौरान चिकित्सक ने अपने मोबाइल फोन से छात्र की तस्वीर खींच ली और उसे व्हाट्सऐप के माध्यम से किसी व्यक्ति को भेज दिया। छात्र ने जब चिकित्सक से पूछा कि उसकी तस्वीर किसे भेजी जा रही है, तो कथित तौर पर उसे यह जवाब दिया गया कि कुछ समय बाद पता चल जाएगा। छात्रों के मुताबिक, इसी बात को लेकर छात्र ने आपत्ति जताई और मामले को लेकर नाराजगी व्यक्त की। इसके बाद उसने अपने कुछ अन्य साथियों को मौके पर बुलाया।

बातचीत का वीडियो बनाने का दावा

मामले की जानकारी मिलने के बाद कुछ छात्र मौके पर पहुंचे और चिकित्सक से पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल-जवाब किए। इस दौरान हुई बातचीत के कुछ हिस्से को छात्रों द्वारा मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किए जाने की बात सामने आई है।

छात्रों का आरोप है कि बाद में बातचीत के वीडियो के कुछ हिस्सों को काटकर या संपादित कर मीडिया और अन्य माध्यमों में प्रसारित किया गया। छात्रों का कहना है कि यदि वीडियो को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया गया है तो इससे घटनाक्रम का केवल एक पक्ष सामने आता है। छात्रों ने मांग की है कि यदि घटना का वीडियो उपलब्ध है तो उसकी पूरी रिकॉर्डिंग की जांच की जाए और संपादित अथवा चुनिंदा अंशों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर न पहुंचा जाए।

ओपीडी में बाहरी व्यक्ति की मौजूदगी को लेकर भी सवाल

छात्रों ने मामले से जुड़े एक अन्य पहलू को भी जांच के दायरे में शामिल करने की मांग की है। छात्रों के अनुसार, जब वे अपने परिजन को ओपीडी में चिकित्सकीय परामर्श दिलाने पहुंचे थे, उसी दौरान वहां एक ऐसा बाहरी व्यक्ति मौजूद था जो न तो चिकित्सक था और न ही अस्पताल का कर्मचारी।

छात्रों का आरोप है कि उक्त व्यक्ति मरीजों को दवाएं लेने के लिए एक विशेष मेडिकल स्टोर का पता बता रहा था। छात्रों के अनुसार, जब उन्होंने इस गतिविधि पर आपत्ति जताई तो संबंधित व्यक्ति ने कथित तौर पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया।

छात्रों का यह भी आरोप है कि उक्त व्यक्ति ने स्वयं को प्रभावशाली पहुंच वाला बताते हुए छात्रों को मुकदमे में फंसाने और उनका भविष्य खराब करने की धमकी दी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।

छात्रों का कहना है कि जब उन्होंने इस व्यक्ति के व्यवहार की शिकायत संबंधित चिकित्सक से की, तो आरोप के मुताबिक चिकित्सक ने शिकायत सुनने के बजाय छात्रों के साथ ही कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया। छात्रों ने इस पूरे घटनाक्रम की भी जांच कराने की मांग की है।

मेडिकल स्टोर और बाहरी लोगों की भूमिका की जांच की मांग

छात्रों ने अस्पताल की ओपीडी में बाहरी व्यक्तियों की मौजूदगी और मरीजों को किसी विशेष मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए कथित रूप से निर्देशित किए जाने के आरोपों को गंभीर बताया है।

छात्रों का कहना है कि यदि अस्पताल परिसर में किसी बाहरी व्यक्ति को मरीजों को किसी विशेष मेडिकल स्टोर की ओर भेजने की अनुमति नहीं है, तो यह पता लगाया जाना चाहिए कि वह व्यक्ति ओपीडी में किस आधार पर मौजूद था और उसे वहां मरीजों से संपर्क करने की अनुमति किसने दी।

छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि मामले की जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति का अस्पताल या किसी चिकित्सक से क्या संबंध था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

वर्ष 2025 की अधिसूचना के अनुपालन पर भी उठे सवाल

छात्रों ने सर सुंदरलाल अस्पताल में दवा कंपनियों के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) की ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर और वार्ड में चिकित्सकों से मुलाकात को लेकर जारी पूर्व अधिसूचनाओं का भी हवाला दिया है।

छात्रों के अनुसार, चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय की ओर से 12 अगस्त 2025 को जारी आदेश, पत्रांक SSH/GAD/F-16/2025-26/2427, में अस्पताल के ओपीडी, ऑपरेशन थियेटर और वार्ड में दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों के चिकित्सकों से मिलने पर रोक संबंधी निर्देश दिए गए थे।

छात्रों का कहना है कि इससे पहले भी वर्ष 2015 और 2022 में इस संबंध में निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद यदि अस्पताल के प्रतिबंधित क्षेत्रों में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की आवाजाही हो रही है अथवा वे चिकित्सकों से मुलाकात कर रहे हैं, तो यह प्रशासनिक स्तर पर जांच का विषय है।

आदेश में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित चिकित्सक अथवा मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई किए जाने की बात कही गई थी। छात्रों का कहना है कि उक्त आदेश अस्पताल के संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाए जाने के बावजूद यदि इसका अनुपालन नहीं हो रहा है तो प्रशासन को इसकी निगरानी और जवाबदेही तय करनी चाहिए।

छात्रों ने निष्पक्ष जांच पर दिया जोर

छात्रों का कहना है कि चिकित्सक और छात्र दोनों ही अस्पताल एवं विश्वविद्यालय व्यवस्था का हिस्सा हैं और दोनों के बीच सम्मानजनक व्यवहार तथा अनुशासन बनाए रखना जरूरी है। किसी भी पक्ष की ओर से अनुचित आचरण हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी तथ्यों की जांच के बाद ही तय की जानी चाहिए।

छात्रों ने विश्वविद्यालय और अस्पताल प्रशासन से मांग की है कि मामले में दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाए। साथ ही घटना के समय मौजूद लोगों के बयान दर्ज किए जाएं, ओपीडी के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर उनकी जांच की जाए और उपलब्ध मोबाइल वीडियो की मूल रिकॉर्डिंग को भी जांच में शामिल किया जाए।

चीफ प्रॉक्टर कार्यालय और पुलिस से शिकायत

छात्रों ने घटना के संबंध में विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने के साथ ही लंका थाने में भी शिकायत दी है। छात्रों का कहना है कि वे चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो तथा जांच के बाद ही किसी पक्ष के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और उनकी शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं की जाती है तो वे विश्वविद्यालय स्तर पर व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य हो सकते हैं। छात्रों ने आवश्यकता पड़ने पर आगे विधिक कार्रवाई किए जाने की बात भी कही है।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

फिलहाल पूरे मामले में छात्रों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित चिकित्सक, अस्पताल प्रशासन अथवा अन्य आरोपित पक्ष का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

छात्रों की मुख्य मांग है कि मामले को किसी एक वीडियो या किसी एक पक्ष के बयान तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उपलब्ध सभी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मूल वीडियो रिकॉर्डिंग और संबंधित व्यक्तियों के बयान के आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाए। छात्रों का कहना है कि जांच के बाद जो तथ्य सामने आएं, उसी के आधार पर जिम्मेदारी और कार्रवाई तय की जानी चाहिए।

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