वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ा, शीतला मंदिर तक पहुंचा बाढ़ का पानी; वरुणा भी उफनी

वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ा, शीतला मंदिर तक पहुंचा बाढ़ का पानी; वरुणा भी उफनी

वाराणसी (रणभेरी): गुरुवार को वाराणसी में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहा। सुबह से आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रही और कई इलाकों में रुक-रुककर हल्की बूंदाबांदी हुई। बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, मौसम विभाग की ओर से जताई जा रही तेज बारिश की संभावना अब कमजोर पड़ गई है। मौसम विज्ञानी प्रो. मनोज श्रीवास्तव के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय निम्न दबाव का क्षेत्र कमजोर हो चुका है। ऐसे में वाराणसी में फिलहाल भारी बारिश की संभावना कम मानी जा रही है।

गुरुवार को शहर में अधिकतम तापमान 31.5 डिग्री सेल्सियस, जबकि न्यूनतम तापमान 24.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बादल छाए रहने और बूंदाबांदी के चलते लोगों को उमस से कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन दूसरी ओर गंगा और वरुणा के बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों की चिंता बढ़ा दी है।

गंगा का जलस्तर 68.35 मीटर पहुंचा

वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार ऊपर जा रहा है। गुरुवार सुबह नदी का पानी 68.35 मीटर तक पहुंच गया। हालांकि प्रशासन और स्थानीय लोगों के मुताबिक जलस्तर बढ़ने की रफ्तार पहले की तुलना में धीमी हुई है, लेकिन पानी बढ़ने से घाटों और नदी किनारे बसे इलाकों में मुश्किलें बनी हुई हैं।

गंगा के बढ़ते पानी के कारण शहर के कई प्रमुख घाटों की सीढ़ियां पानी में समा गई हैं। निचले हिस्सों में पानी फैलने से घाटों पर होने वाली सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं। लोगों को नदी के किनारे जाने में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ा, शीतला मंदिर तक पहुंचा बाढ़ का पानी; वरुणा भी उफनी

शीतला घाट पर मंदिर परिसर तक पहुंचा पानी

गंगा का जलस्तर बढ़ने का असर शीतला घाट पर भी साफ दिखाई दे रहा है। यहां बाढ़ का पानी मां शीतला मंदिर परिसर तक पहुंच गया है। पानी मंदिर क्षेत्र में पहुंचने के कारण पूजा-पाठ और श्रद्धालुओं के दर्शन पर असर पड़ा है।

घाट की कई सीढ़ियां पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। इसके साथ ही आसपास के निचले हिस्सों में भी पानी का फैलाव बढ़ रहा है। मंदिर तक पहुंचने वाले रास्तों पर भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन की टीमें इलाके की स्थिति पर नजर रख रही हैं। तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ा, शीतला मंदिर तक पहुंचा बाढ़ का पानी; वरुणा भी उफनी

मणिकर्णिका घाट पर भी बदली व्यवस्था

गंगा के बढ़ते पानी से मणिकर्णिका घाट की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। घाट का निचला हिस्सा पानी में डूबने के कारण सामान्य गतिविधियों को ऊपरी हिस्से की ओर स्थानांतरित करना पड़ा है। यहां छत पर शवदाह किए जाने की स्थिति बनी हुई है।

वहीं, गंगा का जलस्तर बढ़ने के चलते काशी विश्वनाथ मंदिर का गंगा द्वार पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। इससे गंगा की ओर से मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

गंगा के पलट प्रवाह से वरुणा में भी बढ़ा पानी

गंगा का पानी बढ़ने का असर केवल घाटों तक सीमित नहीं है। गंगा के पलट प्रवाह के कारण वरुणा नदी का जलस्तर भी बढ़ गया है। इससे वरुणा किनारे के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं।

शैलपुत्री मोहल्ले में कई घरों तक बाढ़ का पानी पहुंचने की स्थिति बन गई है। आसपास के निचले इलाकों में पानी जमा होने से लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। पानी शैलपुत्री मंदिर रोड की ओर भी बढ़ता दिखाई दिया, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।

कई स्थानों पर रास्तों पर पानी आने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ है। स्थानीय लोग जलस्तर पर लगातार नजर रख रहे हैं और प्रशासन से भी स्थिति के अनुसार राहत एवं बचाव की तैयारी रखने की मांग कर रहे हैं।

नगवा में राहत शिविरों की तैयारी शुरू

नगवा नाला क्षेत्र में पानी बढ़ने के बाद प्रशासन ने संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों ने प्रभावित हो सकने वाले परिवारों को जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना तैयार की है।

क्षेत्रीय लेखपाल सपना राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचीं और संभावित राहत शिविरों के लिए स्थानों का निरीक्षण किया। प्रशासन की योजना के मुताबिक नगवा नाला के दक्षिणी हिस्से में रहने वाले परिवारों को आवश्यकता पड़ने पर नगवा प्राथमिक विद्यालय और क्षेत्र के दो निजी विद्यालयों में बनाए जाने वाले अस्थायी राहत शिविरों में रखा जा सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि अभी लोगों को तत्काल विस्थापित करने की जरूरत नहीं है, लेकिन जलस्तर में तेजी आने पर बिना देरी किए प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की व्यवस्था तैयार रखी जा रही है।

उत्तर दिशा की बस्ती के लिए भी वैकल्पिक ठिकाने तय

नगवा नाला के उत्तर दिशा में रामेश्वर मठ के पीछे रहने वाली बस्ती के लिए भी प्रशासन ने अलग से राहत व्यवस्था तय की है। यदि जलस्तर और बढ़ता है तथा बस्ती में पानी प्रवेश करता है तो यहां रहने वाले परिवारों को अस्सी स्थित गोयनका विद्यालय, गोपीराधा और भदैनी क्षेत्र के एक निजी विद्यालय में बनाए जाने वाले राहत शिविरों में स्थानांतरित किया जा सकता है।

प्रशासनिक टीमें लगातार संवेदनशील इलाकों का जायजा ले रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि नदी के जलस्तर और निचले इलाकों में पानी की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

तेज बारिश का खतरा फिलहाल कम

मौसम के मोर्चे पर वाराणसी के लिए फिलहाल राहत की खबर है। बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव कमजोर होने के कारण तेज बारिश का पूर्वानुमान कमजोर पड़ गया है। गुरुवार को भी शहर में बादल छाए रहे और कुछ जगहों पर हल्की बूंदाबांदी हुई, लेकिन व्यापक स्तर पर भारी बारिश नहीं हुई।

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले समय में हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बनी रह सकती है, लेकिन फिलहाल बहुत तेज बारिश की संभावना कम है। इससे प्रशासन को भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और निगरानी व्यवस्था संभालने के लिए कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

तटवर्ती इलाकों में बढ़ी सतर्कता

नगवा नाला के उत्तरी हिस्से में रामेश्वर मठ के पीछे बसी बस्ती को लेकर भी प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की है। यदि जलस्तर बढ़ने से हालात बिगड़ते हैं तो यहां रहने वाले परिवारों को अस्सी के गोयनका विद्यालय, गोपीराधा और भदैनी क्षेत्र में चिन्हित निजी विद्यालयों में बनाए जाने वाले राहत शिविरों में स्थानांतरित किया जाएगा।

प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और संवेदनशील इलाकों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जलस्तर में बढ़ोतरी होने पर प्रभावित परिवारों को बिना देरी सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

Share this news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *