अयोध्या राममंदिर चढ़ावा प्रकरण: सुरक्षा एजेंसी और कर्मचारियों की भूमिका पर उठे सवाल, जांच तेज

अयोध्या राममंदिर चढ़ावा प्रकरण: सुरक्षा एजेंसी और कर्मचारियों की भूमिका पर उठे सवाल, जांच तेज

वाराणसी (रणभेरी): राममंदिर परिसर में दान-राशि की गिनती और उससे जुड़े कोष की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सामने आए गड़बड़ी मामले ने सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियों की शुरुआती पड़ताल में एक निजी सुरक्षा एजेंसी और उससे जुड़े कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिसके बाद कार्रवाई तेज कर दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, वाराणसी स्थित एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी द्वारा कुल 22 कर्मचारियों को अयोध्या में विभिन्न जिम्मेदारियों के लिए तैनात किया गया था। इन कर्मचारियों में अधिकतर स्थानीय निवासी बताए जा रहे हैं, जिन्हें वाराणसी में ही जॉइनिंग प्रक्रिया पूरी कराकर ड्यूटी पर भेजा गया था।

बताया जाता है कि इनकी नियुक्ति प्रक्रिया में अयोध्या स्थित एक बैंक शाखा के वरिष्ठ अधिकारी की अनुशंसा की भूमिका भी सामने आई है। अनुशंसा के बाद इन कर्मचारियों को मंदिर परिसर से जुड़े दान प्रबंधन और सहायक कार्यों में लगाया गया था।

जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित सुरक्षा एजेंसी ने बिना विस्तृत सत्यापन के कर्मचारियों को तैनात किया था। इसी बीच हाल ही में सामने आए कथित ‘चढ़ावा गबन’ मामले में जांच टीम ने सख्ती दिखाते हुए छह कर्मचारियों को हिरासत में लिया है। बाकी कर्मचारियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।

वहीं, एजेंसी पर यह आरोप भी लग रहा है कि उसे बैंक की ओर से दान राशि की गणना और संबंधित कार्यों के लिए कर्मचारियों की आपूर्ति का जिम्मा सौंपा गया था। इसके अलावा मंदिर ट्रस्ट के कुछ सहयोगी कार्यों के लिए भी इसी एजेंसी से स्टाफ उपलब्ध कराया गया था।

लगभग ढाई दशक से कार्यरत इस निजी सुरक्षा एजेंसी के कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। हालांकि एजेंसी प्रबंधन ने आरोपों से खुद को अलग बताते हुए कहा है कि गिरफ्तार कर्मचारियों की गतिविधियों या कथित गड़बड़ी की उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।

फिलहाल मामले की जांच कर रही विशेष टीम ने एजेंसी के मालिक और सुपरवाइजर से भी पूछताछ की है। जांच अधिकारी पूरे नेटवर्क, भर्ती प्रक्रिया और तैनाती से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं।

प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इस मामले में किसकी कितनी भूमिका रही है और क्या यह केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।

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