वाराणसी (रणभेरी): पराड़कर भवन स्थित गर्दे सभागार में शनिवार को “सामाजिक परिवर्तन एवं राष्ट्र की एकता-अखंडता” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अधिवक्ताओं, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही। आयोजन का उद्देश्य समाज में समरसता, समानता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना बताया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अनुसूचित विभाग कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. डॉ. प्रतिमा गोड ने भी अपने विचार साझा किए। मंच पर मौजूद वक्ताओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के सामाजिक न्याय, समानता और अधिकारों पर आधारित विचारों को आज के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक बताया।

कार्यक्रम के आयोजक एवं अधिवक्ता डॉ. राहुल राज ने गोष्ठी के दौरान सामाजिक एवं संवैधानिक विषयों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि समाज में वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है जब संविधान में निहित मूल्यों को जमीनी स्तर पर लागू किया जाए। उन्होंने बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने शिक्षा, समान अवसर, जातिगत भेदभाव के उन्मूलन तथा सामाजिक एकता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। सभी वक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि मजबूत राष्ट्र के निर्माण के लिए सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारा अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं, अधिवक्ताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार रखे। कई प्रतिभागियों ने कहा कि आज के समय में संविधान के प्रति जागरूकता और डॉ. अंबेडकर के सिद्धांतों को समझना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि सामाजिक परिवर्तन केवल विचारों से नहीं, बल्कि व्यवहार में बदलाव और संवैधानिक मूल्यों के पालन से ही संभव है।
