(रणभेरी): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आज क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के विस्तार और उन्नयन को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह मौजूद रहे। कार्यक्रम में मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन से जुड़ी नई तकनीकों और योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी गई।
मौसम पूर्वानुमान में तकनीकी बदलाव का दावा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले एक दशक में मौसम पूर्वानुमान प्रणाली में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां मौसम की भविष्यवाणियां अक्सर सटीक नहीं होती थीं, वहीं अब तकनीक के माध्यम से लोगों को समय रहते अलर्ट मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अब आंधी-बारिश जैसी घटनाओं की जानकारी मोबाइल फोन पर कुछ घंटे पहले ही उपलब्ध हो जाती है, जिससे जनहानि को कम करने में मदद मिली है।
आपदा प्रबंधन और अलर्ट सिस्टम पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में पहले प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भारी जनहानि होती थी, लेकिन अब अर्ली वार्निंग सिस्टम के कारण स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई जिलों में समय रहते अलर्ट जारी होने से संभावित बड़ी दुर्घटनाएं टल गईं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ मामलों में स्थानीय स्तर पर सतर्कता की कमी अभी भी चुनौती बनी हुई है, जिस पर लगातार काम किया जा रहा है।
कृषि और जलवायु पर बदलते मौसम का असर
सीएम ने चिंता जताई कि मौसम पैटर्न में बदलाव के कारण भविष्य में कृषि उत्पादन पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अब मौसम के चक्र में लगभग एक महीने का अंतर देखा जा रहा है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर भी असर पड़ने की आशंका है। इसी कारण किसानों को सटीक मौसम जानकारी उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
लखनऊ में नया रीजनल वेदर सेंटर
कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि अब लखनऊ स्थित केंद्र को अपग्रेड कर इसे क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का दर्जा दिया गया है। इसके तहत अब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मौसम की विस्तृत निगरानी की जाएगी। केंद्र पर नए रडार, ऑब्जर्वेशन सिस्टम और तकनीकी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पहले पूरे उत्तर भारत के लिए सीमित केंद्र थे, लेकिन अब व्यवस्था को विकेंद्रीकृत कर क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में मौसम पूर्वानुमान और अधिक सटीक और स्थानीय स्तर पर उपयोगी होगा।
पिछले वर्षों में तकनीकी विस्तार का दावा
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले वर्षों में देशभर में मौसम निगरानी नेटवर्क का विस्तार किया गया है। रडार सिस्टम, ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और लाइटनिंग डिटेक्शन सिस्टम की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही एयरपोर्ट और शहरी क्षेत्रों में भी मौसम निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह प्रणाली इतनी उन्नत होगी कि लोगों को यह तक जानकारी मिल सकेगी कि अगले कुछ घंटों में मौसम कैसा रहेगा और क्या उन्हें बाहर निकलना चाहिए या नहीं।
भविष्य की योजना
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि आगामी वर्षों में मौसम विज्ञान नेटवर्क को और विस्तार दिया जाएगा। देशभर में रडार की संख्या बढ़ाकर लगभग 100 करने की योजना पर काम चल रहा है। साथ ही, क्षेत्रीय पूर्वानुमान प्रणाली को और अधिक सटीक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
