कोच्चि मॉडल पर आधारित परियोजना से घाटों की कनेक्टिविटी और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
अस्सी, दशाश्वमेध, नमो घाट सहित प्रमुख घाट जलमार्ग से जुड़ने की तैयारी
वाराणसी (रणभेरी): आने वाले समय में गंगा नदी केवल आस्था और संस्कृति का प्रतीक भर नहीं रहेगी, बल्कि आधुनिक जल परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम भी बन सकती है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत देश के 18 शहरों में वाटर मेट्रो सेवा शुरू करने की तैयारी चल रही है, जिसमें वाराणसी को पहले चरण में शामिल किए जाने की संभावना है।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की हालिया समीक्षा बैठक में वाराणसी की फिजिबिलिटी रिपोर्ट को मंजूरी मिलने की सूचना सामने आई है। इसके साथ ही राष्ट्रीय जल मेट्रो नीति-2026 का मसौदा अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नीति लागू होने के बाद देशभर में जल परिवहन परियोजनाओं को एक समान ढांचा मिलेगा।
प्रारंभिक योजना के अनुसार अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट, नमो घाट, राजघाट और रामनगर जैसे प्रमुख स्थानों को जलमार्ग से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। इससे यात्रियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को तेज, सुगम और वैकल्पिक परिवहन सुविधा मिल सकेगी।
अधिकारियों का मानना है कि कोच्चि वाटर मेट्रो की सफलता के बाद वाराणसी में यह मॉडल शहरी यातायात का दबाव कम करने में भी मदद करेगा। साथ ही गंगा किनारे पर्यटन को नई गति मिलेगी और शहर को एक आधुनिक पहचान भी प्राप्त होगी। फिलहाल परियोजना की तकनीकी और विस्तृत कार्ययोजना पर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जारी है। आने वाले समय में इस महत्वाकांक्षी योजना को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
