(रणभेरी): प्रयागराज के नैनी क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया। भीषण आग में फंसे अपने बच्चों को बचाने के लिए एक मां ने आखिरी सांस तक संघर्ष किया। करीब आधे घंटे तक धुएं और आग की लपटों के बीच वह अपने परिवार को सुरक्षित निकालती रही, लेकिन अंत में खुद जिंदगी की जंग हार गई।
यह घटना 12 मई की रात नैनी बाजार की चैंपियन गली में हुई, जहां एक क्रॉकरी व्यापारी के घर में अचानक आग भड़क उठी। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरा मकान धुएं और लपटों से घिर गया। घर के ऊपरी हिस्से में महिलाएं और बच्चे मौजूद थे, जिससे स्थिति और भयावह हो गई।
शॉर्ट सर्किट से लगी आग, मच गई अफरा-तफरी
जानकारी के अनुसार, मकान के पहले तल पर क्रॉकरी का गोदाम बनाया गया था, जहां बड़ी मात्रा में सामान रखा हुआ था। रात करीब 9 बजे अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ और देखते ही देखते आग ने पूरे गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया।
घटना के समय परिवार के लोग ऊपर के कमरों में थे। नीचे आग फैलने के कारण बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग जमा हुए और फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। हालांकि, गली बेहद संकरी होने के कारण राहत कार्य शुरू करने में काफी मुश्किलें आईं।
मां ने दिखाई अद्भुत बहादुरी
आग और धुएं के बीच फंसी महिला अर्चना ने हिम्मत नहीं हारी। उसने सबसे पहले अपने एक साल के बच्चे को चादर में लपेटा और सामने वाले मकान की छत पर खड़े पड़ोसियों की ओर बढ़ा दिया। करीब 12 फीट की दूरी पर मौजूद पड़ोसियों ने जोखिम उठाकर बच्चे को सुरक्षित पकड़ लिया।
इसके बाद पड़ोसियों ने दोनों मकानों की छतों के बीच एक सीढ़ी लगाई। अर्चना ने उसी सीढ़ी के सहारे अपनी 13 वर्षीय और 10 वर्षीय बेटियों को एक-एक कर दूसरी छत तक पहुंचाया। फिर उसने अपने भतीजे को भी सुरक्षित बाहर निकाल दिया।
परिवार के बच्चों को बचाने के दौरान आग और ज्यादा भड़क चुकी थी। चारों तरफ धुआं फैल गया था और छत तक तेज लपटें पहुंचने लगी थीं। इसी बीच अर्चना धुएं की चपेट में आ गई। दम घुटने और आग से झुलसने के कारण वह बेहोश हो गई।

अस्पताल में टूटी जिंदगी की डोर
मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने काफी मशक्कत के बाद महिला को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक वह गंभीर रूप से झुलस चुकी थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बड़ी बेटी भी आग से झुलस गई है और उसका इलाज आईसीयू में चल रहा है। वहीं, परिवार की दूसरी महिला सरिता ने जान बचाने के लिए पहली मंजिल से छलांग लगा दी, जिससे उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया।
कई घंटों तक चला राहत अभियान
आग इतनी विकराल थी कि उसे बुझाने के लिए दमकल विभाग की करीब 12 गाड़ियां लगानी पड़ीं। फायर ब्रिगेड कर्मियों ने तड़के लगभग 4 बजे आग पर पूरी तरह काबू पाया। राहत टीम के अधिकारियों के मुताबिक, संकरी गलियों और गोदाम में रखे ज्वलनशील सामान के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। यदि समय रहते आसपास के मकानों को खाली न कराया जाता, तो हादसा और बड़ा हो सकता था।
पूरे इलाके में शोक की लहर
घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। स्थानीय लोग अर्चना की बहादुरी की चर्चा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि एक मां ने अपने बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए खुद को मौत के हवाले कर दिया। सोशल मीडिया पर भी इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोग महिला के साहस को सलाम कर रहे हैं। कई लोगों ने प्रशासन से परिवार की आर्थिक सहायता और बच्चों की बेहतर चिकित्सा की मांग की है।
