वाराणसी–लखनऊ हाईवे पर सफर होगा तेज़, जाम वाले बाजारों पर एनएचएआई की नजर

वाराणसी–लखनऊ हाईवे पर सफर होगा तेज़, जाम वाले बाजारों पर एनएचएआई की नजर

300 किमी लंबे एनएच-56 मार्ग पर ट्रैफिक बाधाओं को कम करने की तैयारी, फ्लाइओवर और बाईपास का हो सकता है निर्माण

वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी से लखनऊ के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। एनएचएआई ने इस व्यस्त 300 किलोमीटर लंबे फोर लेन मार्ग पर ट्रैफिक बाधाओं को कम करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इस मार्ग पर स्थित कई घनी आबादी वाले बाजारों में लगने वाले जाम के कारण यात्रा समय प्रभावित होता है, जिसे सुधारने के लिए विस्तृत सर्वे की योजना बनाई गई है।

सूत्रों के अनुसार, एनएच-56 पर वाराणसी से सुल्तानपुर होते हुए लखनऊ तक के हिस्से में कई ऐसे स्थान हैं जहां सड़क किनारे बाजारों के कारण दिनभर वाहनों की रफ्तार धीमी रहती है। सामान्यतः यह सफर चार से पांच घंटे में पूरा होता है, लेकिन भीड़भाड़ के चलते इसमें अतिरिक्त समय लग जाता है।

इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सर्वे का जिम्मा एक कंसल्टेंसी एजेंसी को सौंपा है। सर्वे का उद्देश्य उन स्थानों की पहचान करना है जहां फ्लाइओवर, अंडरपास या बाईपास बनाकर यातायात को सुगम किया जा सके।

जानकारी के मुताबिक, सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और सर्वे कार्य इसी महीने शुरू होने की संभावना है। इससे पहले चरण में उन क्षेत्रों को चिन्हित किया जाएगा जहां जाम की समस्या सबसे अधिक गंभीर है।

वाराणसी से लखनऊ के बीच कुल 11 प्रमुख बाजार ऐसे हैं जहां लगातार भीड़ बनी रहती है और अक्सर ट्रैफिक बाधित होता है। इनमें वाराणसी क्षेत्र के काजीसराय और बाबतपुर, जौनपुर के जलालपुर और सिरकोनी, सुल्तानपुर के पयागीपुर, कामतागंज, उतेलवां और कमरौली, अमेठी का इन्हौना तथा लखनऊ के हैदरगढ़ और गोसाईंगंज क्षेत्र शामिल हैं।

इन इलाकों में सड़क पर बढ़ते दबाव को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैकल्पिक मार्ग और ढांचागत सुधार किए जाते हैं तो यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आ सकती है और यातायात अधिक सुचारु हो सकेगा।

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