(रणभेरी): कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले की जांच के दौरान पुलिस के हाथ तीन अहम वीडियो लगे हैं, जिन्होंने इस पूरे काले कारोबार की भयावह सच्चाई उजागर कर दी है। ये वीडियो मुख्य आरोपी दलाल शिवम अग्रवाल के मोबाइल फोन से बरामद हुए हैं। साथ ही कुछ चैट भी सामने आई हैं, जो इस संगठित नेटवर्क की गहराई को दिखाती हैं।
नोटों पर लेटा डॉक्टर, लाखों की नकदी का प्रदर्शन
पहले वीडियो में एक डॉक्टर, जिसे अफजल बताया जा रहा है, नोटों की गड्डियों पर लेटा हुआ दिखाई देता है। बेड पर करीब 15 लाख रुपये बिछे हुए हैं। वीडियो में एक अन्य व्यक्ति भी नजर आता है, जो इसे रिकॉर्ड कर रहा है। जांच में उसकी पहचान अस्पताल से जुड़े व्यक्ति के रूप में हुई है। इस दृश्य ने अवैध ट्रांसप्लांट से कमाए जा रहे भारी मुनाफे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विदेशी मरीज का वीडियो, दलाल करता दिखा ‘चेकअप’
दूसरे वीडियो में दक्षिण अफ्रीका की एक महिला मरीज रोती हुई नजर आती है। बताया जा रहा है कि उसने दिसंबर 2025 में कानपुर के एक निजी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट कराया था। वीडियो में एंबुलेंस ड्राइवर और दलाल शिवम अग्रवाल स्टेथोस्कोप लगाकर उसका चेकअप करता दिखता है और इंजेक्शन देने की बात करता है।
यह दृश्य बेहद चौंकाने वाला है, क्योंकि एक गैर-चिकित्सकीय व्यक्ति मरीज की जांच करता नजर आ रहा है।

पीड़ित की गुहार: “43 लाख दिए, अब जीने का सहारा नहीं”
तीसरे वीडियो में पंजाब का एक मरीज अस्पताल के बाहर अपनी आपबीती सुनाता है। वह बताता है कि किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर उससे 43 लाख रुपये लिए गए, लेकिन उसे इलाज नहीं मिला। आर्थिक बोझ और धोखाधड़ी से परेशान होकर उसने आत्महत्या तक की बात कही।

नेपाल तक फैला नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि यह रैकेट अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है। नेपाल के एक युवक की किडनी खरीदने और बेचने के सबूत मिले हैं। बताया जा रहा है कि उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए फंसाया गया और बेहद कम रकम में सौदा किया गया। पुलिस टीम इस कड़ी की जांच के लिए नेपाल तक पहुंची है।
कई आरोपी गिरफ्तार, कई फरार
अब तक इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि कुछ डॉक्टर और अन्य आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस की कई टीमें अलग-अलग शहरों में लगातार छापेमारी कर रही हैं।
जांच में जुटी कई टीमें
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे मामले की जांच के लिए कई टीमें बनाई गई हैं, जो अलग-अलग राज्यों में जाकर आरोपियों की तलाश कर रही हैं। सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल सबूतों के आधार पर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
