झांसी में दर्दनाक मामला: मां की मौत के बाद एक महीने की मासूम जेल में रहने को मजबूर

झांसी में दर्दनाक मामला: मां की मौत के बाद एक महीने की मासूम जेल में रहने को मजबूर

(रणभेरी): शहर के प्रेमनगर थाना क्षेत्र से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक महीने की मासूम बच्ची को हालात के चलते अपने पिता और दादी के साथ जेल में रहना पड़ रहा है। मां की संदिग्ध मौत के बाद पुलिस ने पिता और दादी को गिरफ्तार कर लिया, जिससे बच्ची की देखभाल करने वाला कोई अन्य नहीं बचा।

बाथरूम में संदिग्ध हालात में मिला महिला का शव

हंसारी स्थित सारंद्रा नगर निवासी 24 वर्षीय मोनिका की शादी लगभग दस महीने पहले जालौन जिले के कोंच निवासी संदीप सविता से हुई थी। परिवार के अनुसार, करीब एक महीने पहले ही मोनिका ने एक बेटी को जन्म दिया था। शनिवार को मोनिका बाथरूम में गई, लेकिन काफी देर तक बाहर नहीं आई। जब उसकी सास ने दरवाजा खटखटाया और कोई जवाब नहीं मिला, तो नीचे से झांककर देखा गया। अंदर मोनिका दुपट्टे के सहारे लटकी हुई थी। दरवाजा तोड़कर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मायके पक्ष ने लगाया हत्या का आरोप

मोनिका के मायके वालों ने इसे आत्महत्या नहीं, बल्कि दहेज हत्या बताया है। भाई का आरोप है कि शादी के बाद से ही मोनिका को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। परिवार का कहना है कि मोटरसाइकिल और अन्य सामान की मांग को लेकर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था।

परिजनों के मुताबिक, घटना से एक दिन पहले ही मोनिका से फोन पर बातचीत हुई थी और उस समय सब सामान्य लग रहा था। अचानक अगले दिन उसकी मौत की खबर मिलना संदेह पैदा करता है।

झांसी में दर्दनाक मामला: मां की मौत के बाद एक महीने की मासूम जेल में रहने को मजबूर

पुलिस ने पति और सास को किया गिरफ्तार

मायके पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए 5 अप्रैल को पति संदीप सविता और सास गायत्री देवी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

थाना प्रभारी ने बताया कि गिरफ्तारी के समय बच्ची की देखभाल के लिए कोई अन्य जिम्मेदार व्यक्ति उपलब्ध नहीं था। ऐसे में बच्ची को उसके पिता और दादी के साथ ही रहने दिया गया है। जेल प्रशासन की ओर से बच्चे के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

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कानून के तहत बच्चों को मिलती है अनुमति

जेल प्रशासन के अनुसार, यदि किसी बंदी के साथ छह साल से कम उम्र का बच्चा है और उसकी देखभाल के लिए बाहर कोई व्यवस्था नहीं है, तो बच्चे को जेल में साथ रखने की अनुमति दी जाती है। छह साल की उम्र के बाद इस संबंध में समिति निर्णय लेती है।

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