माघ पूर्णिमा पर काशी में आस्था का महासागर

माघ पूर्णिमा पर काशी में आस्था का महासागर

गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब, गंगा स्नान के लिए घाट-घाट उमड़ी भीड़, प्रशासन अलर्ट
पौष पूर्णिमा का विशेष महत्व, काशी-प्रयागराज का दुर्लभ संयोग
अर्धकुंभ के पलट प्रवाह से बढ़ेगी भीड़, कल से रेला तेज

वाराणसी (रणभेरी): माघ मेले के अंतर्गत माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर काशी में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। शनिवार को तड़के से ही गंगा स्नान के लिए लाखों श्रद्धालु वाराणसी पहुंचने लगे। दशाश्वमेध, अस्सी, मणिकर्णिका, राजघाट सहित प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। हर-हर गंगे और बम-बम भोले के जयकारों से घाटों का वातावरण भक्तिमय बना रहा।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। गंगा घाटों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल, पीएसी और जल पुलिस की तैनाती की गई है। भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग की गई, वहीं घाटों पर गोताखोरों की टीम भी मुस्तैद रही। किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से निपटने के लिए वरिष्ठ अधिकारी लगातार भ्रमण करते रहे, ताकि श्रद्धालुओं को स्नान और पूजा-पाठ में किसी तरह की असुविधा न हो। गंगा घाट के तीर्थ पुरोहित राजू तिवारी ने बताया कि आज पौष पूर्णिमा का स्नान है और पौष मास का अंतिम दिन भी। शास्त्रों में पौष पूर्णिमा के स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। उन्होंने कहा कि काशी और प्रयागराज, दोनों ही स्थानों पर इस दिन गंगा स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

माघ पूर्णिमा पर काशी में आस्था का महासागर

आज से प्रयागराज में माघ मेले का शुभारंभ भी हो गया है, जिसके चलते देशभर से श्रद्धालु संगम और काशी की ओर रुख कर रहे हैं। राजू तिवारी के अनुसार, जो श्रद्धालु प्रयागराज में माघ मेले का स्नान कर काशी आकर गंगा स्नान और श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन-पूजन करते हैं, उनके जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पौष पूर्णिमा से लेकर माघी पूर्णिमा तक का पूरा एक महीना स्नान, दान और ध्यान के लिए अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि आज प्रयागराज में स्नान का पहला दिन होने के कारण काशी में अपेक्षाकृत कम भीड़ रही, लेकिन कल से श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से वृद्धि होगी। अर्धकुंभ के पलट प्रवाह के चलते आने वाले दिनों में लाखों श्रद्धालु वाराणसी पहुंचेंगे और गंगा स्नान के साथ बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

स्नान से मिलती है मोक्ष

धार्मिक मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान से मोक्ष की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मिक शांति मिलती है। इसी विश्वास के चलते सूर्योदय से पहले ही श्रद्धालु घाटों पर पहुंच गए और मंत्रोच्चार के साथ स्नान किया। स्नान के पश्चात घाटों पर विशेष यज्ञ, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।

माघ पूर्णिमा पर काशी में आस्था का महासागर

दान में तिन देने का विधान

गंगा स्नान के बाद दान-पुण्य की परंपरा भी निभाई गई। श्रद्धालुओं ने अन्न, वस्त्र, धन और तिल का दान किया, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। दशाश्वमेध घाट पर विशेष भंडारों का आयोजन किया गया, जहां साधु-संतों और जरूरतमंदों को भोजन कराया गया। इस दिन भगवान विष्णु और सूर्यदेव की पूजा का भी विशेष महत्व है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला।

जल-पुलिस और एनडीआरएफ रही मुस्तैद

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। गंगा घाटों पर पुलिस बल की तैनाती की गई, वहीं एनडीआरएफ और जल पुलिस की टीमें गंगा में लगातार गश्त करती रहीं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। प्रशासन की मुस्तैदी के चलते स्नान पर्व शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

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