वाराणसी (रणभेरी) : ईद-उल-अज़हा से ठीक पहले वाराणसी के बेनियाबाग क्षेत्र में संचालित अस्थायी बकरा मंडी पर सोमवार को प्रशासन ने अचानक बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे बंद करा दिया। नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरी मंडी खाली कराई और मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया। इस दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती रही, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, इस मंडी को सीमित अवधि के लिए संचालन की अनुमति दी गई थी, लेकिन बाद में इसे निरस्त कर दिया गया। इसी के तहत प्रशासनिक टीम ने कार्रवाई करते हुए वहां चल रहे पशु व्यापार को तुरंत प्रभाव से रोक दिया और सभी व्यापारियों को परिसर खाली करने का निर्देश दिया।
अचानक हुई इस कार्रवाई से मंडी में मौजूद सैकड़ों व्यापारी, पशुपालक और किसान बुरी तरह प्रभावित हुए। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे इटावा, एटा, मैनपुरी, प्रयागराज, जौनपुर, गोरखपुर, मऊ, गाजीपुर, भदोही, सोनभद्र समेत कई जगहों से व्यापारी बड़ी संख्या में बकरे लेकर वाराणसी पहुंचे थे। व्यापारियों का कहना है कि उन्हें पहले से किसी भी तरह की बंदी की सूचना नहीं दी गई, जिससे उनका भारी नुकसान तय माना जा रहा है।

मंडी में मौजूद व्यापारियों के अनुसार, इस समय करीब 250 से अधिक कारोबारी अपने पशुओं के साथ वहां मौजूद थे और कई लाख रुपये का कारोबार दांव पर लगा हुआ था। अचानक एक घंटे के भीतर जगह खाली करने का अल्टीमेटम दिए जाने से व्यापारी बेहद परेशान नजर आए।
व्यापारियों ने आरोप लगाया कि वे बकरीद जैसे बड़े त्योहार के मद्देनजर दूर-दराज से लोन लेकर और पूंजी लगाकर पशु खरीदकर लाए थे, लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना के मंडी बंद कर देना उनके साथ अन्याय है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन पहले से वैकल्पिक व्यवस्था करता तो उन्हें इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
मंडी का संचालन करने वाले ठेकेदारों ने भी प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि स्मार्ट सिटी के माध्यम से करीब 22 लाख रुपये के टेंडर पर मंडी का संचालन उन्हें सौंपा गया था, लेकिन अचानक मंडी बंद करने का निर्णय बिना किसी स्पष्ट कारण के लिया गया, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

कुछ व्यापारियों ने यह भी बताया कि मंडी में एक जानवर की बिक्री पर लगभग 500 रुपये शुल्क लिया जाता था और कई व्यापारियों ने अग्रिम भुगतान भी कर रखा था। अब मंडी बंद होने के बाद न तो उन्हें आगे व्यापार करने का अवसर मिल रहा है और न ही धन वापसी को लेकर कोई स्पष्ट स्थिति बन पा रही है।
व्यापारियों में नाराजगी इस कदर है कि कई लोगों ने कहा कि यदि उन्हें समय रहते सूचना मिल जाती तो वे अपने पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाते। गर्मी और परिवहन की समस्या के बीच अब पशुओं के खराब होने का भी खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय व्यापारियों और पशुपालकों ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें कम से कम दो दिन का समय दिया जाए ताकि वे अपने पशुओं को सुरक्षित रूप से अन्य स्थानों पर ले जा सकें या बिक्री पूरी कर सकें। साथ ही उन्होंने भविष्य में ऐसी स्थिति न बनने देने के लिए स्थायी समाधान और वैकल्पिक मंडी स्थल की मांग भी उठाई है।
फिलहाल, प्रशासन की ओर से मंडी बंद करने के पीछे कोई विस्तृत आधिकारिक कारण स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण बनी हुई है।
