राग-रंग-रचनात्मकता की त्रिवेणी में डूबी महामना की बगिया

राग-रंग-रचनात्मकता की त्रिवेणी में डूबी महामना की बगिया
  • ‘स्पंदन–2026’ में दिखा मिनी इंडिया का रंग, शास्त्रीय सुरों से सजा सभागार
  • लोक-नृत्यों की थाप पर थिरका एम्फीथिएटर, मूक अभिनय और लघु नाटकों ने उठाए सामाजिक सवाल
  • कैनवस पर उतरी काशी की विरासत, बनारसी ट्रैफिक से घाटों तक दिखी रचनात्मकता

वाराणसी (रणभेरी): काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) का वार्षिक अंतर-संकाय सांस्कृतिक महोत्सव ‘स्पंदन–2026’ सोमवार को अपने तीसरे दिन राग, रंग और रचनात्मकता की त्रिवेणी में सराबोर नजर आया। परिसर का माहौल ऐसा था मानो पूरे देश की सांस्कृतिक आत्मा एक साथ धड़क रही हो। पं. ओंकारनाथ ठाकुर सभागार से लेकर एम्फीथिएटर मैदान और
स्वतंत्रता भवन तक हर मंच कला के विविध रंगों से सजा रहा। पं. ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में आयोजित शास्त्रीय एकल गायन प्रतियोगिता ने दिन की शुरुआत गंभीर और साधनापूर्ण वातावरण में की।

डॉ. प्रेम किशोर मिश्रा के मार्गदर्शन में 15 प्रतिभागियों ने राग यमन, मिश्र खमाज, मधुवंती और भैरव की प्रस्तुति दी। तबला, तानपुरा और हारमोनियम की संगत में गूंजते तरानों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। निर्णायकों ने स्वर की शुद्धता, लय की पकड़ और राग की प्रस्तुति के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया। कई प्रस्तुतियां ऐसी रहीं, जिनमें परंपरा और नवाचार का संतुलन स्पष्ट दिखा।

दूसरी ओर, एम्फीथिएटर मैदान में लोक-नृत्य प्रतियोगिता ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की। प्रो. सीमा तिवारी के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रांतों की सांस्कृतिक झलक दिखी। प्रदर्शन कला संकाय ने बिहार का मुखौटा नृत्य, एसवीडीवी ने बंगाल का संथाली, कला संकाय ने ओडिशा का संबलपुरी, वसंत कन्या महाविद्यालय ने पंजाब का गिद्धा और शिक्षा संकाय ने कश्मीर का धुमहाल प्रस्तुत किया।

महिला महाविद्यालय ने गुजरात का गरबा पेश कर नारी सशक्तीकरण का संदेश दिया। राजीव गांधी साउथ कैंपस की ओर से केरल के थेय्यम की अलौकिक प्रस्तुति ने दर्शकों को स्तब्ध कर दिया। वेशभूषा, मेकअप और आध्यात्मिक भाव-भंगिमाओं ने प्रस्तुति को विशेष ऊंचाई दी। सांस्कृतिक रंगों के साथ सामाजिक चेतना का स्वर भी उतना ही मुखर रहा। शताब्दी भवन में आयोजित ‘एक्सप्रेशन’ प्रतियोगिता में 11 टीमों ने अधूरी जानकारी, वसुधैव कुटुंबकम, मोबाइल की लत और ‘जल ही जीवन’ जैसे विषयों पर प्रस्तुति दी। एक टीम ने सम्राट अकबर को शासन के बजाय ‘रील’ बनाते हुए दिखाकर आधुनिक दौर की डिजिटल लत पर करारा व्यंग्य किया। ट्रांसजेंडर समुदाय की सामाजिक स्वीकृति जैसे गंभीर विषयों को भी संवेदनशीलता के साथ मंचित किया गया।

केएन उडुपा सभागार में माइम (मूक अभिनय) प्रतियोगिता में 13 टीमों ने बिना संवाद के प्रभावी संदेश दिए। रानी दुर्गावती के शौर्य, विष्णु के दशावतार और ‘सेव नेचर’ जैसे विषयों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। स्वतंत्रता भवन में आयोजित लघु नाटक प्रतियोगिता दिन का मुख्य आकर्षण रही। सामाजिक विज्ञान संकाय ने ‘भ्रष्टाचार’ पर तीखा प्रहार किया, जबकि वाणिज्य संकाय ने ‘अंधा वोट’ के माध्यम से चुनावी कुरीतियों को उजागर किया। दृश्य कला संकाय का ‘रूप कंवर’ नाटक सती प्रथा की त्रासदी को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करता नजर आया। ‘सदाचार का तावीज’ के जरिए नैतिक मूल्यों की आवश्यकता पर बल दिया गया। मिमिक्री प्रतियोगिता ने गंभीर माहौल के बीच ठहाकों की फुहार भी बिखेरी। थ्री ईडियट्स के पात्र वीरू सहस्त्रबुद्धे (वायरस) की मिमिक्री ने सबसे ज्यादा तालियां बटोरीं।

प्रतिभागियों ने आमिर खान और नेहा कक्कड़ समेत कई चर्चित हस्तियों की आवाज की नकल कर अपनी स्वर-वैविध्यता का परिचय दिया। दृश्य कला संकाय के प्रदर्शनी हाल में कार्टूनिंग, स्केचिंग और रंगोली प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने काशी की आत्मा को कैनवस पर उतारा। डॉ. जसमिंदर कौर के समन्वय में आयोजित कार्टूनिंग प्रतियोगिता में ‘बनारस की होली’, ‘बनारस का ट्रैफिक’ और ‘रेल का जनरल डब्बा’ जैसे विषयों पर 16 प्रतिभागियों ने व्यंग्यात्मक चित्र बनाए। तंग गलियों की जाम स्थिति और जनरल डिब्बे की भीड़ को छात्रों ने सटीक रेखाओं और तीखे हास्य के साथ उकेरा।
स्केचिंग प्रतियोगिता में 19 प्रतिभागियों ने वाराणसी की सांस्कृतिक धरोहर को पेंसिल और चारकोल से जीवंत किया। घाटों की स्थापत्य शैली, गंगा तट की आध्यात्मिक आभा और दैनिक जीवन की झलक चित्रों में साफ दिखी।

‘स्पंदन–2026’ का तीसरा दिन यह संदेश देकर गया कि बीएचयू केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि विविधता में एकता की जीवंत प्रयोगशाला है। रागों की गंभीरता, लोक-नृत्यों की ऊर्जा और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी प्रस्तुतियों ने साबित कर दिया कि यहां का युवा वर्ग परंपरा और परिवर्तन, दोनों का संतुलन साधने में सक्षम है।

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