इस्तीफे के बाद काशी पहुंचे अलंकार अग्निहोत्री, शंकराचार्य से मुलाकात; बोले– SC-ST एक्ट के खिलाफ 7 फरवरी से आंदोलन

इस्तीफे के बाद काशी पहुंचे अलंकार अग्निहोत्री, शंकराचार्य से मुलाकात; बोले– SC-ST एक्ट के खिलाफ 7 फरवरी से आंदोलन

वाराणसी (रणभेरी): बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने रविवार की शाम केदारघाट स्थित विद्या मठ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भेंट किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि परिस्थितियों का स्वाभाविक संयोग है।

अग्निहोत्री ने बताया कि शंकराचार्य से सामाजिक हालात, प्रशासनिक दबाव और मौजूदा नीतिगत परिस्थितियों पर विस्तार से संवाद हुआ। उन्होंने कहा कि इससे पहले प्रयागराज में आमंत्रण मिला था, लेकिन व्यस्तता के चलते वे वहां नहीं पहुंच सके। शंकराचार्य के काशी आगमन पर यह अवसर स्वाभाविक रूप से मिल गया।

उन्होंने काशी से अपने भावनात्मक जुड़ाव का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्होंने आईआईटी बीएचयू से शिक्षा प्राप्त की है, इसलिए यह नगर उनके लिए केवल कार्यस्थल नहीं बल्कि स्मृतियों और संस्कारों से जुड़ा हुआ स्थान है।

एससी-एसटी एक्ट पर तीखा हमला

मीडिया से बातचीत के दौरान अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। विशेष रूप से एससी-एसटी एक्ट को लेकर उन्होंने कहा कि यह कानून समाज में बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का शिकार हुआ है। उनका दावा था कि इस अधिनियम के तहत दर्ज अधिकांश मामलों में सच्चाई के बजाय दबाव और प्रताड़ना का तत्व अधिक दिखाई देता है, जिससे समाज का एक बड़ा वर्ग मानसिक, सामाजिक और आर्थिक संकट झेल रहा है।

छह फरवरी की चेतावनी

उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए नियमों पर फिलहाल रोक लगना राहत की बात है, लेकिन असली मुद्दा एससी-एसटी एक्ट का भविष्य है। अग्निहोत्री ने दो टूक कहा कि यदि छह फरवरी तक इस कानून को वापस नहीं लिया गया, तो इसके खिलाफ देशव्यापी संघर्ष तेज किया जाएगा। उन्होंने आक्रामक लहजे में कहा कि केंद्र सरकार को सत्ता से हटाने तक आंदोलन जारी रहेगा।

केंद्र बनाम राज्य की बहस

जब उनसे पूछा गया कि पहले राज्य सरकार से टकराव की बात सामने आई थी और अब केंद्र सरकार को निशाना क्यों बनाया जा रहा है, तो उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई कभी राज्य प्रशासन से नहीं रही। उनके अनुसार असली निर्णय और दबाव केंद्र स्तर से आ रहा है, जिसके चलते राज्य प्रशासन अत्यधिक तनाव में काम कर रहा है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि केंद्र सरकार राज्य के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है और प्रशासनिक तंत्र को अस्थिर करने की कोशिशें की जा रही हैं।

इस्तीफे के बाद लगातार चर्चा में

प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के पवित्र स्नान से जुड़े विवाद के बाद पद से इस्तीफा देने के बाद से अलंकार अग्निहोत्री लगातार सुर्खियों में हैं। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा और उसके प्रतीकों का अपमान उन्हें स्वीकार नहीं था, इसी कारण उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।

जाति आधारित नीतियों पर चेतावनी

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी के नए रेगुलेशन पर रोक लगाए जाने के बाद अग्निहोत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में जाति आधारित प्रावधानों का संस्थागत दुरुपयोग गंभीर सामाजिक परिणाम पैदा कर सकता है। उन्होंने चेताया कि यदि ऐसे मुद्दों को संतुलित और संवेदनशील तरीके से नहीं संभाला गया, तो देश में आंतरिक असंतोष बढ़ सकता है। न्यूज एजेंसी से बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि जाति आधारित भेदभाव को किसी भी स्थिति में प्रशासनिक हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि इसे संवाद और सुधार की प्रक्रिया तक ही सीमित रखा जाना चाहिए।

Share this news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *