वाराणसी (रणभेरी): काशी के नमो घाट पर आयोजित एयर शो के पहले दिन आसमान में विमानों की गर्जना गूंजी तो गंगा की लहरों के बीच देशभक्ति का अनूठा नजारा भी देखने को मिला। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की दमदार आवाज, देशभक्ति से ओतप्रोत गीतों और कथक नृत्यांगनाओं की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने आयोजन में चार चांद लगा दिए। घाट पर मौजूद दर्शक जहां आसमान में विमानों के करतब देखकर रोमांचित नजर आए, वहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उनके भीतर राष्ट्रप्रेम का जज्बा और प्रबल कर दिया।
अमिताभ बच्चन की आवाज पर कथक की भावपूर्ण प्रस्तुति
एयर शो के दौरान जब अमिताभ बच्चन की आवाज में देश की मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास को बयां करते बोल गूंजे, तो पूरा माहौल देशभक्ति के रंग में रंग गया।

‘मेहनत-मशक्कत, खुद पर यकीन, यही है सुनहरा समाज… हवा में हुनर है, जमीं को, फलक को हुआ तब गुमान, जब लिखा चांद पर हमने जय हिंदुस्तान’ जैसे ओजपूर्ण बोलों पर कथक नृत्यांगनाओं ने भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। संगीत, नृत्य और महानायक की आवाज के संगम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुति के जरिए देश की उपलब्धियों, आत्मविश्वास और गौरवशाली पहचान को प्रभावी अंदाज में दर्शाया गया।
देशभक्ति के गीतों ने बढ़ाया आयोजन का उत्साह
कार्यक्रम के दौरान ‘तेरा हिमालय आकाश छू ले, बहती रहे तेरी गंगा, ऊंचा हो इतना बुलंद हो, तारों को चूमे तिरंगा…’ जैसे देशभक्ति से ओतप्रोत गीतों ने माहौल को और भी भावुक व उत्साहपूर्ण बना दिया। ‘मां से है माटी, मां से है माथा, माथे पे माटी सजा के चले…’ जैसे बोलों पर नृत्यांगनाओं की प्रस्तुति ने मातृभूमि के प्रति समर्पण और गौरव की भावना को जीवंत कर दिया। गंगा तट पर कथक की लय, गीतों के सुर और तिरंगे के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति ने काशी की सांस्कृतिक विरासत के साथ राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।
विमानों की गर्जना के बीच गूंजते रहे देशभक्ति के तराने
नमो घाट पर एक ओर आसमान में विमानों की गर्जना और उनके करतब दर्शकों का रोमांच बढ़ा रहे थे, तो दूसरी ओर घाट परिसर में लगातार बज रहे देशभक्ति के गीत और उद्घोष कार्यक्रम में जोश भर रहे थे। दर्शकों का उत्साह देखते ही बन रहा था। आसमान में विमानों की उड़ान और गंगा तट पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को यादगार बना दिया।
एयर शो के दौरान तकनीकी कौशल, देश की सामर्थ्य और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का ऐसा संगम नजर आया, जिसने नमो घाट को राष्ट्रप्रेम के उत्सव में बदल दिया। गंगा की लहरों के किनारे गूंजते देशभक्ति के तरानों और आसमान में विमानों की गर्जना ने काशी में देश के गौरव और सामर्थ्य की एक प्रभावशाली तस्वीर पेश की।
