- सैकड़ों जिंदगियां बर्बाद करके बनायी जा रही करोड़ों की बेनामी संपत्ति
- क्या अपराधिक गतिविधियों के जरिये बनायी गयी संपत्ति पर चलेगा बाबा का बुलडोज़र ?
- प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में संगठित जुआ नेटवर्क, करोड़ों के दांव और संपत्तियों में निवेश के दावे !
वाराणसी (रणभेरी/विशेष संवाददाता)। कानून की नजर में हर नागरिक बराबर है। लेकिन जब किसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध जुआ संचालन के आरोप सामने आएं, लाखों-करोड़ों रुपये के लेन-देन की चर्चा हो और उसी कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों द्वारा महंगी संपत्तियां अर्जित किए जाने की सूचनाएं सामने आने लगें, तो सवाल केवल जुए के अड्डों तक सीमित नहीं रहता। सवाल उस धन का हो जाता है, जो कथित तौर पर इस कारोबार से पैदा हो रहा है।
सवाल यह भी है कि यदि अवैध गतिविधियों से अर्जित धन को जमीन, मकान और दूसरी संपत्तियों में लगाया गया है, तो उसकी जांच का जिम्मा किसका है?
रणभेरी न्यूज़ की पिछली दो कड़ियों में वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र में कथित जुआ संचालन, ‘पीडीए’ नाम से चर्चित कोड और बड़े बुकरों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए थे। सूत्रों के दावों में पुल्लू यादव, दीपक यादव और अन्नू यादव के नाम भी सामने आए। अब इस कथित नेटवर्क से जुड़ी संपत्तियों और धन के स्रोत को लेकर एक नया सवाल उठ रहा है। प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, राजघाट से मैदागिन के बीच कई संपत्तियों में निवेश किए जाने और कुछ संपत्तियों के बेनामी होने के दावे किए जा रहे हैं।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि, संपत्तियों के दस्तावेजों की जांच और संबंधित व्यक्तियों का पक्ष सामने आना अभी आवश्यक है। लेकिन यदि इन सूचनाओं में तथ्य हैं, तो उनकी जांच होना भी उतना ही जरूरी है। आखिर किसी संपत्ति की खरीद के लिए इस्तेमाल की गई रकम कहां से आई? क्या उसकी खरीद और घोषित आय के बीच कोई असंगति है? क्या किसी संपत्ति का वास्तविक लाभार्थी उसके दस्तावेजों में दर्ज व्यक्ति से अलग है? इन सवालों का जवाब आरोपों से नहीं, बल्कि दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच से मिलना चाहिए।
जुए के अड्डे से संपत्ति तक-धन के स्रोत की जांच क्यों जरूरी?
किसी भी कारोबार में संपत्ति अर्जित करना अपने आप में अपराध नहीं है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ अवैध जुआ संचालन से जुड़ी विश्वसनीय शिकायतें हैं और साथ ही उसकी संपत्तियों के स्रोत पर भी सवाल उठ रहे हैं, तो जांच एजेंसियों के लिए इन दोनों पहलुओं की पड़ताल करना उचित होगा।
रणभेरी की पिछली रिपोर्टों में दावा किया गया था कि आदमपुर क्षेत्र में कथित जुआ सत्र अलग-अलग स्थानों पर आयोजित किए जाते हैं। बड़े बुकरों, नकदी के लेन-देन और संचालन के लिए कथित तौर पर अलग-अलग जिम्मेदारियां तय होने की बात भी सामने आई थी। यदि इस व्यवस्था के पीछे संगठित आर्थिक गतिविधि के प्रमाण मिलते हैं, तो जांच केवल मौके पर जुआ खेलते लोगों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह भी देखा जाना चाहिए कि खेल का संचालन कौन कर रहा था, रकम किसके पास पहुंचती थी और उससे आगे धन का इस्तेमाल किस प्रकार हुआ। क्या संपत्तियों की खरीद के लिए इस्तेमाल हुई रकम का कोई वैध स्रोत है? क्या खरीददारों की घोषित आय उन संपत्तियों के मूल्य के अनुरूप है? क्या किसी प्रकार के संदिग्ध लेन-देन के दस्तावेज मौजूद हैं? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनकी पुष्टि सक्षम एजेंसी ही कर सकती है।

राजघाट से मच्छोदरी तक दर्जनों संपत्तियों के दावे, दस्तावेजों की जांच कब?
प्राप्त सूचनाओं में राजघाट से मच्छोदरी के बीच पुल्लू यादव, दीपक यादव उर्फ़ कल्लू तथा अन्नू यादव ने दर्जनों महंगी संपत्तियों में निवेश किया है। कुछ संपत्तियों को बेनामी बताए जाने की बात भी सामने आई है। यदि किसी संपत्ति का वास्तविक लाभार्थी छिपाया गया है या उसे अवैध धन के निवेश के लिए इस्तेमाल किए जाने के प्रमाण मिलते हैं, तो सक्षम एजेंसियां कानून के तहत जांच कर सकती हैं। आयकर विभाग अथवा अन्य एजेंसियों की भूमिका मामले के तथ्यों, संबंधित अपराध और उनके कानूनी अधिकार क्षेत्र पर निर्भर करेगी।
कानून क्या कहता है
अवैध कमाई और बेनामी संपत्ति में फर्क समझना होगा
जुआ संचालन से संबंधित अपराधों पर लागू कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। उत्तर प्रदेश में लागू जुआ-निरोधक कानूनों के तहत परिस्थितियों और साक्ष्यों के आधार पर संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी तय हो सकती है। हालांकि, हर प्रकार के जुए, हर स्थान और हर परिस्थिति पर एक ही कानूनी प्रावधान लागू मान लेना उचित नहीं होगा। इसी तरह, बेनामी संपत्ति लेन-देन निषेध अधिनियम के तहत किसी संपत्ति को बेनामी मानने के लिए कानून में निर्धारित शर्तों और अपवादों की जांच करनी होती है। यदि वैधानिक जांच में बेनामी लेन-देन साबित होता है, तो संबंधित संपत्ति पर कानून के अनुरूप कार्रवाई संभव है।
यदि किसी अपराध से अर्जित धन को संपत्तियों में निवेश किए जाने के प्रमाण मिलते हैं, तो अन्य वित्तीय कानूनों के तहत जांच की संभावना भी तथ्यों पर निर्भर करेगी। रणभेरी के सूत्रों ने दावा किया है कि राजघाट से मच्छोदरी के बीच पुल्लू यादव, दीपक यादव उर्फ़ कल्लू तथा अन्नू यादव ने दर्जनों महंगी संपत्तियों में निवेश किया है। पुलिस के संरक्षण में इन लोगों ने राजघाट से मच्छोदरी के बीच दर्जनों मुहल्लों में 4 दर्जन से ज्यादा महंगे एवं बड़े घर-मकान खरीदे है जिसमे से कई बेनामी है। अब देखना यह होगा कि पुल्लू यादव, दीपक यादव उर्फ़ कल्लू तथा अन्नू यादव ने दर्जनों महंगी संपत्तियों पर सूबे के तेज तर्रार मुख्यमंत्री का बुल्डोजर कब चलता है?
योगी सरकार के दावे और जमीनी कार्रवाई- कसौटी पर जवाबदेही
उत्तर प्रदेश सरकार अपराध नियंत्रण और अवैध गतिविधियों के विरुद्ध कार्रवाई की नीति की बात करती रही है। ऐसे में वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण शहर में कथित अवैध जुआ संचालन और उससे जुड़ी संपत्तियों के आरोपों की जांच प्रशासनिक जवाबदेही का विषय है। सवाल यह भी नहीं कि किसी व्यक्ति की संपत्ति पर बुलडोजर चलेगा या नहीं। सवाल यह है कि क्या सरकार और उसकी एजेंसियां तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराएंगी? क्या अवैध जुआ संचालन के आरोपों की पुष्टि के लिए कार्रवाई होगी? क्या धन के स्रोत की जांच की जाएगी? और यदि अवैध गतिविधियों या संपत्ति से जुड़े अपराध प्रमाणित होते हैं, तो क्या कानून के अनुसार कार्रवाई होगी?
किसी भी सरकार की नीति का वास्तविक मूल्यांकन नारे या प्रतीकात्मक कार्रवाई से नहीं, बल्कि कानून के निष्पक्ष और समान क्रियान्वयन से होता है। किसी व्यक्ति की संपत्ति के विरुद्ध कार्रवाई भी कानूनी प्रक्रिया, सक्षम प्राधिकारी के निर्णय और न्यायिक समीक्षा के दायरे में ही होनी चाहिए।
काशी की प्रतिष्ठा केवल उसके घाटों, मंदिरों और सांस्कृतिक विरासत से नहीं बनती। यह इस बात से भी बनती है कि यहां कानून कितनी निष्पक्षता से लागू होता है। यदि अवैध जुआ संचालन से धन अर्जित करने और उसे संपत्तियों में निवेश करने के आरोपों में तथ्य हैं, तो उनकी जांच होनी चाहिए। यदि आरोप निराधार हैं, तो वह भी जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होना चाहिए।
सरकार से सवाल है कि क्या कथित अवैध कमाई और संपत्तियों के निवेश से जुड़े दावों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी? क्या जनता को यह बताया जाएगा कि शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई? और यदि किसी अपराध से अर्जित धन या बेनामी लेन-देन के प्रमाण मिलते हैं, तो क्या संबंधित लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कदम उठाए जाएंगे?
