वाराणसी: जुआरियों का सबसे महफूज़ ठिकाना, वाराणसी का आदमपुर थाना

वाराणसी: जुआरियों का सबसे महफूज़ ठिकाना, वाराणसी का आदमपुर थाना

पीडीए के संरक्षण में पनप रहा काला कारोबार

  • दर्जन भर पड़ोसी जिले के साथ-साथ बिहार तक से बुलाये जाते हैं बुकर, होता है करोड़ो का वारा-न्यारा
  • थाना आदमपुर पर उठे गंभीर सवाल : जुए के अड्डों का कथित सुरक्षित ठिकाना बना थाना क्षेत्र?
  • एक तरफ जीरो टॉलरेंस का सीएम का दावा, दूसरी तरफ पुलिस दे रही संगठित अपराध को बढ़ावा !
  • प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में अवैध जुआ संचालन पर गंभीर सवाल, शासन-प्रशासन की निगरानी व्यवस्था की परीक्षा
  • तीन कथित साझेदार पीडीए के मजबूत नेटवर्क और आठ-आठ घंटे की तीन पालियों में संचालन का दावा !
  • हर दांव पर वसूली और हर वसूली में पुलिस की कथित हिस्सेदारी का आखिर क्या है राज़ ?
  • मुख्यमंत्री की अपराध नियंत्रण नीति और जीरो टॉलरेंस के दावों की कसौटी पर स्थानीय कार्रवाई

वाराणसी (रणभेरी): काशी की पहचान उसकी आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक चेतना, शिक्षा और जीवंत सामाजिक परंपराओं से है। यह वह शहर है जिसकी गलियों में इतिहास सांस लेता है और जिसकी पहचान देश-दुनिया तक पहुंचती है। लेकिन इसी शहर में यदि अवैध जुआ संचालन, आर्थिक शोषण और संगठित आपराधिक गतिविधियों की ख़बर लगातार सामने आती हैं, तो सवाल केवल कानून-व्यवस्था का नहीं रह जाता। सवाल शहर के सामाजिक भविष्य, युवा पीढ़ी और प्रशासनिक जवाबदेही का भी बन जाता है। एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार अपराध नियंत्रण, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और कानून का राज स्थापित करने के दावे करती है। दूसरी तरफ वाराणसी में कथित जुआ अड्डों के संचालन, बड़े पैमाने पर धन के लेन-देन और पुलिस संरक्षण के दावे से जुड़े आरोप सामने आने की बात कही जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अवैध जुआ संचालन हो रहा है, तो उसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी है? और यदि जिम्मेदार तंत्र को इसकी जानकारी है, तो कार्रवाई का हिसाब कौन देगा?

आदमपुर थाना क्षेत्र पर बड़ा सवाल, आखिर क्यों चर्चा में है यह इलाका?

इस पूरे मामले में वाराणसी का आदमपुर थाना क्षेत्र विशेष जांच का विषय बनता जा रहा है। उपलब्ध कराए गए विवरण के दावे को जानकर आप हैरान हो जायेंगे, दावा किया गया है कि इस क्षेत्र में जुए के कई बड़े अड्डे संचालित होते हैं, जहां वाराणसी ही नहीं बल्कि आस-पास के कई जिलों सहित बिहार तक से बुकर लाखों नहीं करोड़ों रूपये लेकर पहुंचते हैं। सूत्र बताते है कि जुआ संचालित करने वाले अलग-अलग लोगों में सबसे ज्यादा ताकतवर नाम “पीडीए” का ही है जो कि दर्जनों जिले सहित बिहार तक के बुकर को बैठाकर महफ़िल सजवाते है, ख़बर है कि बहुचर्चित साझेदार “पीडीए” बड़े बड़े दिग्गज बुकरों को आमंत्रित करने में इसलिए कामयाब है क्यूंकि एक तरफ जहां चंदौली जिले से लगायत वाराणसी के इस इलाके को पुलिस की कृपा से पूरे शहर का सर्वाधिक सुरक्षित इलाका माना जाता हैं वही दूसरी तरफ बहुचर्चित साझेदार “पीडीए” की स्थानीय थाना आदमपुर में गहरी पैठ है ।

वाराणसी: जुआरियों का सबसे महफूज़ ठिकाना, वाराणसी का आदमपुर थाना

तीन कथित साझेदार, तीन पालियां और बड़े नेटवर्क का दावा

सूत्र बताते है कि आदमपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत जुआ संचालन से जुड़े तीन साझेदारों का नाम सबसे ज्यादा सुर्ख़ियों में है, जिन्हें पीडीए के नाम से जाना जाता है। बताया जा रहा है कि इसी पीडीए के संरक्षण में 24 घंटे अनवरत जुए का धड़ल्ले से संचालन होता है, साथ ही आदमपुर थाना क्षेत्र के मच्छोदरी से लेकर राजघाट के बीच हर दिन ठिकाना बदल-बदल कर यहाँ आठ-आठ घंटे की तीन पालियों में बड़े पैमाने पर जुए का संचालन होता है, जिसे स्थानीय पुलिस के संरक्षण एवं सहमति से “पीडीए” के साझेदारों की देख-रेख में संचालित किया जा रहा है।

हर दांव पर बड़ी वसूली और सबमे पुलिस की हिस्सेदारी !

इस मामले का सबसे गंभीर आरोप कथित आर्थिक वसूली और पुलिस तक हिस्सेदारी पहुंचने से संबंधित है। प्राप्त सूचना एवं विवरण में दावा किया गया है कि जुए के संचालन से जुड़े चर्चित कोड “पीडीए” के तीनों साझेदार अपने काले कारोबार के जरिये अवैध तरीके से अर्जित किये जा रहे धन से स्थानीय आदमपुर थाने को भी नियमित हिस्सा पहुचाते है। बताया जा रहा है कि “पीडीए” ही शहर के दिग्गज जुआरियों और बड़े-बड़े बुकरों के बीच की अहम् कड़ी है जिनके कमांड में यह काला कारोबार फल-फूल रहा है। यह आरोप अत्यंत गंभीर है। यदि कोई पुलिसकर्मी अवैध गतिविधि को जानबूझकर संरक्षण देता है या उसके बदले धन लेता है, तो यह केवल कर्तव्य में लापरवाही का मामला नहीं रहेगा। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर भ्रष्टाचार और अन्य लागू कानूनों के तहत कार्रवाई का प्रश्न भी उठ सकता है।

वाराणसी: जुआरियों का सबसे महफूज़ ठिकाना, वाराणसी का आदमपुर थाना

जानिए कौन होता है ‘बुकर’, कैसे सजती है लाखों के दांव वाली जुए की महफिल?

एक तरफ बड़ी रकम लेकर बैठता है कथित बैंकर, दूसरी तरफ 40–50 जुआरियों की भीड़; हर दांव का हिसाब एक ही व्यक्ति के साथ- यही है कथित खेल की असली कार्यप्रणाली ! जुए के कथित अवैध कारोबार में ‘बुकर’ उस व्यक्ति को कहा जाता है, जो बड़ी रकम लेकर खेल में बैंकर की भूमिका निभाता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ऐसे खेल में बुकर के सामने दर्जनों जुआरी अपने-अपने आर्थिक सामर्थ्य के अनुसार रकम लेकर बैठते हैं। उनकी संख्या कथित तौर पर 40 से 50 या इससे अधिक भी हो सकती है।

इस व्यवस्था में जुआरी आपस में एक-दूसरे के खिलाफ दांव नहीं लगाते, बल्कि प्रत्येक खिलाड़ी का दांव सीधे बुकर के साथ होता है। जीतने पर भुगतान और हारने पर रकम की वसूली का हिसाब भी इसी व्यवस्था के तहत होता है। यानी पूरी महफिल में एक तरफ बड़ी रकम लेकर बैठा बुकर और दूसरी तरफ अलग-अलग रकम दांव पर लगाने वाले अनेक खिलाड़ी होते हैं।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी में दावा किया गया है कि वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर संचालित होने वाले कथित जुआ सत्रों में बड़े बुकरों को बुलाया जाता है। उनके पास मौजूद बड़ी रकम और खिलाड़ियों की संख्या इस खेल के आर्थिक पैमाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। सवाल यह है कि यदि किसी स्थान पर इतनी बड़ी संख्या में लोग नियमित रूप से जुटते हैं और लाखों रुपये दांव पर लगाए जाते हैं, तो इसकी निगरानी और रोकथाम की जिम्मेदारी किसकी है?

आठ-आठ घंटे की कथित पालियां, हर दांव पर हिस्सेदारी का आरोप

चेहरे बदलते हैं, महफिल जारी रहती है! आदमपुर क्षेत्र में कथित जुआ संचालन के पीछे बंटवारे और वसूली की व्यवस्था होने का दावा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आदमपुर थाना क्षेत्र में कथित जुआ संचालन से जुड़े तीन साझेदारों द्वारा अलग-अलग स्थानों पर आयोजित खेलों के लिए व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। आरोप है कि संचालन की जिम्मेदारियां आठ-आठ घंटे की तीन पालियों में बांटी गई हैं। इसके तहत हर पाली में जिम्मेदारी संभालने वाला व्यक्ति बदल जाता है, जबकि कथित गतिविधि अलग-अलग स्थानों पर जारी रहती है। सूत्रों का दावा है कि जुए के प्रत्येक दांव या हाथ पर संचालन से जुड़े लोगों के लिए एक निश्चित रकम अथवा हिस्सेदारी तय होती है। कथित तौर पर इस रकम को खेल की व्यवस्था उपलब्ध कराने के बदले वसूला जाता है। यह भी आरोप लगाया गया है कि इसी वसूली से स्थानीय पुलिस तक हिस्सा पहुंचाया जाता है।

आखिर क्या है कथित कोड ‘पीडीए’ ?

पुल्लू, दीपक और अन्नू यादव- सूत्रों ने ‘पीडीए’ नाम के पीछे इन तीन नामों का दावा किया है, जांच-पड़ताल के दौरान रणभेरी न्यूज़ को उपलब्ध कराई गई जानकारी में ‘पीडीए’ नामक एक कथित कोड का उल्लेख किया गया है। सूत्रों का दावा है कि आदमपुर थाना क्षेत्र में जुए के संचालन से जुड़े तीन साझेदारों के नाम के शुरुआती अक्षरों को जोड़कर यह नाम प्रचलित हुआ। इस दावे के मुताबिक, ‘पी’ से पुल्लू यादव, ‘डी’ से दीपक यादव और ‘ए’ से अन्नू यादव का संकेत मिलता है। हालांकि, इस कथित कोड का वास्तविक इस्तेमाल, इन व्यक्तियों की भूमिका और उनके बीच साझेदारी की प्रकृति की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। सूत्रों का आरोप है कि ये तीनों व्यक्ति कथित तौर पर जुए के खेल के संचालन और व्यवस्थाओं से जुड़े हैं। यदि जांच में कथित साझेदारी और अवैध जुआ संचालन में भूमिका प्रमाणित होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, पुलिस संरक्षण के आरोपों की जांच भी स्वतंत्र रूप से होनी चाहिए, ताकि किसी भी स्तर पर मिलीभगत होने या न होने की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

शासन के दावे बनाम जमीनी हकीकत: जवाबदेही किसकी?

उत्तर प्रदेश सरकार अपराध नियंत्रण और भ्रष्टाचार के प्रति कठोर नीति की बात करती रही है। ऐसे में वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण शहर में अवैध गतिविधियों से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच शासन की घोषित नीति की भी परीक्षा है।यदि स्थानीय स्तर पर अवैध जुआ संचालन की शिकायतें हैं, तो उनकी जांच और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक होनी चाहिए। कितनी शिकायतें मिलीं? कितने स्थलों पर जांच हुई? कितनी बरामदगी हुई? कितने मामलों में मुकदमे दर्ज हुए? कितने मामलों में आरोपपत्र दाखिल हुए? कितने मामलों का निस्तारण हुआ?इन सवालों के जवाब से पता चलेगा कि कार्रवाई केवल कागजों पर है या जमीन पर भी प्रभावी है।प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र होने के कारण वाराणसी का राष्ट्रीय महत्व है, लेकिन कानून का प्रभावी क्रियान्वयन किसी शहर की राजनीतिक पहचान पर निर्भर नहीं होना चाहिए। प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित वातावरण और कानून के समान संरक्षण का अधिकार है। शासन की जिम्मेदारी केवल नीतियां घोषित करने तक सीमित नहीं है। उसे यह भी सुनिश्चित करना होता है कि स्थानीय तंत्र शिकायतों पर कार्रवाई करे और किसी भी स्तर पर मिलीभगत पाए जाने पर उचित कदम उठाए।

काशी की प्रतिष्ठा केवल उसके मंदिरों, घाटों, संस्कृति और इतिहास से नहीं बनती। उसकी पहचान इस बात से भी तय होती है कि यहां का नागरिक कितना सुरक्षित है, युवा कितने सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं और कानून का शासन कितना प्रभावी है। अवैध जुआ संचालन के आरोपों को सामान्य शिकायत मानकर छोड़ देना उचित नहीं होगा। जरूरत है निष्पक्ष जांच की, स्पष्ट जवाबदेही की और कार्रवाई के सत्यापित विवरण को सार्वजनिक करने की। यदि जुए का कोई संगठित नेटवर्क चल रहा है, तो उसे कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। यदि किसी स्तर पर संरक्षण या भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलते हैं, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

जुए के कथित साम्राज्य का सबसे बड़ा राज ! ‘पीडीए’ कौन, बुकरों की महफिल के पीछे कौन?

40–50 जुआरी, लाखों-करोड़ों के दांव और आठ-आठ घंटे की कथित पालियां ! वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र को लेकर सामने आए दावे कई असहज सवाल खड़े करते हैं। चर्चा एक ऐसे कथित नेटवर्क की है, जहां बड़े बुकर बैंकर की भूमिका में बैठते हैं, संचालन की जिम्मेदारियां बंटी होने का दावा है और हर दांव पर वसूली की बात कही जा रही है। सबसे रहस्यमय नाम है ‘पीडीए’। आखिर इस नाम के पीछे कौन है? क्या है बुकरों और कथित साझेदारों का पूरा खेल? पुलिस संरक्षण और हिस्सेदारी के आरोपों में कितना सच है? रणभेरी की विशेष खोजी रिपोर्ट में पढ़िए इस कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली, उठते सवाल और उन जवाबों की पड़ताल, जिनका इंतजार वाराणसी को है।

कहानी अभी बाकी है… आगे के अंक में जल्द ही खुलेंगे इस कथित नेटवर्क से जुड़े कुछ और चौंकाने वाले पहलू, जिनके जवाब कई सवालों की दिशा बदल सकते हैं। पढ़ते रहिये रणभेरी… जारी है पड़ताल और जिंदा है सवाल !

Share this news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *