योगी बोले- यूपी में पोषाहार सप्लाई करता था शराब माफिया: 2017 में व्यवस्था देख भौचक्का रह गया था, 3 महीने में एक बार पहुंचता था राशन

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वाराणसी (रणभेरी): रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में बुधवार को नौवें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर और प्रदेश सरकार की मंत्री बेबी रानी मौर्य सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस वर्ष अभियान की थीम ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ रखी गई है। अभियान के जरिए आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और सर्वांगीण विकास का प्रमुख केंद्र बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद भी किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के बसियापुर गांव की एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से बातचीत की। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि वह उनके गांव जा चुके हैं। कार्यकर्ता ने भी मुख्यमंत्री को पहचानने की बात कही।

2017 में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति देखकर जताई थी चिंता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में प्रदेश में सरकार बनने के शुरुआती दौर का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में जब उन्होंने व्यवस्था की समीक्षा की तो कई आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली थी। उन्होंने अधिकारियों से इसकी वजह जानने का प्रयास किया।

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मुख्यमंत्री के मुताबिक उस समय उन्हें जानकारी दी गई थी कि आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पोषण सामग्री की आपूर्ति में प्रभावशाली लोगों का हस्तक्षेप था। सामग्री नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो पाती थी और कई बार दो से तीन महीने के अंतराल में आपूर्ति होने की बात सामने आई।

उन्होंने कहा कि व्यवस्था में कमी का खामियाजा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को भुगतना पड़ता था। ऊपर स्तर पर होने वाली लापरवाही के लिए भी फील्ड में काम करने वाली महिलाओं को लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं लगातार मेहनत करती थीं, इसके बावजूद उनके मानदेय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो रही थी।

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आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका को किया जा रहा व्यापक

राष्ट्रीय पोषण माह के इस वर्ष के अभियान में आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका को व्यापक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का जोर इस बात पर है कि ये केंद्र सिर्फ पोषण सामग्री बांटने के स्थान न रहें, बल्कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में उनके स्वास्थ्य, सीखने की क्षमता और मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए महत्वपूर्ण संस्थान के तौर पर काम करें।

‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम के माध्यम से समुदाय को भी इस अभियान से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें अभिभावकों, स्थानीय समुदाय और अन्य संबंधित लोगों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना गया है।

बच्चों का बेहतर पोषण विकसित भारत की नींव: बेबी रानी मौर्य

प्रदेश की महिला एवं बाल विकास कल्याण मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय पोषण माह के तहत अभियान को गति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कुपोषण जैसी चुनौती से निपटने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य देश के भविष्य से सीधे जुड़ा है। यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है तो बच्चों को पर्याप्त और संतुलित पोषण उपलब्ध कराना होगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर बच्चों के पोषण और शुरुआती देखभाल की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

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मंत्री ने अभियान में योगदान देने वाले अभिभावकों और अन्य सहयोगियों को प्रोत्साहित करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से ही पोषण अभियान को व्यापक स्तर पर सफल बनाया जा सकता है।

बेबी रानी मौर्य ने मातृ वंदना योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की योजनाओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और माताओं को सहायता उपलब्ध कराने के साथ मां और बच्चे के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

शुरुआती दो साल बच्चे के लिए सबसे अहम: सावित्री ठाकुर

केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि काशी की धरती से पूरे देश में पोषण का संदेश पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चे के जीवन के शुरुआती दो वर्ष उसके विकास की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण पोषण मिलने का उसके आगे के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है।

उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे बच्चों और परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में अहम कड़ी हैं। सरकार की योजनाओं के जरिए महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

राज्यमंत्री ने मातृ वंदना योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसके माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों ने बेटियों के प्रति समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है।

काशी से राष्ट्रीय स्तर पर पोषण का संकल्प

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि काशी से राष्ट्रीय पोषण माह के संकल्प को देशभर में आगे ले जाने का संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि संतुलित और शुद्ध भोजन को स्वस्थ जीवन का आधार माना गया है।

उन्होंने कहा कि पोषण अभियान केवल सरकार का कार्यक्रम नहीं है। इसे सफल बनाने के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है। परिवार, अभिभावक, समुदाय और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मिलकर बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वस्थ बचपन ही विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार करता है। जिस तरह किसी मजबूत इमारत के लिए उसकी नींव का मजबूत होना जरूरी होता है, उसी तरह देश के भविष्य के लिए बच्चों का स्वस्थ और सुपोषित होना आवश्यक है।

उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्रों को बेहतर सुविधाओं और आधुनिक वातावरण से जोड़ने का काम किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 24 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में काम हुआ है।

पोषण से शिक्षा तक, आंगनबाड़ी केंद्रों को नया स्वरूप

राष्ट्रीय पोषण माह-2026 के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों के शुरुआती विकास का प्रमुख आधार बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान में बच्चों के पोषण के साथ स्वास्थ्य जांच, प्रारंभिक शिक्षा, स्वच्छता, व्यवहार और विकास संबंधी पहलुओं पर भी ध्यान देने का संदेश दिया जा रहा है।

सरकार का उद्देश्य है कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों और उनके परिवारों के लिए भरोसेमंद स्थानीय केंद्र बनें। इसके लिए कार्यकर्ताओं की भूमिका को भी मजबूत करने और समुदाय को अभियान से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने एकमत होकर कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी योजनाओं के भरोसे नहीं जीती जा सकती। इसके लिए परिवार और समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। इसी सोच के साथ इस वर्ष की थीम ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ को जनअभियान का रूप देने पर जोर दिया गया।

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