वाराणसी (रणभेरी): काशी की सदियों पुरानी पहचान, धार्मिक आस्था और बनारसी संस्कृति को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शहर के विकास और विरासत संरक्षण को गति देने के लिए भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड से वाराणसी में 69.21 करोड़ रुपये से अधिक की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) किया है।
इन परियोजनाओं के तहत एक ओर शहर के 119 सार्वजनिक पार्कों का कायाकल्प और सौंदर्यीकरण किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर सारनाथ और मैदागिन क्षेत्र में आधुनिक स्ट्रीट फूड हब विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही काशी के कई पुराने और महत्वपूर्ण मार्गों को उनकी ऐतिहासिक पहचान के अनुरूप नया रूप देने की योजना है।
MoU पर हस्ताक्षर का कार्यक्रम ताज होटल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नगर निगम, वाराणसी विकास प्राधिकरण और संबंधित संस्थाओं के अधिकारी एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे।
48 करोड़ रुपये से 119 पार्कों का होगा कायाकल्प
पहले समझौते के तहत BPCL की ओर से करीब 48 करोड़ रुपये CSR के रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे। इस राशि से वाराणसी नगर निगम क्षेत्र के 119 सार्वजनिक उद्यानों को विकसित किया जाएगा।
पार्कों में सिर्फ हरियाली बढ़ाने तक काम सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों की दैनिक जरूरतों और मनोरंजन को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। प्रस्तावित कार्यों में बेहतर लैंडस्केपिंग, पैदल चलने के लिए ट्रैक, ओपन जिम, बच्चों के लिए खेल उपकरण, जल निकासी व्यवस्था और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था शामिल है।
पार्कों की नियमित हरियाली और रखरखाव के लिए हॉर्टिकल्चर से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जाएगा। इससे शहर के अलग-अलग इलाकों में रहने वाले लोगों को अपने आसपास बेहतर और व्यवस्थित सार्वजनिक स्थान उपलब्ध हो सकेंगे।
सारनाथ और मैदागिन में बनेंगे आधुनिक फूड स्ट्रीट हब
काशी के खानपान की पहचान को व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए सारनाथ और मैदागिन में दो आधुनिक स्ट्रीट फूड हब विकसित किए जाएंगे। इन स्थानों पर स्थानीय खानपान और बनारसी स्वाद को बढ़ावा देने के साथ वेंडरों के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं तैयार की जाएंगी। प्रस्तावित फूड हब में व्यवस्थित वेंडिंग जोन, पानी और स्वच्छता की सुविधा, CCTV निगरानी, सोलर लाइटिंग तथा आगंतुकों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
इसका उद्देश्य पारंपरिक बनारसी खानपान को सुरक्षित रखते हुए उसे पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए अधिक सुविधाजनक एवं आकर्षक बनाना है। इससे छोटे दुकानदारों और स्थानीय खाद्य विक्रेताओं को भी व्यवस्थित कारोबार का स्थान मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना BPCL के साथ काशी इंटीग्रेटेड पार्किंग एंड रिक्रिएशनल फाउंडेशन (KIPRF) और वाराणसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड (VSCL) की साझेदारी में आगे बढ़ाई जाएगी।
ठठेरी बाजार से काल भैरव तक बदलेगा विरासत गलियों का स्वरूप
दूसरे MoU के तहत वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) के सहयोग से करीब 21.21 करोड़ रुपये की लागत से शहर के प्रमुख ऐतिहासिक रास्तों और गलियों का पुनर्विकास किया जाएगा। इस योजना में ठठेरी हेरिटेज गली से काल भैरव मंदिर तक के मार्ग को विरासत संरक्षण की थीम पर विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही गोदौलिया चौराहे से मैदागिन चौराहे के बीच के महत्वपूर्ण मार्ग को भी नया स्वरूप दिया जाएगा।
मणिकर्णिका घाट क्षेत्र में मणिकर्णिकेश्वर मंदिर की तरफ जाने वाली गली को भी पुनर्विकसित किया जाएगा। इन स्थानों पर आधुनिक निर्माण के बजाय काशी की पारंपरिक स्थापत्य और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप विकास कार्य किए जाने पर जोर रहेगा।
पत्थर की सड़क से हेरिटेज लाइट तक होंगे कई बदलाव
हेरिटेज कॉरिडोर के विकास के दौरान सड़क और आसपास के क्षेत्र को एक समान विरासत शैली में तैयार करने की योजना है। इसमें पत्थरों से निर्मित पक्की सड़क, भवनों के अग्रभाग का नवीनीकरण, हेरिटेज शैली की रोशनी, आकर्षक साइन बोर्ड और स्ट्रीट फर्नीचर जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इसके अलावा दीवारों पर स्थानीय संस्कृति को दर्शाने वाले म्यूरल, सार्वजनिक कला और पैदल यात्रियों के लिए सुविधाजनक रास्ते तैयार किए जाने की योजना है। इससे इन ऐतिहासिक इलाकों में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सकेगा।
पर्यटन के साथ स्थानीय कारोबार को भी मिलेगा सहारा
इन योजनाओं को केवल सौंदर्यीकरण की परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, विरासत क्षेत्रों का व्यवस्थित विकास होने से धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
बेहतर पैदल मार्ग, प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई, साइन बोर्ड और सुविधाजनक सार्वजनिक स्थान पर्यटकों के लिए काशी के पुराने इलाकों को अधिक सुगम बना सकते हैं। वहीं फूड हब के विकसित होने से स्थानीय खानपान और छोटे कारोबारियों को एक व्यवस्थित बाजार उपलब्ध होने की संभावना है।
इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद है। विशेष रूप से पारंपरिक खानपान, हस्तशिल्प और पर्यटन से जुड़े छोटे कारोबारों को इन परियोजनाओं से अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।
36 महीने में पूरा करने का लक्ष्य
परियोजनाओं को करीब 36 महीने की अवधि में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना पूरी होने के बाद शहर के सार्वजनिक स्थानों, पार्कों और ऐतिहासिक मार्गों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है।
नगर निगम के अनुसार, इन कार्यों के माध्यम से एक तरफ नागरिकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास होगा, तो दूसरी तरफ काशी की ऐतिहासिक पहचान और पारंपरिक स्वरूप को भी संरक्षित रखा जाएगा।
महापौर अशोक तिवारी ने इसे काशी के विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उनके अनुसार, आधुनिक सुविधाओं के विस्तार के साथ शहर की मूल सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना भी जरूरी है। प्रस्तावित परियोजनाएं इसी सोच को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाई जा रही हैं।
कुल मिलाकर, करीब 69.21 करोड़ रुपये की इन दोनों परियोजनाओं से वाराणसी में पार्कों के विकास, स्ट्रीट फूड संस्कृति को व्यवस्थित करने और ऐतिहासिक गलियों के संरक्षण को एक साथ गति मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में इन योजनाओं के धरातल पर उतरने के बाद काशी के कई पुराने इलाकों में विकास और विरासत का नया मेल देखने को मिल सकता है।
