वाराणसी (रणभेरी): काशी में गंगा का जलस्तर लगातार ऊपर जाने से बाढ़ का खतरा अब और गंभीर होता जा रहा है। सोमवार सुबह आठ बजे गंगा का पानी 69.94 मीटर के स्तर तक पहुंच गया। इस वर्ष अब तक दर्ज किया गया यह सबसे अधिक जलस्तर है। नदी का पानी बढ़ने के साथ ही तटवर्ती निचले इलाकों में तेजी से फैल रहा है और कई स्थानों पर जनजीवन प्रभावित होने लगा है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर वरुणा नदी पर भी साफ दिखाई देने लगा है। वरुणा के आसपास बसे निचले इलाकों में बाढ़ का पानी आबादी तक पहुंचने के साथ खेतों और सब्जियों की फसलों में भी फैल गया है। इससे स्थानीय लोगों के साथ किसानों की चिंता भी बढ़ गई है।
सोमवार की सुबह से वाराणसी में मौसम बदला रहा। आसमान में बादल छाए रहे और बीच-बीच में बारिश होती रही। सुबह तापमान लगभग 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बारिश और गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
केंद्रीय जल आयोग और आपदा प्रबंधन विभाग के अनुमान के मुताबिक आने वाले 24 घंटे में गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रह सकता है। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि पानी बढ़ने की रफ्तार में कुछ कमी आने की संभावना है।
प्रमुख घाटों के बीच संपर्क हुआ प्रभावित
गंगा का पानी बढ़ने के कारण काशी के लगभग सभी प्रमुख घाटों के बीच आवागमन प्रभावित हो गया है। कई घाट एक-दूसरे से कट गए हैं। अस्सी घाट पर होने वाला नियमित ‘सुबह-ए-बनारस’ कार्यक्रम भी प्रभावित हुआ है। आयोजन का मंच गंगा के बढ़े पानी में डूब चुका है और आरती के लिए स्थान में भी बदलाव करना पड़ा है।
घाट क्षेत्र में कारोबार करने वाले दुकानदारों की परेशानियां भी बढ़ गई हैं। पानी बढ़ने के कारण कई दुकानें पीछे सड़क की तरफ खिसक गई हैं। पुराने अस्सी घाट की ओर जाने वाले रास्ते पर भी पानी का दबाव बढ़ता जा रहा है।

हरिश्चंद्र घाट की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। पानी बढ़ने से सड़क पर ही अंतिम संस्कार करने जैसी स्थिति पैदा हो गई है। वहीं मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले लोगों की संख्या और व्यवस्था के कारण प्रतीक्षा बढ़ गई है।
दशाश्वमेध घाट से नमोघाट के बीच पुलिस और एनडीआरएफ की निगरानी बढ़ा दी गई है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दशाश्वमेध घाट स्थित जल पुलिस चौकी को मीरघाट के पास स्थानांतरित किया गया है।
नगवां नाला में घुसा गंगा का पानी, कई बस्तियों पर खतरा
गंगा का पानी अब नगवां नाला क्षेत्र में भी प्रवेश करने लगा है। पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो नगवां नाला के आसपास के इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए स्थिति और गंभीर हो सकती है। आशंका जताई जा रही है कि पानी रामेश्वर मठ के पीछे तक पहुंच सकता है।
ऐसी स्थिति में नगवां, सोनकर-हरिजन बस्ती और गंगोत्री विहार के आसपास झोपड़ियों में रहने वाले दर्जनों परिवार सीधे प्रभावित हो सकते हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच लगातार बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंता बनी हुई है। रमना स्थित शवदाह स्थल पहले ही बाढ़ के पानी की चपेट में आ चुका है। आसपास के सब्जी उत्पादक किसानों के खेतों में भी पानी भर गया है। खेतों में खड़ी फसल डूबने से किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका है।
वरुणा नदी ने बढ़ाई परेशानी, 75 से ज्यादा परिवार प्रभावित
गंगा के साथ वरुणा नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे इलाकों में भी हालात बिगड़ने लगे हैं। सलारपुर रेलवे लाइन के आसपास से लेकर खालिसपुर, कोनिया पुल और नक्खीघाट तक कई बस्तियां प्रभावित हुई हैं। चमेलिया बस्ती, डिपो कॉलोनी और खालिसपुर क्षेत्र में 75 से अधिक परिवार बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। खतरे को देखते हुए कुछ परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए हैं, जबकि कई लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं।
प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार सलारपुर प्राथमिक विद्यालय में चार लोगों ने शरण ली है। सरैया राहत शिविर में 34 लोग ठहरे हैं। वहीं सिटी गर्ल्स स्कूल और बड़ी बाजार स्कूल में बनाए गए राहत शिविरों में 37 लोगों को रखा गया है। राहत शिविरों में मौजूद लोगों में 25 बच्चे और दो बुजुर्ग भी शामिल हैं। इसके अलावा 40 से अधिक परिवार ऐसे हैं जिन्होंने बाढ़ की स्थिति को देखते हुए किराये के कमरों या अपने रिश्तेदारों के घरों में अस्थायी रूप से रहने का फैसला किया है।

प्रशासन ने शुरू किया राहत वितरण
बाढ़ प्रभावित लोगों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने के लिए प्रशासन ने राहत अभियान तेज कर दिया है। रविवार को वरुणा नदी से प्रभावित इलाकों के 49 परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई।
तहसीलदार अमृत सरोज की मौजूदगी में विद्या विहार इंटर कॉलेज में प्रभावित परिवारों को राशन के पैकेट वितरित किए गए। राहत पैकेट में चावल, दाल, खाद्य तेल, नमक, चीनी और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री शामिल थी। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है। राहत शिविरों में पहुंच रहे लोगों की व्यवस्था के साथ-साथ जलस्तर और बाढ़ के फैलाव की भी निगरानी की जा रही है।

लगातार बढ़ते पानी से बढ़ी चिंता
गंगा और वरुणा दोनों नदियों के बढ़ते जलस्तर ने काशी के नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। घाटों पर गतिविधियां प्रभावित होने के साथ ही निचले इलाकों में घरों, खेतों और स्थानीय कारोबार पर भी बाढ़ का असर पड़ रहा है।
आने वाले 24 घंटे स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो नगवां, रमना और वरुणा किनारे की अन्य निचली बस्तियों में पानी का दायरा और बढ़ सकता है। प्रशासन और राहत दल प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
