वाराणसी (रणभेरी): मुहर्रम के अवसर पर शुक्रवार को वाराणसी में आस्था और अकीदत का माहौल देखने को मिला। शहर के विभिन्न इलाकों में शिया मुस्लिम समुदाय की ओर से ताजिया, जियारत और मातमी जुलूस निकाले गए। “या हुसैन” की सदाओं के बीच लोगों ने इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश की। जुलूसों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और पूरे रास्ते धार्मिक उत्साह का वातावरण बना रहा।
इसी क्रम में छित्तूपुर ग्राम सभा का पारंपरिक ताजिया जुलूस भी निर्धारित मार्ग से निकाला गया। यह जुलूस काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) परिसर से होते हुए नरिया स्थित कर्बला पहुंचा। वहां धार्मिक परंपरा के अनुसार ताजिए को सुपुर्द-ए-खाक किया गया, जिसके बाद जुलूस का समापन हुआ।
ताजियादारों के अनुसार, यह परंपरा काफी पुरानी है और लंबे समय से उसी मार्ग से जुलूस निकाला जाता रहा है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय क्षेत्र के निर्माण के बाद भी इस परंपरा को बनाए रखा गया और वर्षों से तय व्यवस्था के तहत जुलूस निकाला जाता है।

मुहर्रम के अवसर पर इस बार भी अलग-अलग डिजाइन और शैली के ताजिए लोगों के आकर्षण का केंद्र बने। इनमें बुर्राख, नगीने वाले, पीतल, मोती, फूलों और चपरखट शैली के ताजिए प्रमुख रहे। इन ताजियों को तैयार करने में कारीगरों ने कई महीनों तक मेहनत की थी। इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़क किनारे मौजूद रहे।
कड़ी सुरक्षा के बीच शांतिपूर्ण रहा आयोजन
संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे जुलूस मार्ग पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। जगह-जगह पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे। सीसीटीवी कैमरों और अन्य निगरानी साधनों से पूरे आयोजन पर नजर रखी गई। प्रशासन और आयोजकों के समन्वय से पूरा आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
