(रणभेरी): ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर पैदा हुए भू-राजनीतिक हालात के बीच देश में रसोई गैस को लेकर कई तरह की अफवाहें फैल रही हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि भारत में एलपीजी की कोई वास्तविक कमी नहीं है। हालांकि घबराहट में की जा रही ज्यादा बुकिंग और जमाखोरी को रोकने के लिए कुछ नए नियम लागू किए गए हैं। सरकार के मुताबिक इन बदलावों का उद्देश्य गैस की सप्लाई व्यवस्था को संतुलित रखना है, ताकि सिलेंडर जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक समय पर पहुंच सके।
ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के लिए अलग बुकिंग नियम
पेट्रोलियम मंत्रालय ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के बीच अंतराल को लेकर नया नियम लागू किया है। ग्रामीण इलाकों में अब एक सिलेंडर मिलने के बाद अगली बुकिंग के लिए कम से कम 45 दिन का इंतजार करना होगा। पहले यह अवधि 25 दिन थी। वहीं शहरों में रहने वाले उपभोक्ताओं के लिए बुकिंग का अंतराल 25 दिन ही रखा गया है।
अधिकारियों का कहना है कि कुछ जगहों पर अतिरिक्त सिलेंडर जमा करने की शिकायतें सामने आई थीं, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी जैसी स्थिति बन रही थी। हाल के दिनों में पैनिक बुकिंग भी काफी बढ़ी है, जबकि वास्तविक आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।
घरेलू उत्पादन बढ़ाने के निर्देश
सरकार ने रिफाइनरियों को अधिकतम एलपीजी उत्पादन करने के निर्देश भी दिए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार 5 मार्च के बाद से 12 मार्च तक घरेलू उत्पादन में करीब 28 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे गैस की सप्लाई पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही सरकार वैकल्पिक ईंधन विकल्पों पर भी काम कर रही है, ताकि एलपीजी की मांग को संतुलित रखा जा सके।
कमर्शियल सिलेंडरों पर नई व्यवस्था
कमर्शियल गैस सिलेंडरों को लेकर भी नई व्यवस्था लागू की गई है। अब तेल कंपनियां राज्यों के साथ समन्वय कर औद्योगिक और कमर्शियल उपभोक्ताओं को उनकी औसत मासिक मांग का लगभग 20 प्रतिशत ही गैस उपलब्ध कराएंगी। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सिलेंडरों की अवैध बिक्री और जमाखोरी पर रोक लगाना है। चूंकि कमर्शियल एलपीजी पर सब्सिडी नहीं मिलती, इसलिए घरेलू सिलेंडरों के गलत इस्तेमाल की आशंका भी बनी रहती है।
OTP से ही मिलेगी गैस डिलीवरी
पारदर्शिता बढ़ाने और कालाबाजारी रोकने के लिए गैस डिलीवरी में OTP सिस्टम को भी व्यापक रूप से लागू किया जा रहा है। पहले यह व्यवस्था लगभग आधे उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य थी, लेकिन अब इसे करीब 90 प्रतिशत उपभोक्ताओं तक लागू करने की तैयारी है। इस प्रक्रिया के तहत डिलीवरी के समय उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा। डिलीवरी बॉय को वही कोड बताने पर ही सिलेंडर की डिलीवरी दर्ज होगी।
वैकल्पिक ईंधन की अतिरिक्त व्यवस्था
एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को अतिरिक्त 48 हजार किलोलीटर केरोसिन उपलब्ध कराने का फैसला किया है। इससे पहले भी एक लाख किलोलीटर केरोसिन जारी किया जा चुका है। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में होटल और कमर्शियल संस्थानों को सीमित समय के लिए बायोमास, कोयला और केरोसिन जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की अनुमति देने पर भी विचार किया जा रहा है।
सरकार का दावा: ईंधन की कमी नहीं
सरकार ने दोहराया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और अन्य ईंधनों की कोई कमी नहीं है। संबंधित मंत्रालयों की ओर से हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाए जाएंगे।
