मुकेश खन्ना का राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर तीखा बयान, कहा- ”भक्तों से अपील, नकदी और गहनों का चढ़ावा बंद करें”

मुकेश खन्ना का राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर तीखा बयान, कहा- ''भक्तों से अपील, नकदी और गहनों का चढ़ावा बंद करें''

(रणभेरी): राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित घोटाले को लेकर वरिष्ठ अभिनेता मुकेश खन्ना ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित की जाने वाली नकदी और कीमती सामान यदि अपने वास्तविक उद्देश्य तक नहीं पहुंच रहे हैं, तो यह केवल आर्थिक अनियमितता नहीं बल्कि आस्था के साथ विश्वासघात है।

मुकेश खन्ना ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर लंबी पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया धन भगवान तक नहीं पहुंचता, बल्कि रास्ते में ही उसका दुरुपयोग हो जाता है। उन्होंने लिखा कि कई स्थानों पर चढ़ावे के नाम पर लूट जैसी स्थिति बनी हुई है और ऐसे लोगों को केवल चोर या बेईमान कहना भी पर्याप्त नहीं होगा।

उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि जो लोग भगवान के नाम पर चढ़ाई गई श्रद्धा की राशि में गड़बड़ी करते हैं, वे सामान्य अपराधियों से भी अधिक गंभीर अपराध कर रहे हैं क्योंकि वे न सिर्फ भक्तों का विश्वास तोड़ते हैं बल्कि धार्मिक आस्था को भी चोट पहुंचाते हैं।

अभिनेता ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि ऐसी घटनाएं लगातार सामने आती रहें, तो श्रद्धालुओं को नकद राशि और गहनों का चढ़ावा देने से बचना चाहिए। उनके अनुसार यदि मंदिरों में धन का दुरुपयोग रुकना है तो सबसे प्रभावी तरीका यही होगा कि लोग नकदी और कीमती वस्तुएं चढ़ाना बंद करें। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान श्रद्धा और सच्ची भक्ति से प्रसन्न होते हैं, धन-दौलत से नहीं।

7 जून को सामने आया था मामला

गौरतलब है कि 7 जून को राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया था। मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इसकी गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।

प्रारंभिक जांच में दान, चढ़ावे के रिकॉर्ड तथा मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ मामलों में कथित अनियमितताओं के संकेत मिलने की बात सामने आई। इसके बाद जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी।

आठ आरोपियों पर दर्ज हुई FIR

SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले ने व्यापक चर्चा का रूप ले लिया और मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे।

प्रबंधन में भी हुए बदलाव

मामले के बीच मंदिर प्रशासन में भी महत्वपूर्ण बदलाव होने की जानकारी सामने आई। सूत्रों के अनुसार श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। वहीं, मंदिर निर्माण से जुड़े प्रभारी गोपाल राव को भी व्यवस्थाओं से अलग किए जाने की चर्चा है।

हालांकि इन घटनाक्रमों को लेकर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक और विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

आस्था और पारदर्शिता पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद मंदिरों में चढ़ावे के रखरखाव, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर मिलने वाले दान का उपयोग पूरी ईमानदारी और पारदर्शी व्यवस्था के साथ होना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।

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