तेलियाना के श्री राम जानकी मंदिर में झूला महोत्सव की धूम, कजरी गीतों से गूंजा परिसर

तेलियाना के श्री राम जानकी मंदिर में झूला महोत्सव की धूम, कजरी गीतों से गूंजा परिसर

वाराणसी (रणभेरी): तेलियाना स्थित प्राचीन श्री राम जानकी मंदिर में परंपरा के अनुसार पांच दिवसीय झूला महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। श्रावण शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन का शुभारंभ सोमवार को हुआ। महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार की संध्या संगीत और सावनी लोकगीतों के नाम रही। बारिश के बीच मंदिर परिसर में कजरी की स्वर लहरियां गूंजीं तो श्रद्धालु सावन की भक्ति और लोक संस्कृति के रंग में डूब गए।

मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्री राम दरबार का विशेष एवं आकर्षक शृंगार किया गया। वहीं रजत निर्मित भव्य झूले पर बाल स्वरूप में विराजमान प्रभु श्री राम की मनोहारी झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रही। भक्तों ने श्रद्धा भाव से भगवान को झूला झुलाया और मंगलकामना की।

मंदिर के महंत रामदास महाराज के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में बिहार से पहुंचे लोक कलाकारों ने पारंपरिक झूला और कजरी गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम की शुरुआत लोक गायक मनोज सिंह ने साजिंदों के साथ गुरु वंदना और गणेश वंदना से की। इसके बाद एक के बाद एक सावनी गीतों की प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

बारिश के बीच कजरी ने बांधा समां

मंगलवार को दिन के दोनों पहरों में सावन से जुड़े कजरी गीतों की प्रस्तुतियां हुईं। शाम के समय जब बारिश तेज हुई, उसी दौरान कलाकारों ने सावन की रिमझिम फुहार और झूले की परंपरा से जुड़े लोकगीत सुनाए। गीतों के साथ मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भी झूम उठे। महिलाओं और स्थानीय नागरिकों की बड़ी संख्या में मौजूदगी से पूरा सभागार भरा रहा।

कजरी की पारंपरिक धुनों के बीच जब कलाकारों ने सावन की बारिश और राधा रानी के झूले का वर्णन करते हुए गीत प्रस्तुत किया, तो वातावरण में उत्सव का रंग और गहरा हो गया। भक्ति, लोक संगीत और सावन की फुहार का यह संगम श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहा।

बाल स्वरूप में प्रभु के दर्शन रहे विशेष

झूला महोत्सव की सबसे खास झांकी मंदिर के गर्भगृह में सजाई गई। श्री राम दरबार को आकर्षक फूलों और पारंपरिक सजावट से सजाया गया था। रजत झूले पर बाल रूप में विराजमान प्रभु श्री राम की छवि भक्तों को वात्सल्य भाव से जोड़ रही थी। श्रद्धालु बारी-बारी से झूले के दर्शन करते और भगवान को झुलाकर अपनी श्रद्धा अर्पित करते नजर आए।

आयोजकों के अनुसार झूला महोत्सव का उद्देश्य धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ सावन की लोक संस्कृति और कजरी गायन की परंपरा को जीवंत बनाए रखना भी है। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में प्रतिदिन भजन, झूला गीत और कजरी की प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को सुनने को मिलेंगी।

कार्यक्रम के दौरान विष्णुदास महाराज, जियालाल, केवल कुशवाहा, उत्कर्ष कुशवाहा, शिवम अग्रहरि, सोमनाथ समेत अनेक श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद रहे। मंदिर परिसर में देर तक भक्ति संगीत का माहौल बना रहा।

सावन के साथ जीवंत हुई लोक परंपरा

काशी की धार्मिक परंपराओं में सावन के झूला उत्सव का विशेष महत्व है। श्री राम जानकी मंदिर में आयोजित यह महोत्सव इसी परंपरा की निरंतरता को दर्शाता है। एक ओर जहां भगवान के बाल स्वरूप की पूजा और झूला सेवा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति करा रही है, वहीं दूसरी ओर कजरी गायन सावन की लोक संस्कृति को स्वर दे रहा है। बारिश की फुहारों के बीच लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने आयोजन को और भी यादगार बना दिया।

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