- मिल्कोपुर गांव में पुश्तैनी जमीन को लेकर तीन महीने से तनाव, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं
- पीड़ित परिवार का दावा- कई बार शिकायत के बाद भी नहीं रुकी दबंगई
वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र के मिल्कोपुर गांव में जमीन विवाद ने गंभीर रूप ले लिया है। पुश्तैनी जमीन पर कथित कब्जे, बाउंड्री तोड़ने, महिलाओं से मारपीट और पशुओं के साथ क्रूरता के आरोपों ने इलाके में तनाव बढ़ा दिया है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
वाराणसी (रणभेरी): जिले में भूमि विवादों से जुड़े मामलों में तनाव और हिंसक घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ने के आरोप सामने आ रहे हैं। कई मामलों में यह भी कहा जा रहा है कि समय रहते शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण विवाद गंभीर रूप ले रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में थाना चौबेपुर क्षेत्र के मिल्कोपुर गांव निवासी एक परिवार ने स्थानीय पुलिस पर शिकायतों को गंभीरता से न लेने और कार्रवाई में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
पीड़ित अशोक चौहान का कहना है कि उनकी पुश्तैनी जमीन पर गांव के कुछ लोगों द्वारा अवैध कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि बीते तीन महीनों के दौरान कई बार जमीन पर कब्जे का प्रयास किया गया, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, परिवार की महिलाओं के साथ मारपीट की गई तथा पशुओं के साथ भी कथित रूप से क्रूर व्यवहार किया गया। परिवार का कहना है कि प्रत्येक घटना की लिखित शिकायत स्थानीय पुलिस चौकी और थाना स्तर पर दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
घटनाक्रम पर एक नजर
पीड़ित परिवार के अनुसार विवाद की शुरुआत अप्रैल माह में हुई। उनका आरोप है कि 5 अप्रैल को कुछ लोगों ने उनकी जमीन की बाउंड्रीवाल तोड़ने का प्रयास किया। परिवार ने इसकी शिकायत पुलिस से की, लेकिन कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
इसके बाद 17 अप्रैल को कथित रूप से परिवार के पशुओं का छप्पर उजाड़ दिया गया। पीड़ित का आरोप है कि उनकी गर्भवती भैंस के साथ भी मारपीट की गई, जिससे पशु को गंभीर चोटें आईं। इस मामले में भी पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया।
परिवार का कहना है कि 22 मई को दोबारा जमीन पर कब्जा करने का प्रयास हुआ। शिकायत के बावजूद विवाद जस का तस बना रहा और स्थिति में कोई सुधार नहीं आया।
सबसे गंभीर घटना 11 जून की बताई जा रही है। पीड़ित के अनुसार उस दिन कुछ लोग लाठी-डंडों के साथ मौके पर पहुंचे, पशुओं को वहां से भगा दिया, नाद और खूंटे तोड़ दिए तथा विरोध करने पर परिवार की महिलाओं के साथ मारपीट की। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात कही जा रही है।
पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने हर घटना के बाद स्थानीय चौकी और थाना पुलिस को लिखित शिकायत दी, लेकिन मामला दर्ज करने या प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही विभिन्न मामलों में फंसाने की चेतावनी दी गई। उनका यह भी कहना है कि उन्होंने उच्च अधिकारियों से भी न्याय की मांग की, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि पुलिस अधिकारियों के बीच मामले को लेकर अलग-अलग स्तर पर निर्देश दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि भूमि विवादों में शुरुआती स्तर पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए तो अधिकांश मामलों को हिंसक रूप लेने से रोका जा सकता है। लोगों का मानना है कि समय पर हस्तक्षेप न होने से विवाद लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, वायरल वीडियो और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करने तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करने की मांग की है। परिवार का कहना है कि उन्हें अपनी जान-माल और संपत्ति की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है।
