जहां विराजते हैं बाबा विश्वनाथ वहीं रोजाना लगता है भारी जाम…

जहां विराजते हैं बाबा विश्वनाथ वहीं रोजाना लगता है भारी जाम…
  • अब तो लाइलाज हो गया है ज्ञानवापी रोड का जाम
  • अभी भी सड़क पर खड़ी कर दी जा रही हैं वीआईपी गाड़ियां
  • अब तो लोग इधर से गुजरना भी पसंद नहीं करते
  • रोजाना जाम के चलते चौपट हो गया है इलाके का कारोबार

राधेश्याम कमल

वाराणसी (रणभेरी): इस शहर का सबसे बड़ा दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि जहां पर बाबा विश्वनाथ विराजते हैं वहां रोजाना जाम लगा रहता है। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी चारों तरफ जाम की समस्या से जूझ रही है। जहां देखिये वहीं जाम ही जाम। हर कोई इस जाम के मकड़जाल में फंस कर सिसक रहा है। ऐसा नहीं कि जाम की समस्या को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं।

आयेदिन जाम की समस्या को लेकर अधिकारियों की बैठकें हुआ करती हैं लेकिन सब कुछ टॉय-टॉय फिस्स हो जाता है। शहर का सबसे व्यस्ततम मार्ग ज्ञानवापी रोड है जहां का जाम अब लाइलाज हो गया है। न जाने कितनी बार ज्ञानवापी रोड पर रोजाना लग रहे जाम की समस्या को लेकर पुलिस अधिकारियों की ओर से आदेश-निर्देश दिये गये। लेकिन यह सभी आदेश कागजी ही साबित हुए।

शहर का सबसे व्यस्ततम मार्ग मैदागिन-चौक से होते हुए ज्ञानवापी -बांसफाटक -गोदौलिया है। यह वीआईपी रोड के नाम से जाना है। क्योंकि इस मार्ग पर हमेशा राजनेताओं का आवागमन लगा रहता है। लेकिन शहर का सबसे व्यस्ततम वीआईपी मार्ग रोजाना जाम के मकड़जाल में बुरी तरह से जकड़ा हुआ है। इस जाम की मुख्य वजह ज्ञानवापी मोड़ है। यहीं पर काशी विश्वनाथ धाम में द्वादश ज्योर्तिलिंगों में एक बाबा विश्वनाथ विराजमान हैं। यहीं से काशी विश्वनाथ धाम में प्रवेश किया जाता है। आश्चर्य की बात है कि ज्ञानवापी गेट नंबर चार पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रहती है लेकिन किसी भी पुलिसकर्मी को इस सबसे व्यस्ततम मार्ग पर जाम को लेकर कुछ भी लेना-देना नहीं है।

जहां विराजते हैं बाबा विश्वनाथ वहीं रोजाना लगता है भारी जाम…

पुलिसकर्मी बैरिकेडिंग के अंदर खड़े होकर जाम में फंसे लोगों को बस देखते रहते हैं। पुलिस वालों को इस जाम से कोई मतलब नहीं है। उनकी ड्यूटी तो सिर्फ और सिर्फ ज्ञानवापी और काशी विश्वनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगायी गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि काशी विश्वनाथ में देवाधिदेव महादेव का दर्शन करने के लिए रोजाना लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। एक ओर बांसफाटक से ज्ञानवापी तक बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन करने के लिए बैरिकेडिंग में दूरदराज से आये श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहती हैं।

सड़क की दूसरी ओर माला-फूल एवं पूजन सामग्री बेचने वालों के भारी अतिक्रमण के चलते यह रोड और सिकुड़ कर रह गया है। चौक से लेकर ज्ञानवापी-कोतवालपुरा-बांसफाटक तक यही स्थिति बनी रहती है। इस संकरी एवं सिकुड़ी सड़क पर रोजाना लोगों की भीड़ चलती रहती है। मैदागिन से चौक-गोदौलिया जाने वाले या फिर गोदौलिया से ज्ञानवापी-चौक-मैदागिन आने वाले सभी इसी ज्ञानवापी मोड़ से ही गुजरते हैं। यहां पर स्थानीय लोगों के साथ ही बाहर से बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने वालों का भी रह-रह कर सैलाब चलता रहता है।

हर कोई ज्ञानवापी गेट नंबर चार तक पहुंचना चाहता है। भारी सैलाब के चलते रोजाना चौक से लेकर ज्ञानवापी-बांसफाटक-गोदौलिया तक जाम में जकड़ा रहता है। अगर ज्ञानवापी मोड़ पर कोई वीआईपी गाड़ी आ गई तो बस पूछिए मत निरीह नागरिकों की जलालत और भी बढ़ जाती है। सबसे बड़ी बात है कि वीआईपी गाड़ियां ज्ञानवापी मोड़ पर खड़ी कर दी जाती है। उधर से गुजरने वाले लोग इस जाम में फंसे रहते हैं। चारों तरफ शोर-शराबा, हार्न की कानफोड़ू कर्कश आवाजें लोगों के शांत मन को उद्वेलित करती हैं ।

अगर किसी को भी कहीं निर्धारित समय पर पहुंचना है और वह इस मार्ग पर आग गया तो निश्चित मानिये वह अपने गंतव्य स्थान पर सही समय पर नहीं पहुंच पायेगा। बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने जाम की समस्या से बचने के लिए इस रोड पर आना ही बंद कर दिया है। मैदागिन से चौक-बांसफाटक-गोदौलिया आदि आसपास के इलाकों का कारोबार इन्हीं सब वजहों से प्राय: ठप सा हो गया है। भारी जाम के चलते लोग अब इन इलाकों में आना नहीं चाहते हैं। जिन लोगों को अपना आवश्यक कार्य होता है वही इन क्षेत्रों से गुजरते हैं।

चौक से लेकर ज्ञानवापी-बांसफाटक तक रोजाना इतनी भीड़ रहती है कि इन मार्गों पर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। बाहर से आये श्रद्धालु सड़क के बीचोबीच होकर चलते रहते हैं जिसके चलते हर किसी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। ज्ञानवापी रोड भारी अतिक्रमण, वीआईपी गाड़ियों की मनमानी पार्किंग, फूल माला बेचने वालों का लगातार अतिक्रमण ने ज्ञानवापी मोड़ को शहर का सबसे जटिल ट्रैफिक प्वाइंट बना दिया है। कोई वीआईपी अगर विश्वनाथ मंदिर आता है तो वह सड़क पर गाड़ी छोड़ कर अंदर घंटों व्यतीत करता है। इस दौरान तब तक यह मार्ग पूरी तरह से बाधित रहता है।

यहां पर वाहनों की लंबी कतारें रोजाना लगी रहती है। काफी पहले यहां यह आदेश हुआ था कि अब वीआईपी गाड़ियां मैदागिन पर ही रुकेगी और अधिकारी वहां से पैदल ही ज्ञानवापी तक जायेंगे। लेकिन यह आदेश भी हवा हवाई साबित हुआ। सबसे बड़ी बात है कि काशी विश्वनाथ धाम परिसर में गाड़ियों के लिए पार्किंग भी बनाया गया है लेकिन कोई भी वीआईपी गाड़ी अंदर न जाकर बाहर ही सड़क पर खड़ी कर दी जाती है। आखिरकार ज्ञानवापी मोड़ का जाम कब खत्म होगा? यह एक सोचनीय विषय है।

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