(रणभेरी): मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने राज्य कर विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ ईमानदार व्यापारियों को सम्मानजनक और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में राज्य कर विभाग की भूमिका बेहद अहम है और विभाग को “विश्वास आधारित कर प्रशासन” का उदाहरण प्रस्तुत करना होगा।
सोमवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने शासन, मुख्यालय और फील्ड स्तर के अधिकारियों के साथ विभागीय कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि कर प्रणाली को अधिक सरल, डिजिटल और जवाबदेह बनाया जाना चाहिए ताकि व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जीएसटी पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने, अपील निस्तारण और रिफंड से जुड़ी प्रक्रियाओं में देरी पूरी तरह समाप्त की जाए। उन्होंने कहा कि करदाताओं को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
उन्होंने छोटे और मध्यम व्यापारियों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि जिला और मंडल स्तर तक करदाता सहायता एवं जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक और डेटा एनालिटिक्स का बेहतर उपयोग कर कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है, वहीं वैध व्यापार को प्रोत्साहन भी दिया जा सकता है।
जीएसटी संग्रह में देश में दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य को जीएसटी और वैट मद से कुल 1,15,977 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो संशोधित अनुमान का लगभग 98.8 प्रतिशत है। जीएसटी राजस्व संग्रह के मामले में उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर रहा। इस सूची में महाराष्ट्र पहले और कर्नाटक तीसरे स्थान पर रहे।
अधिकारियों के अनुसार जीएसटी बकाया वसूली के तहत 2,658 करोड़ रुपये जमा किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 228 प्रतिशत अधिक हैं। वहीं वैट बकाया से 800 करोड़ रुपये की वसूली हुई, जो बीते वर्ष की तुलना में 29 प्रतिशत ज्यादा रही।
प्रवर्तन इकाइयों द्वारा 2,071 करोड़ रुपये की वसूली की गई, जिसमें पिछले वर्ष की अपेक्षा 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्ष 2026-27 के लिए विभाग को कुल 1,98,071 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया है। इसमें जीएसटी से 1,49,956 करोड़ रुपये तथा वैट से 48,115 करोड़ रुपये प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
अप्रैल 2026 में प्रदेश ने 10,896 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 9.6 प्रतिशत अधिक बताया गया।
कई जोनों में राजस्व वृद्धि दर्ज
जोनवार समीक्षा में सामने आया कि अप्रैल 2026 में प्रदेश के अधिकांश जोनों में बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया गया। गौतमबुद्ध नगर जोन ने 1,506 करोड़ रुपये के संग्रह के साथ 18 प्रतिशत वृद्धि हासिल की।
इसी तरह सहारनपुर जोन में 35.1 प्रतिशत तथा वाराणसी प्रथम जोन में 33.2 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। मुरादाबाद जोन ने भी पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।
मुख्यमंत्री ने अपेक्षाकृत कम प्रदर्शन करने वाले जोनों को विशेष कार्ययोजना तैयार कर लक्ष्य हासिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि वे स्वयं फील्ड में उतरें और व्यापारियों के साथ सीधे संवाद स्थापित करें ताकि समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।
फर्जी फर्मों और कर चोरी पर सख्ती जारी
मुख्यमंत्री ने फर्जी फर्मों और कर चोरी के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि बोगस फर्मों के खिलाफ 477 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है तथा 168 लोगों की गिरफ्तारी की गई।
कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए 7 नवंबर 2025 को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। विभाग द्वारा लगभग 180 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट को ब्लॉक किया गया, जबकि न्यायनिर्णयन कार्रवाई के माध्यम से 2,250 करोड़ रुपये की मांग सृजित हुई।
लंबित अपीलों के समयबद्ध निस्तारण पर जोर
बैठक में अपील निस्तारण की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025-26 में जीएसटी की 52,432 और वैट की 11,365 अपीलों सहित कुल 63,797 मामलों का निस्तारण किया गया।
वर्तमान में जीएसटी की 18,504 और वैट की 2,193 अपीलें लंबित हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी लंबित मामलों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
उत्तर प्रदेश बना सबसे अधिक जीएसटी करदाताओं वाला राज्य
अधिकारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश 21.82 लाख सक्रिय करदाताओं के साथ देश का सबसे बड़ा जीएसटी करदाता राज्य बन चुका है। प्रदेश में जीएसटी पंजीकरण आवेदनों के निस्तारण की औसत अवधि केवल 8 दिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 14 दिन बताया गया।
प्रदेश में 100 प्रतिशत भौतिक सत्यापन की व्यवस्था लागू की गई है। रिटर्न दाखिले की स्थिति में भी उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय औसत से आगे है। यहां 90 प्रतिशत से अधिक करदाता नियत समय तक रिटर्न दाखिल कर रहे हैं। प्रदेश का औसत मासिक रिटर्न दाखिला प्रतिशत 93 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 91 प्रतिशत है।
व्यापारियों की कार्यशील पूंजी प्रभावित न हो
जीएसटी रिफंड मामलों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश में रिफंड निस्तारण की औसत अवधि 27 दिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 48 दिन है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रिफंड व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और तेज बनाया जाए ताकि व्यापारियों की कार्यशील पूंजी प्रभावित न हो।
तकनीक आधारित कर प्रशासन के संबंध में अधिकारियों ने जानकारी दी कि 16 मानकों के आधार पर 1.59 लाख वार्षिक रिटर्नों के मिसमैच डेटा पर विधिक कार्रवाई की जा रही है। एकीकृत नोटिस जारी करने के लिए विशेष मॉड्यूल भी विकसित किया गया है।
वर्ष 2025-26 में 1.33 लाख डीलरों की स्क्रूटनी के दौरान 2,369 करोड़ रुपये की मांग सृजित की गई, जबकि 345 करोड़ रुपये जमा कराए गए। इसके अलावा 22 कॉर्पोरेट सर्किलों में वर्चुअल सुनवाई की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डेटा आधारित निगरानी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण से कर प्रशासन अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेगा तथा भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगाने में भी मदद मिलेगी।
