बदहाली की मार झेल रहा शिवपुर का ऐतिहासिक रामभट्ट तालाब

बदहाली की मार झेल रहा शिवपुर का ऐतिहासिक रामभट्ट तालाब

वाराणसी (रणभेरी): शिवपुर क्षेत्र में स्थित पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग का महत्वपूर्ण चौथा पड़ाव, रामभट्ट तालाब, इन दिनों गंभीर उपेक्षा का शिकार है। कभी धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाने वाला यह ऐतिहासिक तालाब अब बदहाली की स्थिति में पहुंच चुका है। तालाब के चारों ओर लगे पत्थर जगह-जगह से उखड़ गए हैं और सीढ़ियां धंसती जा रही हैं, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खतरा बढ़ गया है।

बदहाली की मार झेल रहा शिवपुर का ऐतिहासिक रामभट्ट तालाब

स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले दो वर्षों से तालाब की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। पानी का स्तर तेजी से घट रहा है और जो पानी बचा है, वह भी अत्यंत गंदा हो चुका है। कभी मछलियों से भरे रहने वाले इस तालाब में अब मुश्किल से ही मछलियां नजर आती हैं। दो वर्ष पहले गंदगी के कारण बड़ी संख्या में मछलियों की मौत भी हो चुकी है।

रामभट्ट तालाब धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यहां छठ पूजा, जिउतिया और पंचक्रोशी परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु स्नान-ध्यान करते हैं। तालाब के किनारे स्थित धर्मशाला में यात्री ठहरते हैं। काशी के एक छोर पर जहां दुर्गाकुंड स्थित है, वहीं दूसरे छोर पर मां अष्टभुजी मंदिर इस तालाब के पास स्थित है, जो इसकी धार्मिक महत्ता को और बढ़ाता है।

बदहाली की मार झेल रहा शिवपुर का ऐतिहासिक रामभट्ट तालाब

इतिहास और मान्यताओं के अनुसार, इस तालाब को महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि यह पास के द्रौपदी कुंड से भी जुड़ा हुआ है। बावजूद इसके, इसकी देखरेख को लेकर जिम्मेदार विभागों की लापरवाही साफ दिखाई देती है।

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स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब वर्ष 2021-22 में तालाब और धर्मशाला के जीर्णोद्धार के लिए स्वीकृत 8.45 करोड़ रुपये के कार्यों पर नजर डाली जाती है। वर्ष 2022 में शुरू हुआ यह कार्य एक साल में पूरा होने का दावा किया गया था, जिसमें तालाब की सफाई और जल प्रबंधन की व्यवस्था भी शामिल थी। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट नजर आती है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन केवल औपचारिकता निभाता नजर आता है। सरस्वती पूजा के दौरान मूर्तियों का विसर्जन तो कराया जाता है, लेकिन उसके बाद सफाई की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जाती। परिणामस्वरूप तालाब में गंदगी का अंबार लगा हुआ है।

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लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर की ओर तुरंत ध्यान दिया जाए। समय रहते यदि उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह तालाब पूरी तरह समाप्त होने की कगार पर पहुंच सकता है।

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